Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-9 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 9

आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद)

छायावादी युग के प्रवर्तक जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता: मित्रों द्वारा आत्मकथा लिखने के आग्रह पर कवि का विनम्र अस्वीकार, जीवन की साधारणता, वंचनाओं, प्रियसी की स्मृतियों और व्यक्तिगत वेदना को सार्वजनिक न करने की मर्यादा।

Quick Key Takeaways:
रचना की पृष्ठभूमि: 'हंस' पत्रिका के 'आत्मकथा विशेषांक' (1932) के लिए जब मित्रों ने जयशंकर प्रसाद से आत्मकथा लिखने का अनुरोध किया, तो उन्होंने आत्मकथा लिखने के बजाय 'आत्मकथ्य' शीर्षक से यह अमर कविता लिखी।
कवि द्वारा आत्मकथा न लिखने के 4 प्रमुख कारण:
1. जीवन की साधारणता: कवि का जीवन नितांत सामान्य रहा है, जिसमें कोई ऐसी महान उपलब्धि नहीं जिसे संसार के सामने गर्व से प्रस्तुत किया जाए।
2. दुखों और वंचनाओं का जीवन: जीवन छल-कपट, अभावों और विश्वासघात से भरा रहा है; आत्मकथा लिखने से पुराने घाव फिर हरे हो जाएंगे।
3. उपहास का भय: अपनी दुर्बलताओं और खाली गागर को देखकर लोग उपहास उड़ाएंगे और आनंद लेंगे।
4. निजी स्मृतियों की पवित्रता: प्रियसी के साथ बिताए गए सुखद क्षण कवि के जीवन की निजी निधि (पाथेय) हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना वे उचित नहीं मानते।
काव्य-शिल्प: छायावादी लाक्षणिक भाषा, तत्सम प्रधान खड़ी बोली, मानवीकरण, रूपक, अनुप्रास अलंकार, और वियोग शृंगार।
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1. आत्मकथ्य की छायावादी पृष्ठभूमि, स्मृतियों का पाथेय व मानवीय मर्यादा

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद) की रूपरेखा।

जयशंकर प्रसाद का जीवन-दर्शन व कविता का मर्म
मधुप और खाली गागर का प्रतीक: मन रूपी भँवरा गुनगुनाकर अपनी वेदना कहता है। जीवन रूपी गागर खाली है।
स्मृति को पाथेय बनाना: थके हुए जीवन-यात्री के लिए बीते सुखद पलों की स्मृतियां ही जीवन-मार्ग का संबल (पाथेय) हैं।
मौन रहने की प्रार्थना: कवि अपनी मौन व्यथा को जगाना नहीं चाहते — 'छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएं आज कहूँ? / क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?'
📊 आत्मकथ्य: जयशंकर प्रसाद की छायावादी स्मृतियांVisual Model
आत्मकथ्य: जयशंकर प्रसाद की अंतर्मुखी वेदना
आत्मकथा न लिखने का निर्णय
जीवन में कोई महान उपलब्धि न होना
अपनी 'खाली गागर' और दुर्बलताओं की लज्जा
धोखेबाज मित्रों के छल-प्रपंच को न उजागर करना
कवि का पाथेय व स्मृतियां
प्रियतमा की बीती स्मृतियां ही जीवन का संबल
कवि की वेदना अंतर्मन में शांत सोई हुई है
'कंथा' (गुदड़ी) को उधेड़कर न दिखाने का संकल्प
छायावादी सौंदर्य: तत्सम प्रधान खड़ी बोली, मानवीकरण, बिंब-विधान व शांत रस

जीवन की साधारणता, आत्मकथा न लिखने के 4 कारण, प्रियसी की स्मृतियों का पाथेय, और कंथा की सीवन के प्रतीकों का वैचारिक मानचित्र।

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2. काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या, बिंब-विधान व शिल्प-सौंदर्य

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

प्रमुख काव्यांशों का भावार्थ व सौंदर्य
काव्यांश 1 ('मधुप गुनगुनाकर कह जाता...'):
- भावार्थ: कितने ही जीवन इस अनंत नीले आकाश में अपना व्यंग्य-मलिन उपहास लिख गए हैं। तुम मुझ दुर्बल से अपनी आत्मकथा लिखकर अपनी कमजोरियां जगजाहिर करने को क्यों कहते हो?
काव्यांश 2 ('उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की...'):
- भावार्थ: उन चांदनी रातों में खिलखिलाकर हँसने वाली सुखद स्मृतियों को मैं कैसे गाऊँ? वह सुख जिसका स्वप्न देखकर मैं जाग गया, वह आलिंगन में आते-आते मुसकाकर भाग गया। उसकी लाल कपोलों की लालिमा से तो प्रातःकाल की उषा भी अपनी सुंदरता उधार लेती थी।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते हैं? 'आत्मकथ्य' कविता के आधार पर तीन कारण स्पष्ट कीजिए।
1. जीवन में कोई महान उपलब्धि न होना: कवि का मानना है कि उनका जीवन एक साधारण मनुष्य का जीवन रहा है। उनके जीवन में ऐसी कोई असाधारण या गौरवशाली उपलब्धि नहीं है जिसे पढ़कर संसार चमत्कृत हो सके।
2. दुखों व वंचनाओं के घाव हरे होने का भय: कवि का जीवन छल-प्रपंच, अभावों और विश्वासघात से भरा रहा है। आत्मकथा लिखने से पुरानी भूली-बिसरी पीड़ाएं और मन की दबी हुई वेदना पुनः जाग उठेगी।
3. अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों को गोपनीय रखना: कवि अपने निजी प्रेम और सुखद क्षणों को अपनी अनमोल धरोहर मानते हैं। वे अपनी जीवन-संगिनी की मधुर स्मृतियों को बाज़ार में सार्वजनिक प्रदर्शन की वस्तु नहीं बनाना चाहते।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'स्मृति को पाथेय बनाने से कवि का क्या आशय है?' 'आत्मकथ्य' कविता के आधार पर समझाइए।
(b) 'आत्मकथ्य' कविता की भाषा-शैली और छायावादी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Part (a) 'स्मृति को पाथेय बनाना' का आशय:
- 'पाथेय' का अर्थ: पाथेय का अर्थ होता है — 'यात्रा का संबल' अथवा 'रास्ते का भोजन/सहारा'।
- कवि का मर्म: कवि का संपूर्ण जीवन संघर्षों, अभावों और दुखों से भरा रहा है। इस नीरस और थका देने वाले जीवन-मार्ग पर उनकी प्रियसी (पत्नी) के साथ बिताए गए कुछ सुखद, मधुर और प्रेममय क्षण ही उनकी एकमात्र जीवन-शक्ति हैं।
- जिस प्रकार एक थका हुआ यात्री पाथेय के सहारे अपनी लंबी यात्रा पूरी करता है, उसी प्रकार कवि उन मधुर स्मृतियों के सहारे अपने जीवन की शेष यात्रा काट रहे हैं।
Part (b) भाषा-शैली व छायावादी विशेषताएं:
1. छायावादी लाक्षणिकता: शब्दों के वाच्यार्थ के स्थान पर गूढ़ लाक्षणिक और प्रतीकात्मक अर्थ (जैसे 'मधुप', 'खाली गागर', 'मुरझाकर गिरती पत्तियां', 'अरुण कपोल')।
2. तत्सम प्रधान मानक खड़ी बोली: भाषा अत्यंत परिष्कृत, संस्कृतनिष्ठ और साहित्यिक है।
3. सजीव बिंब-विधान: 'उज्ज्वल गाथा', 'मधुर चाँदनी रातें', 'मुसकाकर भाग गया' में दृश्य और भावात्मक बिंबों का सुंदर संयोजन।
4. अलंकार: 'मधुप गुनगुनाकर' में मानवीकरण; 'हँसते-हँसते' में पुनरुक्ति प्रकाश; रूपक और अनुप्रास अलंकार।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): छायावादी सौंदर्य: 'जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: छायावादी सौंदर्य: 'जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में' (RTC Drill)
जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में। / अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में। / उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की। / सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की? / छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएं आज कहूँ? / क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?
प्रश्न 1: 'अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में' पंक्ति में किसकी सुंदरता का वर्णन है? \rightarrow कवि की प्रियसी (दिवंगत पत्नी) के लाल कपोलों (गालों) की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन है, जिससे प्रातःकालीन उषा भी अपनी लालिमा उधार लेती थी।
प्रश्न 2: 'सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?' में 'कंथा' और 'सीवन' किसका प्रतीक हैं? \rightarrow 'कंथा' (गुदड़ी) कवि के फटे-पुराने, अभावग्रस्त आंतरिक जीवन का प्रतीक है, और 'सीवन उधेड़ना' जीवन के बंद पड़े गुप्त दुखों और घावों को कुरेदने का प्रतीक है।
प्रश्न 3: इस काव्यांश में कौन-सा गुण और कौन-सी भाषा है? \rightarrow गुण: माधुर्य गुण; भाषा: तत्सम प्रधान छायावादी खड़ी बोली
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: आत्मकथा न लिखने के 3 कारणों का स्पष्टीकरण।
2 Marks: 'स्मृति को पाथेय बनाने' और 'कंथा की सीवन' प्रतीकों का गहन दार्शनिक विश्लेषण।
1 अंक: छायावादी लाक्षणिक खड़ी बोली व बिंब योजना का उल्लेख।
1 अंक: जयशंकर प्रसाद की मानवीय शालीनता और विनम्रता का उद्घाटन।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: कवि को अहंकारी समझना (कवि अत्यंत विनम्र, संकोची और स्वाभिमानी हैं)।
Trap 2: 'कंथा' का शाब्दिक अर्थ (कंबल) लिखना भूलकर प्रतीकार्थ (कवि का अंतर्मन) न बताना।
Trap 3: भाषा में ब्रजभाषा लिखना (जयशंकर प्रसाद की भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद) काव्य-सौंदर्य व केंद्रीय भाव
कक्षा 10 सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद)' का मूल भावार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं जीवन-संदेश स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: प्रसंग व केंद्रीय भाव (Context & Central Theme): काव्यांश का सटीक संदर्भ, कवि का उद्देश्य एवं अंतर्निहित मुख्य भावार्थ का स्पष्ट निरूपण।
1 अंक
चरण 2: काव्य-शिल्प व अलंकार (Poetic Craft & Figures of Speech): भाषा-शैली (ब्रज/अवधी/खड़ी बोली), प्रयुक्त प्रमुख अलंकार (अनुप्रास/रूपक/उपमा आदि) व बिंब-विधान का उल्लेख।
1 अंक
चरण 3: जीवन-मूल्य व संदेश (Life Values & Moral): कविता द्वारा संप्रेषित नैतिक मूल्य, मानवतावादी दृष्टि एवं समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद)' में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में पूरे 3 अंक प्राप्त करने का आदर्श प्रारूप:

1. प्रसंग व मूल भाव: काव्यांश के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए बताएं कि कवि किस मानसिक दशा, आध्यात्मिक सत्य अथवा सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
2. काव्य-शिल्प (कला पक्ष): कविता की भाषा-शैली (गेयता, तुकांत, रस) और प्रमुख अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण) का सटीक उल्लेख करें।
3. जीवन-संदेश (भाव पक्ष): कविता से मिलने वाली शाश्वत मानवीय सीख, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
भाव-पक्ष (अर्थ) और कला-पक्ष (अलंकार, भाषा) दोनों का उत्तर में संतुलन अनिवार्य है।
वर्तनी की शुद्धता और उपयुक्त साहित्यिक हिंदी शब्दावली का प्रयोग करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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प्रसाद जी का मानना था कि उनका जीवन अत्यंत साधारण, अभावग्रस्त और दुखों से भरा रहा है। उनके जीवन में कोई ऐसी महान उपलब्धि नहीं थी जिसे सुनकर लोग प्रेरणा ले सकें; आत्मकथा लिखने से उनके सोए हुए पुराने दर्द और घाव फिर से हरे हो जाते।

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