Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-35 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 35

पद (मीराबाई)

भक्तिकाल की अनन्य कृष्ण-दीवानी मीराबाई के दो प्रसिद्ध पद: (1) 'हरि आप हरो जन री भीर' (द्रौपदी की लाज, प्रहलाद का उद्धार, ऐरावत हाथी की रक्षा का उदाहरण देकर अपनी पीड़ा हरने की गुहार); तथा (2) 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी' (कृष्ण की सेविका बनकर दर्शन, नाम-स्मरण की जागीर और भाव-भक्ति की संपत्ति पाना, मोर मुकुट पीतांबरधारी स्याम की छवि, आधी रात जमुना के तीरे दर्शन)।

Quick Key Takeaways:
मीराबाई का भक्ति-भाव: मीराबाई की भक्ति 'माधुर्य भाव' और 'दास्य भाव' की है। वे श्रीकृष्ण को अपना पति, स्वामी और सर्वस्व मानती हैं। उन्होंने राजमहल के वैभव, सास-ननद के तानों और राणा जी द्वारा भेजे गए विष के प्याले को हंसकर अमृत बना दिया।
पद 1 ('हरि आप हरो जन री भीर'): मीरा श्रीकृष्ण को उनके भक्त-वत्सल रूप की याद दिलाती हैं:
- द्रौपदी: भरी सभा में जब दुशासन चीरहरण कर रहा था, तब कृष्ण ने वस्त्र बढ़ाकर उसकी लाज बचाई।
- प्रहलाद: भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान ने नृसिंह का भयानक रूप धारण किया।
- गजराज (ऐरावत): ग्राह (मगरमच्छ) द्वारा पकड़े जाने पर हाथी की पुकार सुनकर उसे बचाया।
- निष्कर्ष: मीरा कहती हैं कि 'दासी मीरा' भी आपकी शरण में है, मेरे भी सारे कष्ट और सांसारिक भव-बाधाएं दूर करो।
पद 2 ('स्याम म्हाने चाकर राखो जी'): मीरा कृष्ण की 'चाकर' (दासी/सेविका) बनना चाहती हैं। सेविका बनने से उन्हें 3 बड़े लाभ होंगे:
1. बाग लगाएंगी तो प्रतिदिन सुबह उठकर कृष्ण के साक्षात दर्शन प्राप्त होंगे।
2. वृंदावन की कुंज-गलियों में कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करेंगी, जिससे उन्हें नाम-स्मरण का वेतन (खर्ची) मिलेगा।
3. भाव-भक्ति की जागीर (संपत्ति) प्राप्त होगी, जिससे उनके तीनों मनोरथ पूरे हो जाएंगे।
श्याम का मनमोहक रूप: सिर पर मोर-मुकुट, पीले रेशमी वस्त्र (पीतांबर), गले में वैजयंती माला, वृंदावन में गाय चराते हुए मुरली बजाने वाले मोहन का सजीव रूप।
काव्य-शिल्प: राजस्थानी मिश्रित साहित्यिक ब्रजभाषा, माधुर्य गुण, भक्ति एवं शृंगार रस, गेय पद शैली, और अनन्य समर्पण।
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1. भक्त-वत्सल कृष्ण का स्मरण, दास्य भाव व तीन जागीरें

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा पद (मीराबाई) की रूपरेखा।

मीरा की विरह-वेदना व अनन्य शरणागति
राजमहल का त्याग: लोक-लाज और कुल की मर्यादा छोड़कर साधु-संतों के बीच बैठकर पद गाना।
कृष्ण से अनन्य प्रार्थना: 'हिवड़ो घणो अधीरा' — मीरा का हृदय कृष्ण के दर्शन के लिए आधी रात को यमुना के तट पर अधीर और व्याकुल हो उठता है।
📊 मीरा के पद: अनन्य दास्य व माधुर्य भाव की साधनाVisual Model
मीरा के पद: अनन्य कृष्ण-भक्ति व समर्पण
भक्त-वत्सल भगवान की पुकार
द्रौपदी की लाज बचाना, प्रह्लाद के लिए नृसिंह रूप धारण करना
गजराज (ऐरावत) को मगरमच्छ के जबड़े से छुड़ाना
'म्हारी भीर हरो' -> मीरा की अपनी पीड़ा हरने की आर्त पुकार
चाकरी व विरह-समर्पण
'स्याम म्हाने चाकर राखो जी' -> कृष्ण के महल में दासी बनकर बाग लगाना
नित उठ दर्शन पाना, नाम-स्मरण की जागीरी और भाव-भक्ति की संपत्ति
पीतांबर, मुकुट, वैजयंती माला धारी मोहन के लिए आधी रात यमुना तट पर विरह
मीराबाई का संदेश: सांसारिक सुख-वैभव और लोक-लाज को त्यागकर केवल गिरधर गोपाल के चरणों में पूर्ण आत्म-समर्पण

भक्त-वत्सल कृष्ण का स्मरण (द्रौपदी, प्रहलाद, गजराज), चाकरी के 3 लाभ (दर्शन, स्मरण, जागीर), और श्याम की रूप-माधुरी का मानचित्र।

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2. पदों का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ व शिल्प-सौंदर्य

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

महत्वपूर्ण पदों की व्याख्या
पद 1 ('हरि आप हरो जन री भीर...'):
- शब्दार्थ: भीर = पीड़ा/दुख; चीर = वस्त्र/साड़ी; नरहरि = नृसिंह अवतार; कुंजर = हाथी; काटी कुंजर पीर = हाथी के दुख को काटा।
- भावार्थ: हे कृष्ण! आप अपने भक्तों के संकट दूर करने वाले हैं। द्रौपदी, प्रहलाद और गजराज की रक्षा करने वाले प्रभु, अपनी इस दासी मीरा की भी पीड़ा को हर लीजिए।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी (सेविका) क्यों करना चाहती हैं? चाकरी करने से उन्हें कौन-से तीन लाभ मिलेंगे?
1. चाकरी करने का मूल उद्देश्य: मीराबाई किसी सांसारिक सुख या धन की चाह में सेविका नहीं बनना चाहतीं; वे केवल इसलिए चाकर बनना चाहती हैं ताकि उन्हें हर क्षण अपने आराध्य श्रीकृष्ण के निकट रहने का सौभाग्य मिल सके।
2. तीन आध्यात्मिक लाभ:
- (क) साक्षात दर्शन का लाभ: वे बाग-बगीचे लगाएंगी ताकि सुबह उठते ही कृष्ण के रूप के दर्शन हो सकें।
- (ख) नाम-स्मरण रूपी वेतन: कृष्ण की लीलाओं का गान करते हुए उन्हें नाम-स्मरण रूपी दैनिक जेब-खर्च (खर्ची) मिलेगा।
- (ग) भाव-भक्ति की विशाल जागीर: उन्हें कृष्ण के प्रति अनन्य समर्पण और भाव-भक्ति की अमर संपत्ति (जागीर) मिलेगी, जिससे उनका जीवन धन्य हो जाएगा।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'हरि आप हरो जन री भीर' पद में मीराबाई ने श्रीकृष्ण के भक्त-वत्सल स्वरूप को किन तीन पौराणिक उदाहरणों से सिद्ध किया है?
(ख) मीराबाई के पदों की भाषा-शैली और भक्ति-स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
Part (a) तीन पौराणिक दृष्टांत:
1. द्रौपदी का चीरहरण: कौरवों की भरी सभा में जब द्रौपदी का अपमान हो रहा था, तब कृष्ण ने उसकी करुण पुकार सुनकर वस्त्र (साड़ी) को अनंत बढ़ाकर उसकी कुल-मर्यादा की रक्षा की।
2. भक्त प्रहलाद की रक्षा: हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से बालक प्रहलाद को बचाने के लिए भगवान ने खंभे को फाड़कर नृसिंह (नरहरि) का रूप धारण किया और राक्षस का संहार किया।
3. गजराज (हाथी) का उद्धार: जब मगरमच्छ ने हाथी का पैर पकड़कर उसे जल में खींच लिया था, तब भगवान ने गरुड़ पर सवार होकर तुरंत आकर मगरमच्छ को मारा और हाथी के प्राणों की रक्षा की।
Part (b) भाषा-शैली व भक्ति-स्वरूप:
1. भक्ति का स्वरूप: मीरा की भक्ति माधुर्य एवं दास्य भाव की अनन्य, एकनिष्ठ और सर्वस्व-समर्पण की भक्ति है।
2. भाषा: मीरा की भाषा राजस्थानी मिश्रित साहित्यिक ब्रजभाषा है जिसमें गुजराती और खड़ी बोली के शब्दों का भी सुंदर प्रभाव है।
3. रस व गुण: मुख्य रूप से भक्ति रस और माधुर्य गुण; पदों में अद्भुत संगीतात्मकता और गेयता (लयबद्धता) है।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): श्रीकृष्ण की रूप-माधुरी: 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: श्रीकृष्ण की रूप-माधुरी: 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी' (RTC Drill)
स्याम म्हाने चाकर राखो जी, / गिरधारी लाला म्हाने चाकर राखो जी। / चाकर रहसूँ बाग लगासूँ नित उठ दरसण पासूँ। / बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गासूँ। / चाकरी में दरसण पासूँ, सुमरण पासूँ खरची। / भाव भगती जागीरी पासूँ, तीनूं बाताँ सरसी। / मोर मुगट पीताम्बर सोहै, गल वैजन्ती माला। / बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
प्रश्न 1: मीराबाई श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही हैं? \rightarrow मीराबाई श्रीकृष्ण से प्रार्थना कर रही हैं कि वे उन्हें अपने महल में अपनी दासी (चाकर) बनाकर रख लें।
प्रश्न 2: श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कीजिए। \rightarrow श्रीकृष्ण के सिर पर मोरपंख का मुकुट, शरीर पर पीले रंग के रेशमी वस्त्र (पीतांबर) और गले में सुगंधित फूलों की वैजयंती माला सुशोभित है; वे वृंदावन में गाय चराते हुए मधुर मुरली बजाते हैं।
प्रश्न 3: इस काव्यांश की भाषा और रस बताइए। \rightarrow भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा; रस: भक्ति व शृंगार रस; शैली: गेय पद
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: मीरा की माधुर्य/दास्य भक्ति और कृष्ण को पति मानने का उल्लेख।
2 Marks: चाकरी करने के 3 आध्यात्मिक लाभों (दर्शन, स्मरण, जागीर) का सटीक विश्लेषण।
1 अंक: द्रौपदी, प्रहलाद और गजराज के पौराणिक उदाहरणों की व्याख्या।
1 अंक: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा, गेय पद और भक्ति रस का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: मीरा की चाकरी को सांसारिक नौकरी समझना (यह आध्यात्मिक दास्य-भक्ति है)।
Trap 2: गजराज के प्रसंग में ग्राह (मगरमच्छ) का उल्लेख न करना।
Trap 3: भाषा में केवल हिंदी लिखना (मीरा की भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: पद (मीराबाई) काव्य-सौंदर्य व केंद्रीय भाव
कक्षा 10 सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'पद (मीराबाई)' का मूल भावार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं जीवन-संदेश स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: प्रसंग व केंद्रीय भाव (Context & Central Theme): काव्यांश का सटीक संदर्भ, कवि का उद्देश्य एवं अंतर्निहित मुख्य भावार्थ का स्पष्ट निरूपण।
1 अंक
चरण 2: काव्य-शिल्प व अलंकार (Poetic Craft & Figures of Speech): भाषा-शैली (ब्रज/अवधी/खड़ी बोली), प्रयुक्त प्रमुख अलंकार (अनुप्रास/रूपक/उपमा आदि) व बिंब-विधान का उल्लेख।
1 अंक
चरण 3: जीवन-मूल्य व संदेश (Life Values & Moral): कविता द्वारा संप्रेषित नैतिक मूल्य, मानवतावादी दृष्टि एवं समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'पद (मीराबाई)' में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में पूरे 3 अंक प्राप्त करने का आदर्श प्रारूप:

1. प्रसंग व मूल भाव: काव्यांश के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए बताएं कि कवि किस मानसिक दशा, आध्यात्मिक सत्य अथवा सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
2. काव्य-शिल्प (कला पक्ष): कविता की भाषा-शैली (गेयता, तुकांत, रस) और प्रमुख अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण) का सटीक उल्लेख करें।
3. जीवन-संदेश (भाव पक्ष): कविता से मिलने वाली शाश्वत मानवीय सीख, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
भाव-पक्ष (अर्थ) और कला-पक्ष (अलंकार, भाषा) दोनों का उत्तर में संतुलन अनिवार्य है।
वर्तनी की शुद्धता और उपयुक्त साहित्यिक हिंदी शब्दावली का प्रयोग करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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मीराबाई ने तीन प्रमुख उदाहरण दिए हैं:
1. द्रौपदी: भरी सभा में वस्त्र बढ़ाकर उसकी लाज रखी।
2. प्रह्लाद: हिरण्यकश्यप से रक्षा करने के लिए नृसिंह का रूप धारण किया।
3. गजराज (ऐरावत हाथी): मगरमच्छ के जबड़े से छुड़ाकर उसके प्राणों की रक्षा की।

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