Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-39 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 39

कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी)

उर्दू के महान शायर कैफ़ी आज़मी का अमर देशभक्ति गीत: 1962 के भारत-चीन युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चेतन आनंद की फिल्म 'हकीकत' के लिए रचित — 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों / अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'; सर पर कफ़न बांधना, जान देने की रुत, धरती को दुल्हन मानना, खून से लक्ष्मण-रेखा खींचना, और देशवासियों को वतन की रक्षा का दायित्व सौंपना।

Quick Key Takeaways:
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सन् 1962 का भारत-चीन सीमा युद्ध (लद्दाख और नेफ़ा की बर्फीली चोटियां)। -30 डिग्री की हाड़ कंपाने वाली ठंड में गोला-बारूद की कमी के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य वीरता से मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
गीत का अमर टेक व संदेश: 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों / अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' — शहीद होते हुए सैनिक देशवासियों से कहते हैं कि हमने अपने शरीर और प्राण देश पर न्योछावर कर दिए हैं, अब इस देश की आन-बान-शान तुम्हारे हाथों में है।
सैनिकों का त्याग व जज्बा:
1. सांस थमती गई, नब्ज जमती गई: बर्फीली चोटियों पर सांस फूल रही थी, नसों में खून जम रहा था, फिर भी सैनिकों ने आगे बढ़ते हुए कदमों को एक इंच भी पीछे नहीं हटने दिया।
2. धरती बनी दुल्हन: जिस प्रकार दूल्हा अपनी दुल्हन को आंचल पर आंच नहीं आने देता, उसी प्रकार सैनिकों ने अपने लाल खून से इस भारत-भूमि रूपी दुल्हन का शृंगार किया।
3. सर पर कफ़न बांधना: 'जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर / जान देने की रुत रोज आती नहीं' — देश के लिए प्राण न्योछावर करने का यह पावन अवसर जीवन में बार-बार नहीं आता।
4. लक्ष्मण-रेखा खींचना: 'खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर / इस तरफ़ आने पाए न रावण कोई' — सैनिकों ने देशवासियों का आह्वान किया कि अपने खून से ऐसी लक्ष्मण-रेखा खींच दो कि कोई विदेशी शत्रु (रावण) भारत माता (सीता) के दामन को छू भी न सके।
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1. 1962 का युद्ध, सैनिकों का बलिदान व 'अब तुम्हारे हवाले वतन' का दायित्व

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी) की रूपरेखा।

शहीदों का अंतिम संदेश व राष्ट्र-रक्षा का संकल्प
कुर्बानियों का काफिला: 'राह कुर्बानियों की न वीरान हो' — शहीदों का काफिला कभी रुकना नहीं चाहिए; एक टोली शहीद हो तो दूसरी टोली तुरंत देश-रक्षा के लिए तैयार रहनी चाहिए।
शहादत का जश्न: देश के लिए बलिदान होना किसी मातम का विषय नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने प्रेम का सर्वोच्च जश्न है।
📊 कर चले हम फ़िदा: अमर देशभक्ति व सर्वोच्च बलिदानVisual Model
कर चले हम फ़िदा: अमर शहीदों का अंतिम राष्ट्र-संदेश
सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान
'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'
सांस थमती गई, नब्ज जमती गई, फिर भी उठते कदम को न रुकने दिया
हिमालय का सिर न झुकने देना; मौत को दुल्हन बनाकर गले लगाना
देशवासियों से पुकार
कुर्बानियों का यह काफिला कभी वीरान न होने पाए
धरती को दुल्हन मानकर अपने खून से सरहद पर लाल रेखा खींचना
राघव और लक्ष्मण बनकर मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करना
कैफ़ी आज़मी का संदेश: देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों का देशवासियों के नाम भावुक आह्वान

1962 का युद्ध संदर्भ, धरती दुल्हन का शृंगार, खून की लक्ष्मण-रेखा, कुर्बानियों का काफिला, और 'अब तुम्हारे हवाले वतन' का वैचारिक मानचित्र।

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2. सप्रसंग भावार्थ, उर्दू-हिंदी शब्दावली व वीर रस का प्रवाह

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

गीत की ओजस्वी भाषा व काव्यात्मक सौंदर्य
सीता और रावण का रूपक: भारत भूमि सीता माता हैं और विदेशी आक्रांता रावण है; देशवासियों को लक्ष्मण बनकर अपने बाणों और पराक्रम से शत्रु के हाथ काट देने चाहिए।
उर्दू शब्दावली: फ़िदा, जान-ओ-तन, रुत, काफिला, बांकपन, दामन, लकीर का अत्यंत ओजस्वी और मर्मस्पर्शी प्रयोग।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: सैनिक देशवासियों को देश सौंपते हुए उनसे क्या अपेक्षाएं रखते हैं? 'कर चले हम फ़िदा' के आधार पर लिखिए।
1. कुर्बानियों के सिलसिले को जारी रखना: सैनिक अपेक्षा करते हैं कि उनके शहीद हो जाने के बाद भी देश पर आने वाले संकटों से रक्षा के लिए युवाओं के बलिदान का काफिला कभी वीरान (खाली) नहीं होना चाहिए।
2. भारत माता के सम्मान की रक्षा: जिस प्रकार लक्ष्मण ने सीता के सम्मान की रक्षा की थी, उसी प्रकार देशवासी अपने खून से सीमा पर ऐसी लक्ष्मण-रेखा खींचें कि कोई भी शत्रु रूपी रावण भारत माता के पवित्र आंचल पर हाथ न लगा सके।
3. सर पर कफन बांधकर तैयार रहना: देशवासियों को राष्ट्र-रक्षा के लिए सदैव अपने व्यक्तिगत सुखों और स्वार्थों का त्याग करके बलिदान के लिए तत्पर रहना चाहिए।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर / इस तरफ़ आने पाए न रावण कोई' — इन पंक्तियों में 'लक्ष्मण', 'सीता' और 'रावण' किसके प्रतीक हैं? स्पष्ट कीजिए।
(b) 'कर चले हम फ़िदा' गीत में धरती की तुलना दुल्हन से क्यों की गई है?
Part (a) प्रतीकों का उद्घाटन:
1. 'सीता': हमारी पावन, ममतामयी और संप्रभु मातृभूमि (भारत माता) की प्रतीक हैं।
2. 'रावण': भारत माता पर बुरी नजर डालने वाले विदेशी आक्रमणकारी और आततायी शत्रु देश का प्रतीक है।
3. 'लक्ष्मण': सीमा पर देश की रक्षा करने वाले वीर भारतीय सैनिकों और देशभक्त नागरिकों के प्रतीक हैं जो अपने खून से रक्षा की अभेद्य दीवार (लक्ष्मण-रेखा) खींचते हैं।
Part (b) धरती की तुलना दुल्हन से:
- भारतीय परंपरा में दुल्हन को लाल जोड़े में सजाया जाता है और उसका पति अपने प्राण देकर भी उसके सम्मान की रक्षा करता है।
- सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा में अपना गर्म लाल खून बहाकर इस धरती को लाल रंग से सराबोर कर दिया, जिससे वह दुल्हन के समान सुशोभित हो उठी।
- जिस प्रकार कोई स्वाभिमानी पुरुष अपनी दुल्हन का अपमान सहन नहीं कर सकता, उसी प्रकार सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत-भूमि रूपी दुल्हन के सम्मान की रक्षा की।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): कुर्बानियों का काफिला और शहादत का पर्व (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: कुर्बानियों का काफिला और शहादत का पर्व (RTC Drill)
राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो, / तुम सजाते ही रहना नए क़ाफ़िले। / फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है, / ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले। / बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो, / अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो!
प्रश्न 1: 'राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो' का क्या आशय है? \rightarrow इसका आशय है कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों का सिलसिला (काफिला) कभी रुकना या समाप्त नहीं होना चाहिए।
प्रश्न 2: 'बाँध लो अपने सर से कफ़न' मुहावरे का क्या अर्थ है? \rightarrow इसका अर्थ है — 'देश की रक्षा के लिए सहर्ष बलिदान होने को तत्पर रहना'
प्रश्न 3: इस प्रसिद्ध गीत के रचयिता कौन हैं और यह किस पृष्ठभूमि पर लिखा गया था? \rightarrow रचयिता: कैफ़ी आज़मी; पृष्ठभूमि: 1962 का भारत-चीन युद्ध (फिल्म 'हकीकत')
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: 1962 के युद्ध संदर्भ और कैफ़ी आज़मी के गीत का उल्लेख।
2 Marks: सीता, रावण और लक्ष्मण के रूपकों तथा धरती को दुल्हन मानने का विश्लेषण।
1 अंक: कुर्बानियों के काफिले और 'सर पर कफन बांधने' के मर्म की व्याख्या।
1 अंक: ओज गुण, वीर रस और उर्दू-हिंदी मिश्रित ओजस्वी भाषा का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: गीत को केवल सैनिकों के लिए समझना (यह समस्त देशवासियों के लिए आह्वान है)।
Trap 2: प्रतीकों (सीता, रावण, लक्ष्मण रेखा) के अर्थ में अशुद्धि करना।
Trap 3: गीत के ओजस्वी वीर रस को शोकगीत समझ लेना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी) काव्य-सौंदर्य व केंद्रीय भाव
कक्षा 10 सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी)' का मूल भावार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं जीवन-संदेश स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: प्रसंग व केंद्रीय भाव (Context & Central Theme): काव्यांश का सटीक संदर्भ, कवि का उद्देश्य एवं अंतर्निहित मुख्य भावार्थ का स्पष्ट निरूपण।
1 अंक
चरण 2: काव्य-शिल्प व अलंकार (Poetic Craft & Figures of Speech): भाषा-शैली (ब्रज/अवधी/खड़ी बोली), प्रयुक्त प्रमुख अलंकार (अनुप्रास/रूपक/उपमा आदि) व बिंब-विधान का उल्लेख।
1 अंक
चरण 3: जीवन-मूल्य व संदेश (Life Values & Moral): कविता द्वारा संप्रेषित नैतिक मूल्य, मानवतावादी दृष्टि एवं समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी)' में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में पूरे 3 अंक प्राप्त करने का आदर्श प्रारूप:

1. प्रसंग व मूल भाव: काव्यांश के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए बताएं कि कवि किस मानसिक दशा, आध्यात्मिक सत्य अथवा सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
2. काव्य-शिल्प (कला पक्ष): कविता की भाषा-शैली (गेयता, तुकांत, रस) और प्रमुख अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण) का सटीक उल्लेख करें।
3. जीवन-संदेश (भाव पक्ष): कविता से मिलने वाली शाश्वत मानवीय सीख, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
भाव-पक्ष (अर्थ) और कला-पक्ष (अलंकार, भाषा) दोनों का उत्तर में संतुलन अनिवार्य है।
वर्तनी की शुद्धता और उपयुक्त साहित्यिक हिंदी शब्दावली का प्रयोग करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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यह अमर गीत कैफ़ी आज़मी ने 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी चेतन आनंद की ऐतिहासिक फिल्म 'हकीकत' के लिए लिखा था, जो देश पर बलिदान होने वाले वीर सैनिकों की अमर भावना को व्यक्त करता है।

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