Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-36 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 36

मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की अमर प्रेरणादायी कविता: 'विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी / मरो परंतु यों मरो कि याद जो करे सभी; वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' — निस्वार्थ परोपकार, विश्व-बंधुत्व, दानवीर कर्ण, रंतिदेव, दधीचि और राजा उशीनर के अमर बलिदान, तथा स्वार्थ की पशु-प्रवृत्ति का त्याग।

Quick Key Takeaways:
कविता का मूल दर्शन: मनुष्य नश्वर (मर्त्य) है, उसकी मृत्यु निश्चित है। किंतु अमर मृत्यु (सुमृत्यु) वही है जिसके बाद संसार मनुष्य के परोपकार और त्याग को सदैव याद रखे।
पशु-प्रवृत्ति बनाम मनुष्यता:
- पशु-प्रवृत्ति: 'यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे' — केवल अपने लिए भोजन और सुख जुटाना पशुओं का स्वभाव है।
- सच्ची मनुष्यता: 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' — जो दूसरों के कल्याण, सुख और रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे, वही सच्चा मनुष्य है।
चार अमर पौराणिक-ऐतिहासिक त्यागी महापुरुष:
1. राजा रंतिदेव: भयंकर अकाल में स्वयं कई दिनों से भूखे होते हुए भी अपने सामने आया भोजन का अंतिम थाल एक भूखे अतिथि को सहर्ष सौंप दिया।
2. महर्षि दधीचि: देवताओं और मानवता की रक्षा के लिए वृत्रासुर के वध हेतु अपनी जीवित अस्थियां (हड्डियां) वज्र बनाने के लिए दान कर दीं।
3. राजा उशीनर (शिबि): अपनी शरण में आए कबूतर के प्राण बचाने के लिए बाज को अपने शरीर का मांस काटकर तौल दिया।
4. दानवीर कर्ण: ब्राह्मण वेशधारी इंद्र को अपनी रक्षा करने वाले जन्मजात 'कवच और कुंडल' सहर्ष दान कर दिए।
विश्व-बंधुत्व व सहानुभूति: संसार में सबसे बड़ा गुण 'सहानुभूति' है; बुद्ध ने करुणा के बल पर ही संसार की विरोधी परंपराओं को झुका दिया। संपूर्ण मानवता एक ही परमपिता परमात्मा की संतान है, अतः सभी मनुष्य परस्पर भाई-भाई हैं।
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1. मानवता का सर्वोच्च आदर्श, सुमृत्यु व 4 अमर त्यागी महापुरुष

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त) की रूपरेखा।

परोपकार व उदारता की महिमा
उदार व्यक्ति की अमरता: सरस्वती उसी उदार व्यक्ति का गुणगान करती है, धरती उसी का आभार मानती है, और अखंड विश्व में उसी का यश गूंजता है जो समस्त सृष्टि को अपना परिवार मानता है।
अनंत अंतरिक्ष में देवताओं का स्वागत: परोपकारी और दयालु मनुष्यों का स्वागत स्वयं देवता अपनी बाहें फैलाकर करते हैं।
📊 मनुष्यता: परोपकार, त्याग व विश्व-बंधुत्व का आदर्शVisual Model
मनुष्यता: परोपकार, विश्व-बंधुत्व व अमर बलिदान
चार महान त्यागी महापुरुष
रंतिदेव: भूख से व्याकुल होते हुए भी भूखे अतिथि को भोजन की थाली देना
दधीचि: देवताओं और मानवता की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों का दान करना
उशीनर (राजा शिबि): कबूतर के प्राण बचाने के लिए अपना मांस काट कर देना
कर्ण: कवच और कुंडल का सहर्ष दान कर अमर होना
सच्ची मनुष्यता का मर्म
'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' -> परोपकार ही जीवन का ध्येय
सहानुभूति, उदारता और अखंड आत्मभाव का संसार में विस्तार
मृत्यु से न डरना; 'सुमृत्यु' वही है जिसे संसार मृत्यु के बाद भी याद रखे
मैथिलीशरण गुप्त का संदेश: स्वार्थ-भावना से ऊपर उठकर परोपकार, त्याग और विश्व-कल्याण के लिए समर्पित जीवन ही सार्थक है

सुमृत्यु का संकल्प, पशु-प्रवृत्ति का त्याग, 4 महापुरुषों के अमर बलिदान (रंतिदेव, दधीचि, उशीनर, कर्ण), और विश्व-बंधुत्व का वैचारिक मानचित्र।

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2. सहानुभूति, विश्व-बंधुत्व व 'चलो अभीष्ट मार्ग पर' का उद्घोष

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

कर्मठता व परस्पर सहयोग का संदेश
'अमर्त्य अंक में अपंक हो चढ़ो सभी': निष्पाप और पवित्र होकर अमर परमात्मा की गोद में स्थान प्राप्त करो।
'परस्परावलंब से उठो': एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ो ताकि सभी एक साथ उन्नति के शिखर पर पहुंच सकें।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: कवि ने कैसी मृत्यु को 'सुमृत्यु' कहा है? 'मनुष्यता' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
1. नश्वरता का बोध: मनुष्य का शरीर मरणशील है; एक दिन सभी को मरना है। साधारण मृत्यु मर जाने पर व्यक्ति को कोई याद नहीं रखता।
2. परोपकार और त्याग के लिए प्राण देना: 'सुमृत्यु' (श्रेष्ठ व गौरवमयी मृत्यु) वह मृत्यु है जो दूसरों के कल्याण, देश-सेवा और मानवता की रक्षा करते हुए प्राप्त होती है।
3. मृत्यु के बाद भी अमर रहना: ऐसी मृत्यु पाने वाले व्यक्ति के जाने के बाद भी समाज उसके आदर्शों, त्याग और परोपकार को युगों-युगों तक श्रद्धा से याद रखता है। कवि कहता है — 'मरो परंतु यों मरो कि याद जो करे सभी!'
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'मनुष्यता' कविता में कवि ने किन पौराणिक महापुरुषों के उदाहरण देकर त्याग और परोपकार का संदेश दिया है? संक्षेप में लिखिए।
(ख) 'यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे' पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Part (a) चार अमर पौराणिक त्यागी:
1. राजा रंतिदेव: भूख से व्याकुल होते हुए भी अपने हाथ में आया अंतिम भोजन का थाल एक भूखे याचक को दे दिया।
2. महर्षि दधीचि: देवताओं की रक्षा हेतु अपनी हड्डियों का दान कर दिया जिससे देवराज इंद्र का अमोघ वज्र बना।
3. राजा उशीनर (शिबि): शरणागत कबूतर के जीवन की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस काटकर भूखे बाज को दे दिया।
4. दानवीर कर्ण: अपने प्राणों की रक्षा करने वाले जन्मजात कुंडल और कवच को ब्राह्मण को दान कर दिया।
Part (b) पशु-प्रवृत्ति बनाम मनुष्यता का भावार्थ:
- पशु जब चरागाह में चरने जाता है, तो वह केवल अपना पेट भरने की चिंता करता है; उसे दूसरे पशुओं की भूख या पीड़ा से कोई सरोकार नहीं होता।
- जो मनुष्य केवल अपने स्वार्थ, अपने परिवार और अपने धन-वैभव के लिए जीता है, वह मनुष्य के रूप में वास्तव में 'पशु के समान' आचरण कर रहा होता है।
- सच्चा मनुष्य वही है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के आंसुओं को पोंछे और दूसरों के जीवन को संवारने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): सच्चे मनुष्य की कसौटी: 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: सच्चे मनुष्य की कसौटी: 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे' (RTC Drill)
विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, / मरो परंतु यों मरो कि याद जो करे सभी। / हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, / मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। / यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे, / वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
प्रश्न 1: कवि के अनुसार किस व्यक्ति का जीना और मरना व्यर्थ है? \rightarrow उस व्यक्ति का जीना और मरना व्यर्थ है जो केवल अपने स्वार्थ के लिए जिया और जिसने कभी किसी दूसरे मनुष्य के आंसू पोंछने या भलाई के लिए कोई काम नहीं किया।
प्रश्न 2: कवि ने 'पशु-प्रवृत्ति' किसे कहा है? \rightarrow केवल अपने लिए जीना और केवल अपना पेट भरना कवि ने 'पशु-प्रवृत्ति' कहा है।
प्रश्न 3: इस कविता के रचयिता कौन हैं और इस कविता का मुख्य संदेश क्या है? \rightarrow रचयिता: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त; मुख्य संदेश: निस्वार्थ परोपकार, उदारता, त्याग और विश्व-बंधुत्व
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: सुमृत्यु की परिभाषा और नश्वर शरीर के सत्य का उल्लेख।
2 Marks: रंतिदेव, दधीचि, उशीनर और कर्ण के 4 पौराणिक त्यागों का सटीक विश्लेषण।
1 अंक: पशु-प्रवृत्ति बनाम सच्ची मनुष्यता के अंतर का उद्घाटन।
1 अंक: विश्व-बंधुत्व, सहानुभूति और मैथिलीशरण गुप्त की ओजस्वी भाषा का उल्लेख।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: रंतिदेव और उशीनर के उदाहरणों को मिला देना (रंतिदेव ने थाल दिया; उशीनर ने मांस दिया)।
Trap 2: दधीचि के अस्थि-दान के उद्देश्य को भूलना (वृत्रासुर वध हेतु वज्र निर्माण)।
Trap 3: कविता के छंद और खड़ी बोली के परिष्कृत रूप को अनदेखा करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त) काव्य-सौंदर्य व केंद्रीय भाव
कक्षा 10 सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)' का मूल भावार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं जीवन-संदेश स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: प्रसंग व केंद्रीय भाव (Context & Central Theme): काव्यांश का सटीक संदर्भ, कवि का उद्देश्य एवं अंतर्निहित मुख्य भावार्थ का स्पष्ट निरूपण।
1 अंक
चरण 2: काव्य-शिल्प व अलंकार (Poetic Craft & Figures of Speech): भाषा-शैली (ब्रज/अवधी/खड़ी बोली), प्रयुक्त प्रमुख अलंकार (अनुप्रास/रूपक/उपमा आदि) व बिंब-विधान का उल्लेख।
1 अंक
चरण 3: जीवन-मूल्य व संदेश (Life Values & Moral): कविता द्वारा संप्रेषित नैतिक मूल्य, मानवतावादी दृष्टि एवं समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)' में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में पूरे 3 अंक प्राप्त करने का आदर्श प्रारूप:

1. प्रसंग व मूल भाव: काव्यांश के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए बताएं कि कवि किस मानसिक दशा, आध्यात्मिक सत्य अथवा सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
2. काव्य-शिल्प (कला पक्ष): कविता की भाषा-शैली (गेयता, तुकांत, रस) और प्रमुख अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण) का सटीक उल्लेख करें।
3. जीवन-संदेश (भाव पक्ष): कविता से मिलने वाली शाश्वत मानवीय सीख, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
भाव-पक्ष (अर्थ) और कला-पक्ष (अलंकार, भाषा) दोनों का उत्तर में संतुलन अनिवार्य है।
वर्तनी की शुद्धता और उपयुक्त साहित्यिक हिंदी शब्दावली का प्रयोग करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
कवि के अनुसार सच्चा मनुष्य वही है जो केवल अपने स्वार्थ के लिए नहीं जीता, बल्कि 'जो मनुष्य के लिए मरे'—अर्थात संपूर्ण मानव जाति के कल्याण, सेवा और परोपकार के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दे।

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