Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-5 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 5

अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार)

अलंकार की परिभाषा (काव्य का सौंदर्य बढ़ाने वाले तत्व), कक्षा 10वीं पाठ्यक्रम के 4 प्रमुख अर्थालंकार: श्लेष, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, और मानवीकरण अलंकार के लक्षण, पहचान-चिह्न एवं काव्य-उदाहरण।

Quick Key Takeaways:
अलंकार की परिभाषा: 'अलंकरोति इति अलंकारः' — जो काव्य के सौंदर्य में वृद्धि करते हैं, वे चमत्कारपूर्ण साधन अलंकार कहलाते हैं।
कक्षा 10वीं के 4 निर्धारित अलंकार:
- 1. श्लेष अलंकार: जब वाक्य में एक ही शब्द एक बार प्रयुक्त हो, किंतु प्रसंग भेद से उसके अनेक अर्थ निकलते हों (उदा. 'रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।' - पानी के 3 अर्थ: चमक, प्रतिष्ठा, जल)।
- 2. उत्प्रेक्षा अलंकार: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना/कल्पना की जाए। वाचक शब्द: 'मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ, जनहुँ, ज्यों' (उदा. 'सोहत ओढ़े पीत पट स्याम सलोने गात। मनो नीलमनि सैल पर आतप पर्यो प्रभात।')।
- 3. अतिशयोक्ति अलंकार: जहाँ किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति का वर्णन लोक-मर्यादा से बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए (उदा. 'हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग।')।
- 4. मानवीकरण अलंकार: जहाँ जड़ प्रकृति, अचेतन वस्तुओं या प्राकृतिक उपादानों पर मानवीय चेष्टाओं, भावनाओं या क्रियाओं का आरोप किया जाए (उदा. 'मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के', 'फूल हँसे कलियां मुसकाईं')।
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1. 4 प्रमुख अलंकारों के लक्षण, वाचक शब्द व काव्य उदाहरण

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार) की रूपरेखा।

श्लेष, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति और मानवीकरण की सटीक पहचान
श्लेष (चिपका हुआ अर्थ): 'सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।' \rightarrow 'सुबरन' के 3 अर्थ: सुंदर अक्षर (कवि), सुंदर रूप (व्यभिचारी), स्वर्ण/सोना (चोर)।
उत्प्रेक्षा (संभावना सूचक शब्द): 'मनु, मानो, जनु, जानो' दिखे तो निसंकोच उत्प्रेक्षा अलंकार लिखें (उदा. 'सिर फट गया उसका वहीं, मानो अरुण रंग का घड़ा हो')।
अतिशयोक्ति (असंभव वर्णन): 'आगे नदियां पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।' \rightarrow सोचने से पहले ही नदी पार करना अतिशयोक्ति है।
मानवीकरण (प्रकृति का मानवीकरण): 'आए महंत वसंत।' \rightarrow वसंत ऋतु को महंत (साधु) के रूप में आते हुए चित्रित किया गया है।
📊 अलंकार: श्लेष, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति व मानवीकरण मैट्रिक्सVisual Model
अलंकार चक्र: शब्दालंकार व अर्थालंकार
शब्दालंकार (Word-play)
श्लेष: एक शब्द में अनेक अर्थ चिपके होना
अनुप्रास: वर्णों की सुंदर आवृत्ति
यमक: शब्द-आवृत्ति भिन्न-भिन्न अर्थों में
अर्थालंकार (Meaning-play)
उत्प्रेक्षा: संभावना (मानो, जनु, मनहुँ)
अतिशयोक्ति: लोक-सीमा का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन
मानवीकरण: प्रकृति पर मानवीय चेष्टाओं का आरोप
काव्य-आभूषण: भाव, लय और भाषा के सौंदर्य में चमत्कारिक वृद्धि करने वाले तत्व

श्लेष (श्लिष्ट अनेक अर्थ), उत्प्रेक्षा (संभावना 'मानो/जनु'), अतिशयोक्ति (लोकोत्तर वर्णन), तथा मानवीकरण (प्रकृति पर मानवीय आरोप) का तुलनात्मक चार्ट।

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2. 20+ बोर्ड परीक्षा काव्यांश उदाहरण व अलंकार पहचान अभ्यास

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

उच्च-स्तरीय काव्य-पंक्तियों में अलंकार पहचान
'मधुबन की छाती को देखो, सूखी कितनी इसकी कलियां।' \rightarrow श्लेष अलंकार ('कलियां' = खिलने से पूर्व फूल की दशा / यौवन पूर्व का बालपन)।
'ले चला साथ मैं तुझे कनक, ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण झनक।' \rightarrow उत्प्रेक्षा अलंकार ('ज्यों' वाचक शब्द)।
'देख लो साकेत नगरी है यही, स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।' \rightarrow अतिशयोक्ति अलंकार
'उषा सुनहले तीर बरसती, जयलक्ष्मी-सी उदित हुई।' \rightarrow मानवीकरण अलंकार
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचानकर उसका नाम लिखिए:
(क) 'चमक गई चपला चम-चम।'
(ख) 'सिर फट गया उसका वहीं, मानो अरुण रंग का घड़ा हो।'
(ग) 'मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।'
(घ) 'धनुष उठाया ज्यों ही उसने, और चढ़ाया उस पर बाण। धरा-सिंधु नभ कांपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।'
(क): अनुप्रास अलंकार ('च' वर्ण की सुंदर आवृत्ति)।
(ख): उत्प्रेक्षा अलंकार (उपमेय सिर में अरुण घड़े की संभावना, वाचक शब्द 'मानो')।
(ग): मानवीकरण अलंकार (निर्जीव बादलों पर सजने-संवरने की मानवीय क्रिया का आरोप)।
(घ): अतिशयोक्ति अलंकार (धनुष पर बाण चढ़ाते ही धरती, समुद्र, आकाश का कांप उठना अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर वर्णित है)।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) श्लेष अलंकार और यमक अलंकार में मुख्य अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
(ख) मानवीकरण अलंकार की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
(क) श्लेष और यमक में अंतर:
1. यमक अलंकार: एक ही शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है (उदा. 'कनक कनक ते सौ गुनी' — पहला कनक = धतूरा, दूसरा कनक = सोना)।
2. श्लेष अलंकार: शब्द केवल एक ही बार आता है, परंतु प्रसंग भेद से उसी एक शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं (उदा. 'मंगन को देखि पट देत बार-बार है' — 'पट' के दो अर्थ: वस्त्र और दरवाजा)।
(ख) मानवीकरण अलंकार की परिभाषा व उदाहरण:
- परिभाषा: जहाँ जड़ प्रकृति, अचेतन पदार्थों अथवा प्राकृतिक उपादानों (नदी, पर्वत, बादल, हवा, पेड़) पर मानव के क्रिया-कलापों, भावनाओं, चेष्टाओं अथवा व्यवहार का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
- उदाहरण: 'बीती विभावरी जागरी! अंबर पनघट में डुबो रही, तारा घट ऊषा नागरी।' (यहाँ 'ऊषा' प्रभात को एक चतुर स्त्री/नायिका के रूप में चित्रित किया गया है)।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): अलंकार पहचान बहुविकल्पीय अभ्यास

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: अलंकार पहचान बहुविकल्पीय अभ्यास
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में अलंकार से 4 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
प्रश्न 1: 'पाहुन ज्यों आए हों गांव में शहर के, मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।' में कौन-से दो अलंकार हैं? \rightarrow उत्प्रेक्षा अलंकार ('ज्यों' वाचक शब्द) तथा मानवीकरण अलंकार (बादलों का अतिथि रूप में आना)।
प्रश्न 2: 'राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।' में कौन-सा अलंकार है? \rightarrow अतिशयोक्ति अलंकार
प्रश्न 3: उत्प्रेक्षा अलंकार की पहचान के प्रमुख वाचक शब्द कौन-से हैं? \rightarrow मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ, जनहुँ, ज्यों
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: अलंकार के सही नाम की पहचान।
1 अंक: लक्षण अथवा वाचक शब्द ('मानो/ज्यों') का सही उल्लेख।
1 अंक: उपमेय और उपमान का स्पष्टीकरण।
1 अंक: श्लेष में एक शब्द के एकाधिक अर्थों का स्पष्ट निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: यमक और श्लेष में भ्रमित होना (यमक में शब्द दो बार आता है; श्लेष में शब्द एक ही बार आता है)।
Trap 2: उत्प्रेक्षा के वाचक शब्दों ('मानो, जानो') को अनदेखा करना।
Trap 3: प्राकृतिक उपमा को मानवीकरण समझना (मानवीकरण में मानवीय क्रिया का आरोप अनिवार्य है)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार) व्याकरणिक नियम व शुद्ध अनुप्रयोग
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार)' के नियमों, भेद की पहचान और व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रारूप स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: व्याकरणिक भेद की पहचान (Identification): दिए गए वाक्य अथवा पद में सही भेद या प्रारूप की सटीक पहचान।
1 अंक
चरण 2: रूपांतरण / विग्रह के नियम (Rule Application): व्याकरणिक नियमों के अनुसार शुद्ध वाक्य रूपांतरण, समास विग्रह अथवा विषय-विस्तार।
1 अंक
चरण 3: व्याकरणिक शुद्धता व वर्तनी (Syntactic Precision): लिंग, वचन, कारक व वर्तनी की पूर्ण शुद्धता एवं विराम चिह्नों का सही प्रयोग।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'अलंकार (शब्दा व अर्थालंकार)' में पूरे अंक प्राप्त करने की विधि:

1. सटीक नियम: रेखांकित पद या वाक्य का भेद पहचानते समय उसके मुख्य लक्षण का उल्लेख करें।
2. शुद्ध रूपांतरण: निर्देशानुसार रूपांतरण करते समय वाक्य का मूल अर्थ बदले बिना संरचना में परिवर्तन करें।
3. वर्तनी व विराम चिह्न: उत्तर में वर्तनी की त्रुटि न हो तथा पूर्णविराम, अल्पविराम का उचित प्रयोग करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
व्याकरण में भेद का नाम लिखते समय मात्राओं की अशुद्धि से अंक कटते हैं।
समास विग्रह करते समय दोनों पदों का अर्थ स्पष्ट करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
पाठ्यक्रम में चार प्रमुख अर्थालंकार निर्धारित हैं:
1. श्लेष अलंकार (शब्दा/अर्थालंकार)
2. उत्प्रेक्षा अलंकार
3. अतिशयोक्ति अलंकार
4. मानवीकरण अलंकार

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