Curriculum 2026–27
Practice
All Revision Notes
हिंदी (Course A & Course B)Ch-40 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 40

आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर)

नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित अमर प्रार्थना गीत (आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा अनुवादित): पारंपरिक याचना-प्रार्थनाओं से भिन्न, ईश्वर से दुखों से मुक्ति नहीं बल्कि दुखों से लड़ने का अदम्य साहस, विपदाओं में निर्भयता, पराजय में आत्मबल न खोना, और सुख-दुख में ईश्वर पर अडिग विश्वास की याचना।

Quick Key Takeaways:
शीर्षक का अर्थ: 'आत्मत्राण' = 'आत्म' (स्वयं) + 'त्राण' (रक्षा/निवारण) अर्थात 'अपनी रक्षा स्वयं करने की आत्म-शक्ति'
पारंपरिक प्रार्थना से सर्वथा भिन्न दृष्टिकोण: सामान्य प्रार्थनाओं में मनुष्य ईश्वर से दुख दूर करने, संकट हरने, सुख-समृद्धि देने या सहायता करने की भीख मांगता है। परंतु 'आत्मत्राण' में कवि ईश्वर से कोई सांसारिक सहायता या चमत्कार नहीं मांगता; वह केवल अपने भीतर कष्टों को सहने और उनसे जूझने की 'आत्मिक शक्ति और निर्भयता' मांगता है।
कवि की ईश्वर से 4 प्रमुख याचनाएं:
1. विपदाओं से भय न होना: 'विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं — केवल इतना हो प्रभो! न विपदा में पाऊं भय।' \rightarrow विपत्तियां आएं, किंतु मन में कोई डर न हो।
2. दुखों पर विजय पाने का आत्मबल: 'दुख-ताप से व्यथित चित्त को न दो सांत्वना नहीं सही, पर इतना होवे करुणाकर! दुख को मैं कर सकूं जय।' \rightarrow दुखों में कोई सांत्वना न मिले तो भी दुख को पराजित करने का सामर्थ्य मिले।
3. सहायक न मिलने पर अडिग रहना: यदि कोई साथी या सहायक न मिले, तो भी मेरा आत्मबल और पुरुषार्थ न डगमगाए।
4. ईश्वर पर अटूट विश्वास: 'सुख के दिन में शीश नवाकर तेरे मुख को पहचानूं, किंतु दुख-रात्रि में जब सारा संसार मुझे धोखा दे, तब भी मेरे मन में तुम्हारे प्रति कोई संशय (संदेह) न उपजे।'
काव्य-शिल्प: गुरुदेव के मूल बांग्ला गीत का आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा अत्यंत प्रांजल, तत्समनिष्ठ एवं उदात्त हिंदी में अनुवाद, शांत रस, और अदम्य मानवीय गरिमा।
1

1. आत्मत्राण का दार्शनिक मर्म, पारंपरिक प्रार्थना से भिन्नता व आत्मबल

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर) की रूपरेखा।

याचना-मुक्त प्रार्थना व मनुष्य की गरिमा
कर्मठता की प्रार्थना: कवि ईश्वर को संकट हरने वाला जादुई सहारा नहीं बनाता, बल्कि मनुष्य के भीतर सोई हुई ईश्वर-प्रदत्त अदम्य शक्ति को जगाने का संकल्प लेता है।
भार वहन की क्षमता: 'मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही, केवल इतना रखना अनुनय — वहन कर सकूं इसको निर्भय।' \rightarrow जीवन के बोझ को कम करने की भीख नहीं, बल्कि उस बोझ को निडर होकर ढोने का सामर्थ्य मांगना।
📊 आत्मत्राण: स्वावलंबन, निर्भयता व आत्मबल की प्रार्थनाVisual Model
आत्मत्राण: भय-मुक्ति व आत्म-बल की अमर प्रार्थना
पारंपरिक प्रार्थना से भिन्नता
विपत्तियों और दुखों से बचाने की याचना नहीं करना
दुखों से कभी न डरने और उन पर विजय पाने का आत्म-बल मांगना
नुकसान होने पर भी मन में कभी संशय या निराशा न आने देना
परमात्मा पर अडिग विश्वास
यदि कोई सहायक न मिले, तो भी अपना बल और पौरुष न डगमगाए
सुख के दिनों में भी सिर झुकाकर ईश्वर की छवि को पहचानना
दुख भरी रातों में यदि सारी दुनिया धोखा दे, तब भी ईश्वर पर अटल विश्वास रखना
रवींद्रनाथ ठाकुर का संदेश: ईश्वर से दुखों का निवारण नहीं, बल्कि दुखों से जूझने और संघर्ष करने की अदम्य आत्मशक्ति की प्रार्थना

याचना-मुक्त प्रार्थना, विपदाओं में निर्भयता, दुख पर विजय, भार वहन की आत्म-शक्ति, और सुख-दुख में संशय-शून्यता का वैचारिक मानचित्र।

2

2. सप्रसंग भावार्थ, हजारी प्रसाद द्विवेदी का अनुवाद व शिल्प

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

दुख में संशय-मुक्ति व आस्था की पराकाष्ठा
संशय-शून्यता का शिखर: जब पूरी दुनिया धोखा दे दे और चारों ओर घोर निराशा हो, तब भी ईश्वर के अस्तित्व और न्याय पर तनिक भी संदेह न हो — यही सच्ची आध्यात्मिक आस्था है।
3

3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: 'आत्मत्राण' कविता सामान्य प्रार्थना गीतों से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।
1. सामान्य प्रार्थनाओं का स्वरूप: सामान्य प्रार्थनाओं में भक्त ईश्वर के आगे दीन-हीन बनकर रोता है, अपने कष्टों, रोगों, दरिद्रता और दुखों को दूर करने की भीख मांगता है और सांसारिक सुख-साधनों की याचना करता है।
2. 'आत्मत्राण' की उदात्त भिन्नता: 'आत्मत्राण' में कवि ईश्वर से कष्टों को दूर करने या जीवन का भार हल्का करने की कोई याचना नहीं करता। वह ईश्वर से कोई चमत्कारिक सहायता नहीं मांगता।
3. स्वावलंबन और आत्मबल का संदेश: कवि केवल यह मांगता है कि विपत्ति के समय उसका साहस न टूटे, वह भयभीत न हो, और वह अपने आत्मबल के सहारे दुखों पर विजय प्राप्त करे। यह प्रार्थना मनुष्य को पराधीन या याचक बनाने के बजाय स्वावलंबी, साहसी और कर्मठ बनाती है।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'आत्मत्राण' कविता के आधार पर बताइए कि कवि दुख और सुख के दिनों में ईश्वर के प्रति कैसा दृष्टिकोण रखना चाहता है?
(b) 'मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही / केवल इतना रखना अनुनय, वहन कर सकूँ इसको निर्भय' — इन पंक्तियों का दार्शनिक भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Part (a) सुख और दुख में ईश्वर के प्रति दृष्टिकोण:
1. सुख के दिनों में: कवि चाहता है कि जब जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद के दिन हों, तब भी वह ईश्वर को न भूले; बल्कि हर क्षण सिर झुकाकर ईश्वर के करुणामय स्वरूप को पहचाने और उनके प्रति कृतज्ञ रहे।
2. दुख के दिनों में: जब घोर संकट की काली रात में सारा संसार उसके साथ विश्वासघात करे और कोई सहायता न मिले, तब भी उसके मन में ईश्वर की सत्ता, करुणा और न्याय के प्रति तनिक भी संदेह (संशय) उत्पन्न न हो।
Part (b) पंक्तियों का दार्शनिक भावार्थ:
- कवि ईश्वर से यह नहीं कहता कि वह उसके जीवन के संघर्षों, जिम्मेदारियों या दुखों के भारी बोझ को हल्का (लघु) कर दे।
- न ही वह ईश्वर से किसी झूठी सांत्वना की भीख मांगता है।
- वह केवल यह विनम्र प्रार्थना करता है कि ईश्वर उसके भीतर इतना आत्मिक बल और निर्भयता भर दे कि वह जीवन के सबसे कठिन और भारी बोझ को भी बिना डरे, बिना झुके और बिना किसी पर निर्भर हुए स्वयं अपने कंधों पर वहन कर सके
4

4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): निर्भयता की याचना: 'न विपदा में पाऊं भय' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: निर्भयता की याचना: 'न विपदा में पाऊं भय' (RTC Drill)
विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं— / केवल इतना हो प्रभो! / न विपदा में पाऊँ भय। / दुख-ताप से व्यथित चित्त को न दो सांत्वना नहीं सही, / पर इतना होवे करुणाकर! / दुख को मैं कर सकूँ जय। / कोई कहीं सहायक न मिले / तो अपना बल-पौरुष न हिले; / हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही / तो भी मन में ना मानूँ क्षय।
प्रश्न 1: कवि ईश्वर से विपदाओं के समय क्या चाहता है? \rightarrow कवि चाहता है कि विपत्तियां आने पर वह तनिक भी भयभीत न हो और निर्डर रहकर संकटों का सामना करे
प्रश्न 2: 'दुख को मैं कर सकूँ जय' का क्या अर्थ है? \rightarrow इसका अर्थ है — 'अपने अदम्य आत्मबल और साहस से समस्त दुखों और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करना'
प्रश्न 3: इस मूल कविता के रचयिता और इसके हिंदी अनुवादक कौन हैं? \rightarrow मूल रचयिता: गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर; हिंदी अनुवादक: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
5

5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: शीर्षक 'आत्मत्राण' के अर्थ और पारंपरिक प्रार्थना से भिन्नता का उल्लेख।
2 Marks: विपदाओं में निर्भयता, दुख पर विजय और भार वहन करने के दार्शनिक मर्म का विश्लेषण।
1 अंक: सुख-दुख में ईश्वर के प्रति संशय-मुक्त आस्था की व्याख्या।
1 अंक: रवींद्रनाथ ठाकुर के मूल चिंतन और हजारी प्रसाद द्विवेदी के तत्सम अनुवाद का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: कवि को ईश्वर से दुख दूर करने की प्रार्थना करते बताना (कवि दुख से लड़ने की शक्ति मांगता है)।
Trap 2: 'लघु' और 'वंचना' जैसे शब्दों के अर्थ में अशुद्धि करना (वंचना = छल/धोखा)।
Trap 3: अनुवादक का नाम भूलना (अनुवादक: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर) चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर)' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर)' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
पारंपरिक प्रार्थनाओं में भक्त ईश्वर से दुखों को दूर करने, विपत्तियों से बचाने और सुख-शांति की भीख मांगता है। किंतु 'आत्मत्राण' में कवि ईश्वर से कोई सांसारिक सहायता या चमत्कार नहीं मांगते; वे केवल विपत्तियों का सामना करने का अदम्य आत्मबल और निर्भयता मांगते हैं।

Related YouTube Videos & Masterclasses

1 Verified Class 10 Videos

Curated top-tier CBSE Class 10 video lessons, one-shots, and problem-solving sessions for आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर). Click any video below to watch instantly inside Master10.

One-Shot Revision35m

Atmatraan Class 10 Hindi Sparsh Poetry Chapter 7 | Rabindranath Tagore

Magnet BrainsClick to play on Master10
Magnet Brains|One-Shot Revision

Best for: Spiritual strength, facing obstacles without fear

YouTube Link

Select Video Lesson to Play:

Playing 1 of 1