Curriculum 2026–27
Practice
📚CBSE Class 10 · Subject Code 002 / 085 · Academic Year 2026–27

CBSE Class 10 Hindi Course A (002) & Course B (085) — संपूर्ण पाठ्यक्रम नोट्स

Course A (002: क्षितिज-2, कृतिका-2, व्याकरण) · Course B (085: स्पर्श-2, संचयन-2, व्याकरण). Complete topic-by-topic concept notes, formulas, step-by-step NCERT derivations, 7,040+ verified questions, and board simulation tests.

Prescribed Modules
44 Chapters
Verified Question Bank
7,040+ Questions
Board Theory Exam
80 Marks (3 Hours)

CBSE Class 10 Hindi Course A & Course B Syllabus & Unit-Wise Marks Distribution (2026–27)

खंड क: अपठित बोध (Reading Comprehension)
अपठित गद्यांश व अपठित काव्यांश
14 Marks
खंड ख: व्यावहारिक व्याकरण (Applied Grammar)
Course A: वाक्य भेद, वाच्य, पद परिचय, अलंकार | Course B: पदबंध, वाक्य रूपांतरण, समास, मुहावरे
16 Marks
खंड ग: पाठ्यपुस्तक व पूरक पुस्तक (Literature)
Course A: क्षितिज-2 व कृतिका-2 | Course B: स्पर्श-2 व संचयन-2
30 Marks
खंड घ: रचनात्मक लेखन (Creative Writing)
अनुच्छेद, पत्र, विज्ञापन, ई-मेल, सूचना लेखन, लघुकथा
20 Marks

All 44 Chapter Revision Notes & Modules

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Chapter 1 15 min read

अपठित बोध (गद्यांश व काव्यांश)

अपठित गद्यांश व काव्यांश, केंद्रीय भाव, शीर्षक चयन, तथ्यात्मक व वैचारिक प्रश्नोत्तर तकनीक।

अपठित गद्यांश व काव्यांश के गहन पठन द्वारा मुख्य वैचारिक संदेश, भावार्थ और उपयुक्त शीर्षक चयन के नियम स्पष्ट करता है।
प्रश्नों के सटीक, तथ्यपरक व भाषा-सम्मत उत्तर लिखने के महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी कौशल का विकास करता है।
Chapter 2 15 min read

रचना के आधार पर वाक्य भेद

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद (सरल, संयुक्त, मिश्र), प्रधान व आश्रित उपवाक्य, और वाक्य रूपांतरण नियम।

रचना के आधार पर वाक्य के तीन प्रमुख भेदों—सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य और मिश्र वाक्य की पहचान व संरचना सिखाता है।
योजक शब्दों की सहायता से वाक्यों के पारस्परिक रूपांतरण और आश्रित उपवाक्यों की पहचान के व्यावहारिक नियम समझाता है।
Chapter 3 15 min read

वाच्य (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य)

वाच्य के तीन भेद (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य), सकर्मक-अकर्मक क्रिया पहचान, और वाच्य परिवर्तन प्रक्रिया।

क्रिया के विधान के आधार पर कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य की परिभाषा व पहचान के स्पष्ट नियम प्रस्तुत करता है।
सकर्मक और अकर्मक क्रियाओं के आधार पर एक वाच्य से दूसरे वाच्य में रूपांतरण की प्रामाणिक विधियां सिखाता है।
Chapter 4 15 min read

पद परिचय

व्याकरणिक कोटियां (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय, लिंग, वचन, कारक, काल) और पदों का व्याकरणिक परिचय।

वाक्य में प्रयुक्त पदों के व्याकरणिक भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक और काल की दृष्टि से परिचय देने की विधि सिखाता है।
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय के विभिन्न भेदों का विश्लेषण कर पद-परिचय को अत्यंत सरल बनाता है।
Chapter 5 15 min read

अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार)

शब्दालंकार (श्लेष) व अर्थालंकार (उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण) के लक्षण, उदाहरण, और काव्य सौंदर्य पहचान।

काव्य में सौंदर्य की वृद्धि करने वाले प्रमुख अलंकारों—श्लेष, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति और मानवीकरण के लक्षण स्पष्ट करता है।
काव्य पंक्तियों में निहित वाचक शब्दों व चमत्कारी अर्थों की पहचान कर काव्य-सौंदर्य परखने की क्षमता विकसित करता है।
Chapter 6 15 min read

रचनात्मक लेखन (अनुच्छेद, पत्र, ई-मेल, विज्ञापन, संदेश लेखन)

अनुच्छेद लेखन, औपचारिक/अनौपचारिक पत्र लेखन, स्ववृत्त लेखन (बायोडाटा), ई-मेल, विज्ञापन, और संदेश लेखन प्रारूप।

अनुच्छेद, औपचारिक व अनौपचारिक पत्र, और आधुनिक ई-मेल लेखन के मानक सीबीएसई प्रारूप व शब्द-सीमा के नियम सिखाता है।
आकर्षक विज्ञापन निर्माण, स्ववृत्त (बायोडाटा) और संक्षिप्त संदेश लेखन में सृजनात्मक प्रस्तुति के कौशल का विकास करता है।
Chapter 7 15 min read

सूरदास के पद

सूरसागर के भ्रमरगीत से चार पद, गोपियों का उद्धव के निर्गुण ज्ञान मार्ग पर अनन्य सगुण प्रेम की विजय और वाक्चातुर्य।

सूरदास रचित भ्रमरगीत के पदों में गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य, एकनिष्ठ और निश्छल प्रेम को उजागर करता है।
गोपियों के अनूठे वाक्चातुर्य और व्यंग्य द्वारा उद्धव के निर्गुण ज्ञान और योग मार्ग पर सगुण भक्ति की श्रेष्ठता स्थापित करता है।
Chapter 8 15 min read

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

रामचरितमानस के बालकांड से शिवधनुष टूटने पर परशुराम का क्रोध, लक्ष्मण का व्यंग्य, और श्रीराम की विनयशीलता।

तुलसीदास रचित इस प्रसंग में शिवधनुष भंग के उपरांत परशुराम के क्रोध, लक्ष्मण के तीखे व्यंग्य और राम की शांत विनयशीलता का सजीव चित्रण है।
अवधी भाषा के अप्रतिम सौंदर्य, वीर रस, रौद्र रस और दोहा-चौपाई छंद की संरचना को विस्तार से समझाता है।
Chapter 9 15 min read

आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद)

जयशंकर प्रसाद की छायावादी कविता, जीवन के सरल यथार्थ, वेदना की स्मृतियां, और आत्मकथा न लिखने के दार्शनिक तर्क।

छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा अपने जीवन के अभावों, पीड़ा और व्यक्तिगत स्मृतियों को प्रकट न करने के दार्शनिक भाव व्यक्त करता है।
कवि अपने जीवन को सामान्य और भोली स्मृतियों से युक्त मानकर गंभीर अंतरावलोकन और विनम्रता का संदेश देते हैं।
Chapter 10 15 min read

उत्साह व अट नहीं रही है

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताएं: 'उत्साह' में क्रांतिदूत बादल और 'अट नहीं रही है' में फागुन के प्राकृतिक सौंदर्य का उल्लास।

'उत्साह' में बादल को नवजीवन और सामाजिक क्रांति के प्रतीक के रूप में गर्जना करने का आह्वान किया गया है।
'अट नहीं रही है' कविता में फागुन मास की असीम प्राकृतिक सुंदरता, मदमस्त वातावरण और मानवीय उल्लास का मनोहारी वर्णन है।
Chapter 11 15 min read

यह दंतुरित मुसकान व फसल

नागार्जुन की कविताएं: 'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मनमोहक हंसी का प्रभाव और 'फसल' में प्रकृति और मानव श्रम का संगम।

'यह दंतुरित मुसकान' में अबोध शिशु की मोहक हंसी द्वारा कठोर से कठोर हृदय में भी जीवन और वात्सल्य रस के संचार को दर्शाया गया है।
'फसल' कविता नदियों के जल, मिट्टी के पोषक तत्वों, सूर्य के प्रकाश और कोटि-कोटि किसानों के पसीने के सामूहिक परिणाम को नमन करती है।
Chapter 12 15 min read

संगतकार (मंगलेश डबराल)

मंगलेश डबराल की कविता, मुख्य गायक को संबल देने वाले संगतकार का मूक त्याग, निस्वार्थ साधना, और मनुष्यता का सम्मान।

मुख्य गायक के सुर को गिरने से बचाने वाले पृष्ठभूमि के संगतकार के मूक सहयोग, निस्वार्थ निष्ठा और कला-साधना को रेखांकित करता है।
संगतकार द्वारा अपनी प्रसिद्धि त्यागकर दूसरे को शीर्ष पर पहुंचाने के कार्य को उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सच्ची मनुष्यता सिद्ध करता है।
Chapter 13 15 min read

नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश)

स्वयं प्रकाश की कहानी, कैप्टन चश्मेवाले की मूक देशभक्ति, हालदार साहब का कौतूहल, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अधूरी प्रतिमा पर चश्मा लगाने वाले गरीब, दिव्यांग कैप्टन के माध्यम से आम नागरिकों की सच्ची देशभक्ति को दर्शाता है।
स्पष्ट करता है कि देशभक्ति सीमा पर लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के प्रति अपनत्व और सम्मान की भावना ही वास्तविक राष्ट्रभक्ति है।
Chapter 14 15 min read

बालगोबिन भगत (रामवृक्ष बेनीपुरी)

रामवृक्ष बेनीपुरी का रेखाचित्र, कबीरपंथी गृहस्थ संत बालगोबिन भगत का कर्मठ जीवन, अंधविश्वासों का खंडन, और बहू का पुनर्विवाह।

कबीरपंथी बालगोबिन भगत के गृहस्थ संत जीवन, संगीत-साधना, सादगी और आडंबरहीन कर्मयोग का जीवंत रेखाचित्र प्रस्तुत करता है।
पुत्र की मृत्यु पर शोक के स्थान पर आत्मा-परमात्मा के मिलन का उत्सव मनाकर और बहू के पुनर्विवाह का समर्थन कर सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करता है।
Chapter 15 15 min read

लखनवी अंदाज़ (यशपाल)

यशपाल का व्यंग्य निबंध, लखनऊ के नवाब साहब का खीरा खाने का कृत्रिम रईसी प्रदर्शन, और नई कहानी आंदोलन पर तीखा कटाक्ष।

ट्रेन में नवाब साहब द्वारा खीरे को केवल सूंघकर खिड़की से बाहर फेंकने के नवाबी दिखावे के माध्यम से पतनशील सामंती मानसिकता पर व्यंग्य करता है।
बिना विचार, कथ्य और पात्रों के रची जाने वाली अमूर्त 'नई कहानी' की प्रवृत्ति पर सटीक साहित्यिक कटाक्ष प्रस्तुत करता है।
Chapter 16 15 min read

एक कहानी यह भी (मन्नू भंडारी)

मन्नू भंडारी की आत्मकथ्य शैली की रचना, पिता का संशयी स्वभाव, कॉलेज प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव, और स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी।

प्रसिद्ध लेखिका मन्नू भंडारी के बचपन, उनके पिता के अंतर्विरोधी व्यक्तित्व और कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के क्रांतिकारी प्रभाव का वर्णन है।
लेखिका के स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय योगदान और एक स्वतंत्र, संवेदनशील नारी रचनाकार के रूप में उनके व्यक्तित्व के निर्माण को दर्शाता है।
Chapter 17 15 min read

नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)

यतींद्र मिश्र का व्यक्तिचित्र, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां की शहनाई साधना, गंगा-जमुनी संस्कृति, रियाज़, और काशी के प्रति अगाध प्रेम।

शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्ला खां के सादगीपूर्ण जीवन, अनवरत संगीत रियाज़ और गंगा-जमुनी साझा संस्कृति के प्रति अगाध निष्ठा को चित्रित करता है।
उस्ताद खां के काशी, मां गंगा और बालाजी मंदिर के प्रति श्रद्धाभाव को प्रस्तुत कर संगीत को ईश्वर की सच्ची इबादत सिद्ध करता है।
Chapter 18 15 min read

संस्कृति (भदंत आनंद कौसल्यायन)

भदंत आनंद कौसल्यायन का विचारोत्तेजक निबंध, 'सभ्यता' और 'संस्कृति' में सूक्ष्म अंतर, न्यूटन व सुई-धागे की खोज, और मानव कल्याण की भावना।

मानव द्वारा नए तथ्य या वस्तु के आविष्कार की मूल आंतरिक प्रेरणा को 'संस्कृति' और उसके बाह्य भौतिक उपयोग को 'सभ्यता' के रूप में परिभाषित करता है।
स्पष्ट करता है कि जिस योग्यता या विचार से मानव का कल्याण होता है वही वास्तविक संस्कृति है, जबकि विनाशकारी विचार 'असंस्कृति' हैं।
Chapter 19 15 min read

माता का अँचल (शिवपूजन सहाय)

शिवपूजन सहाय के उपन्यास 'देहाती दुनिया' का अंश, ग्रामीण बचपन के लोकखेल, पिता का वात्सल्य, और संकट में मां की ममता का शरणस्थल।

ग्रामीण अंचल के सहज, उन्मुक्त बचपन, देशी खेलों, बाल-मंडली के आनंद और पिता के अपनत्व भरे वात्सल्य का सजीव वर्णन करता है।
सांप के भय से व्याकुल बालक भोलानाथ द्वारा पिता की गोद छोड़कर मां के आंचल में शरण पाने की घटना से मां की ममता की श्रेष्ठता सिद्ध होती है।
Chapter 20 15 min read

साना-साना हाथ जोड़ि...

मधु कांकरिया का सिक्किम यात्रा वृत्तांत, गंगतोक का रहस्यमयी सौंदर्य, हिमालय की विराटता, बीहड़ों में पत्थरों को तोड़ती पहाड़ी महिलाओं का संघर्ष।

सिक्किम की राजधानी गंगतोक, तीस्ता नदी और हिमालय के अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य का सम्मोहक व काव्यात्मक यात्रा वृत्तांत प्रस्तुत करता है।
कठिन बर्फीले पहाड़ों पर जीवन यापन करने वाले स्थानीय श्रमजीवियों, सड़क बनाती महिलाओं और सेना के जवानों के असीम त्याग को नमन करता है।
Chapter 21 15 min read

मैं क्यों लिखता हूँ?

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का निबंध, आंतरिक विवशता व प्रत्यक्ष अनुभव, हिरोशिमा के परमाणु विस्फोट की जले पत्थर पर छपी छाया।

लेखक के लिखने की आंतरिक व्याकुलता, आत्म-प्रकाशन की मजबूरी और बाह्य दबावों के प्रभाव का दार्शनिक विश्लेषण करता है।
हिरोशिमा के परमाणु विस्फोट में पत्थर पर छपी मानव छाया के प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा लेखक की संवेदना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को जागृत करता है।
Chapter 22 15 min read

पदबंध (Course B)

Course B व्याकरण: पदबंध के पांच भेद (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण पदबंध) की पहचान व संरचना।

वाक्य में प्रयुक्त पद-समूह के व्याकरणिक इकाई के रूप में कार्य करने वाले पदबंध की परिभाषा व पहचान समझाता है।
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और क्रियाविशेषण पदबंध के शीर्ष पद की पहचान और बोर्ड प्रश्नों के सटीक समाधान सिखाता है।
Chapter 23 15 min read

अपठित बोध (Course B 085)

Course B अपठित बोध: तथ्यात्मक व वैचारिक गद्यांशों का विश्लेषण, केंद्रीय संदेश, और बहुविकल्पीय प्रश्न समाधान।

अपठित गद्यांशों के चिंतनपरक पठन, मुख्य तर्कों के अवगाहन और उपयुक्त शीर्षक चयन के नियम स्पष्ट करता है।
सीबीएसई के आधुनिक योग्यता-आधारित बहुविकल्पीय और संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्नों को शुद्धता से हल करना सिखाता है।
Chapter 24 15 min read

रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण (Course B)

Course B वाक्य रूपांतरण: सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्यों के घटक, योजक शब्द, और रूपांतरण तकनीक।

रचना की दृष्टि से सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्यों की पहचान और आश्रित उपवाक्यों के भेद स्पष्ट करता है।
अर्थ में बिना परिवर्तन किए एक प्रकार के वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में सुगमता से रूपांतरित करने के नियम सिखाता है।
Chapter 25 15 min read

समास (Course B)

Course B समास: 6 भेदों (अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि) का विग्रह और उदाहरण।

समस्त पदों के निर्माण, पूर्वपद-उत्तरपद की प्रधानता और समास-विग्रह के प्रामाणिक नियम सिखाता है।
अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि समास के सूक्ष्म अंतर और उदाहरणों की स्पष्ट व्याख्या करता है।
Chapter 26 15 min read

मुहावरे (Course B)

Course B मुहावरे: पाठ्यपुस्तकों पर आधारित लोकप्रिय मुहावरे, लाक्षणिक अर्थ, और सटीक वाक्य प्रयोग।

पाठ्यपुस्तकों में आए महत्वपूर्ण मुहावरों के लाक्षणिक अर्थ और उनके व्यावहारिक वाक्य-प्रयोग के नियम प्रस्तुत करता है।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के रिक्त स्थान पूर्ति और संदर्भ-आधारित मुहावरा प्रश्नों को सही करने की तकनीक समझाता है।
Chapter 27 15 min read

बड़े भाई साहब (प्रेमचंद)

प्रेमचंद की अमर कहानी, बड़े भाई साहब का अध्ययनशील बड़प्पन, छोटे भाई की सहज सफलता, और उम्र व अनुभव की श्रेष्ठता।

बाल-मनोविज्ञान और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए बड़े भाई साहब के गंभीर व्यक्तित्व और छोटे भाई के खेल-प्रेम का द्वंद्व दिखाता है।
कहानी सिद्ध करती है कि केवल किताबी ज्ञान की तुलना में जीवन का व्यावहारिक अनुभव और बड़ों का मार्गदर्शन सदैव श्रेष्ठ होता है।
Chapter 28 15 min read

डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया)

सीताराम सेकसरिया की डायरी, 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में मनाया गया पहला स्वतंत्रता दिवस, पुलिस दमन, और महिलाओं का अभूतपूर्व योगदान।

26 जनवरी 1931 को कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस मनाने के ऐतिहासिक जन-आंदोलन, पुलिस के लाठीचार्ज और जन-उत्साह का आंखों देखा वर्णन है।
आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व और जानकी देवी व मदालसा जैसी वीरांगनाओं के अदम्य साहस को रेखांकित करता है।
Chapter 29 15 min read

तँतारा-वामीरो कथा (लीलाधर मंडलोई)

लीलाधर मंडलोई द्वारा अंडमान-निकोबार की लोककथा, तंतारा-वामीरो का निश्छल प्रेम, रूढ़ियों का विरोध, और निकोबार द्वीपों का विभाजन।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के तंतारा और वामीरो के पवित्र प्रेम और समाज की अंधी, संकीर्ण रूढ़ियों के विरुद्ध उनके बलिदान की लोककथा है।
तंतारा के आत्मबलिदान से सदियों पुरानी विवाह संबंधी कुरीति का अंत हुआ और कार-निकोबार व लिटिल-अंडमान का भूगोल परिवर्तित हुआ।
Chapter 30 15 min read

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

प्रहलाद अग्रवाल का लेख, फणीश्वरनाथ रेणु की अमर कृति 'तीसरी कसम' पर गीतकार शैलेंद्र द्वारा निर्मित कलात्मक सिनेमा।

महान गीतकार शैलेंद्र द्वारा व्यावसायिक लालच से दूर रहकर साहित्यिक निष्ठा के साथ फिल्म 'तीसरी कसम' के संवेदनशील निर्माण की कथा है।
फिल्म में हीरामन और हीराबाई के मूक प्रेम, ग्रामीण यथार्थ और लोक-संस्कृति की भावुक अभिव्यक्ति का मूल्यांकन करता है।
Chapter 31 15 min read

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

निदा फ़ाज़ली का संस्मरण, सुलेमान, शेख अयाज़ और नूह का जीवों के प्रति अपनत्व, प्रकृति का असंतुलन, और संवेदनशीलता।

सम्राट सुलेमान, संत नूह और लेखक की मां के प्रसंगों द्वारा समस्त जीवधारियों और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दयाभाव को उजागर करता है।
बढ़ते शहरीकरण, पेड़ों के कटने और समुद्र के अतिक्रमण से उत्पन्न प्राकृतिक असंतुलन व मनुष्य की संवेदनहीनता पर गहरी चिंता व्यक्त करता है।
Chapter 32 15 min read

पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)

रवींद्र केलेकर के प्रसंग: 'गिन्नी का सोना' (आदर्शवादी शुद्धता vs व्यावहारिक लाभ) और 'झेन की देन' (जापानी टी-सेरेमनी)।

'गिन्नी का सोना' में शुद्ध आदर्शों को तांबे की मिलावट वाले व्यावहारिक समझौते से कहीं अधिक मूल्यवान सिद्ध किया गया है।
'झेन की देन' जापानी टी-सेरेमनी (चा-नो-यू) के माध्यम से मन के तनाव को दूर कर वर्तमान में जीने का संदेश देती है।
Chapter 33 15 min read

कारतूस (हबीब तनवीर)

हबीब तनवीर का एकांकी नाटक, 1799 में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले जांबाज वजीर अली का अदम्य साहस और कर्नल के खेमे से कारतूस लूटने की दास्तान।

अवध के अपदस्थ नवाब वजीर अली की अदम्य वीरता, स्वाभिमान और भारत से अंग्रेजों को खदेड़ने के उसके साहसी संकल्प का नाट्य रूपांतरण है।
वजीर अली द्वारा अकेले अंग्रेज कर्नल के खेमे में घुसकर जान हथेली पर रख कारतूस हासिल करने की घटना उसके निर्भीक पराक्रम को दर्शाती है।
Chapter 34 15 min read

साखी (कबीरदास)

कबीरदास की साखियां, मीठी वाणी, कस्तूरी मृग अज्ञान, अहंकार शमन, निंदक का महत्व, और प्रेम का मर्म।

कबीरदास की साखियां अहंकार का त्याग कर मधुर वाणी बोलने, अंतःकरण में ईश्वर को खोजने और ज्ञान के महत्व को प्रतिपादित करती हैं।
निंदक को निकट रखकर स्वभाव को निर्मल बनाने और पोथियों के स्थान पर प्रेम के ढाई आखर को सच्चा ज्ञान मानती हैं।
Chapter 35 15 min read

पद (मीराबाई)

मीराबाई के पद, गिरधर गोपाल के प्रति अनन्य दांपत्य भाव, द्रोपदी व प्रहलाद के दृष्टांत, और सांसारिक मुक्ति।

मीराबाई द्वारा अपने आराध्य श्रीकृष्ण को उनके रक्षक रूप का स्मरण कराते हुए अपनी पीड़ा हरने की भावपूर्ण प्रार्थना का वर्णन है।
श्रीकृष्ण की दासी बनकर चाकरी करने, रूप-सौंदर्य का गुणगान करने और अनन्य भक्ति में लीन रहने के समर्पण को दर्शाता है।
Chapter 36 15 min read

मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)

मैथिलीशरण गुप्त की राष्ट्रकवि कविता, दधीचि, कर्ण, रंतिदेव व उशीनर के त्याग, परोपकार, विश्वबंधुत्व, और 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे'।

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त मानव जीवन की सार्थकता परोपकार, उदारता, त्याग और विश्वबंधुत्व की भावना में निहित मानते हैं।
दधीचि, कर्ण और रंतिदेव के अमर त्याग का उदाहरण देकर सिद्ध करते हैं कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करे।
Chapter 37 15 min read

पर्वत प्रदेश में पावस

सुमित्रानंदन पंत की छायावादी कविता, वर्षा ऋतु में पर्वतों का पल-पल बदलता जादुई रूप, झरनों का गान, और शाल के वृक्षों का कौतूहल।

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा वर्षा ऋतु में पर्वतीय अंचल के पल-पल बदलते सम्मोहक प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव चित्रण है।
सहस्र सुमन रूपी आंखों से दर्पण रूपी ताल में निहारते पहाड़, श्वेत मोतियों जैसे झरने और बादलों के जाल में समाते शाल के वृक्षों का बिंब प्रस्तुत है।
Chapter 38 15 min read

तोप (वीरेन डंगवाल)

वीरेन डंगवाल की कविता, 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की तोप, कंपनी बाग का इतिहास, और चिड़ियों का निर्भीक बैठना।

कंपनी बाग में रखी 1857 के संग्राम की ऐतिहासिक तोप के माध्यम से सत्ता और क्रूरता के नश्वर होने का ऐतिहासिक सबक सिखाता है।
कविता संदेश देती है कि तोप चाहे कितनी भी विनाशकारी रही हो, अंततः उस पर चिड़ियों का चहचहाना साबित करता है कि क्रूर शक्ति पर जीवन की विजय होती है।
Chapter 39 15 min read

कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी)

कैफ़ी आज़मी का अमर देशभक्ति गीत (हकीकत फिल्म), देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों की अंतिम पुकार और देशवासियों को देश सौंपना।

मातृभूमि की रक्षा के लिए हिमालय की सीमाओं पर हंसते-हंसते प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की मार्मिक और ओजस्वी पुकार है।
सैनिक अपने अंतिम क्षणों में देश की रक्षा और स्वतंत्रता के काफिलों को कभी न रुकने देने की पावन जिम्मेदारी देशवासियों को सौंपते हैं।
Chapter 40 15 min read

आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर)

रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना (अनुवाद: हजारीप्रसाद द्विवेदी), दुखों से मुक्ति नहीं बल्कि दुखों से लड़ने के लिए अदम्य शक्ति और आत्मबल की याचना।

कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर ईश्वर से विपत्तियों को दूर करने की प्रार्थना नहीं करते, बल्कि उन पर विजय पाने के लिए अदम्य आत्मबल और साहस मांगते हैं।
दुख और पराजय के समय भी ईश्वर के प्रति निष्ठा और संशयहीन विश्वास बनाए रखने की उच्च आध्यात्मिक प्रार्थना प्रस्तुत है।
Chapter 41 15 min read

हरिहर काका (मिथिलेश्वर)

मिथिलेश्वर की ग्रामीण यथार्थवादी कहानी, हरिहर काका की पैतृक जमीन के लिए भाइयों और महंत का स्वार्थ, लालच, और बुजुर्गों की विवशता।

ग्रामीण समाज में वृद्ध हरिहर काका की पंद्रह बीघे जमीन को हथियाने के लिए सगे भाइयों और मठाधीश महंत के अमानवीय षड्यंत्रों को उजागर करता है।
पारिवारिक रिश्तों में स्वार्थ, धार्मिक संस्थानों के पाखंड और आधुनिक समाज में बेसहारा बुजुर्गों की असहाय स्थिति पर गहरा प्रहार करता है।
Chapter 42 15 min read

टोपी शुक्ला (राही मासूम रज़ा)

राही मासूम रज़ा का उपन्यास अंश, टोपी शुक्ला और इफ़्फ़न की पवित्र बाल-मित्रता, दादी का वात्सल्य, और भाषा व धर्म से परे मानवीय संबंध।

हिंदू बालक टोपी शुक्ला और मुस्लिम बालक इफ़्फ़न की निश्छल बाल-मित्रता के माध्यम से धर्म और जाति की सीमाओं से परे मानवीय रिश्तों की गहराई दिखाता है।
इफ़्फ़न की दादी के प्रति टोपी के वात्सल्य भाव द्वारा सिद्ध करता है कि प्रेम और अपनत्व की कोई मजहबी भाषा नहीं होती।
Chapter 43 15 min read

सपनों के-से दिन (गुरदयाल सिंह)

गुरदयाल सिंह का संस्मरण, बचपन के स्कूल के दिन, हेडमास्टर मदन मोहन शर्मा की दयालुता, पीटी मास्टर प्रीतम चंद की क्रूरता, और बाल-मनोविज्ञान।

लेखक के बचपन के खेल-कूद, स्कूल के प्रति भय और आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाई के संघर्ष का मार्मिक संस्मरण प्रस्तुत करता है।
हेडमास्टर साहब के स्नेहपूर्ण व्यवहार और पीटी मास्टर प्रीतम चंद की कठोर अनुशासन-प्रियता के माध्यम से बाल-मनोविज्ञान का विश्लेषण करता है।
Chapter 23 15 min read
Enrichment

गिरगिट

एंटोन चेखव की विश्वप्रसिद्ध व्यंग्य कहानी, पुलिस इंस्पेक्टर ओचुमेलाव का कुत्ते के मालिक की पहचान के आधार पर रंग बदलना और चाटुकारिता।

रूसी कथाकार एंटोन चेखव द्वारा इंस्पेक्टर ओचुमेलाव के चरित्र से सत्ता और रसूखदारों के आगे गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली अवसरवादिता पर व्यंग्य है।
कुत्ते के काटने की घटना पर जनरल के कुत्ते की बात सामने आते ही तुरंत न्याय का पैमाना बदलने वाली व्यवस्था की चाटुकारिता को बेनकाब करता है।

Frequently Asked Questions — CBSE Class 10 Hindi Course A & Course B

Does Master10 support both Hindi Course A (002) and Course B (085)?

Yes! Master10 provides full curriculum coverage for both Hindi Course A (Kshitij-2, Kritika-2) and Hindi Course B (Sparsh-2, Sanchayan-2), totaling 43 comprehensive modules and 6,880+ questions.

What grammar topics are included for Class 10 Hindi?

Course A grammar includes Vaky Bhed, Vachya, Pad Parichay, and Alankar. Course B grammar includes Padbandh, Vaky Rupantaran, Samas, and Muhavare.