Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-19 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 19

माता का अँचल (शिवपूजन सहाय)

शिवपूजन सहाय के आंचलिक उपन्यास 'देहाती दुनिया' (1926) का अमर अंश: ग्रामीण परिवेश में 1930 के दशक का बचपन, भोलानाथ (तारकेश्वरनाथ) और उसके पिता का घनिष्ठ वात्सल्य, सामूहिक बाल-क्रीड़ाएं (मिठाई की दुकान, बारात, खेती), मूसन तिवारी को चिढ़ाना, तथा सांप से डरकर पिता की गोद छोड़कर माता के आंचल में शरण लेना।

Quick Key Takeaways:
ग्रामीण बचपन की सहजता: बालक भोलानाथ का अधिकांश समय पिता (बाबूजी) के साथ बीतता था। सुबह उठकर नहलाना-धुलाना, भभूत का तिलक लगाना, पूजा में बिठाना, रामायण का पाठ, और गंगा में मछलियों को राम-नाम लिखी कागज़ की गोलियों में लिपटे आटे की गोलियां खिलाना।
सामूहिक बाल-क्रीड़ाएं व खिलौने: बच्चे घर के टूटे-फूटे बर्तनों, पत्तों, मिट्टी और धूल से स्वाभाविक खेल खेलते थे — मिठाई की दुकान लगाना (धूल की बर्फी, पत्तों की पूरियां), खेती करना (दिए की चक्की, घड़े के टुकड़े का चूल्हा), और दूल्हा-दुल्हन की बारात निकालना।
पिता का ममत्व बनाम माँ का वात्सल्य: पिता केवल पालन-पोषण, खेल और मनोरंजन के साथी थे, परंतु जब बालक पर चरम भय या संकट (सांप का सामना) आया, तो वह पास खड़े पिता की ओर न जाकर सीधे माता के आंचल में छिप गया
माता के आंचल का आध्यात्मिक व भावनात्मक मर्म: माँ के आंचल में मिलने वाली सुरक्षा, वात्सल्य, ममता और शांति संसार के किसी भी अन्य आश्रय में नहीं मिल सकती। रोते-कांपते बालक को छाती से चिपकाकर माँ का स्वयं रो पड़ना और हल्दी पीसकर घावों पर लगाना मातृत्व की पराकाष्ठा है।
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1. आंचलिक बाल-जीवन, पिता की संगति व देहाती खेल-कूद

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा माता का अँचल (शिवपूजन सहाय) की रूपरेखा।

भोलानाथ की दिनचर्या व बाबूजी के साथ आत्मीयता
नामकरण: वास्तविक नाम 'तारकेश्वरनाथ' था, किंतु माथे पर भभूत का त्रिपुंड देखकर पिता प्यार से 'भोलानाथ' पुकारते थे।
माँ का स्नेह भरा हठ: पिता के खिलाने के बाद भी माँ संतुष्ट नहीं होती थी; वह 'तोता, मैना, कबूतर' के नाम पर कौर बनाकर बड़े-बड़े ग्रास यह कहकर खिलाती थी — 'जब खाएगा बड़े-बड़े कौर, तब पाएगा दुनिया में ठौर!'
📊 माता का अँचल: ग्रामीण बचपन व मातृत्व का शिखरVisual Model
माता का आँचल: देहाती बचपन व माँ का ममतामयी आंचल
पिता का अगाध लाड़-प्यार
भोलानाथ का पिता के साथ जागना, नहलाना, भभूत लगाना
रामायण पाठ, गंगा में मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना
साथियों के साथ धूल-माटी में खेती, बारात व दावत के खेल
विपत्ति में माँ की शरण
सांप के डर से भागकर सीधे माँ की गोद में छिपना
पिता के पुकारने पर भी माँ के आंचल में ही सुरक्षा पाना
माँ का रोते हुए हल्दी पीसकर घावों पर लगाना
शिवपूजन सहाय का संदेश: पिता के असीम प्रेम के बावजूद विपत्ति के समय माँ का आंचल ही परम सुरक्षा और शांति का धाम है

पिता की स्नेहमयी दिनचर्या, सामूहिक देहाती खेल, सांप के भय का संकट, और माता के आंचल में परम सुरक्षा का वैचारिक मानचित्र।

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2. चूहे के बिल से सांप निकलना, भय का आतंक व माता का आंचल

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

सांप का भय और माता के आंचल का अमर संबल
मूसन तिवारी का प्रसंग: लड़कों ने मूसन तिवारी को चिढ़ाया ('बुढ़वा बेईमान मांगे करैला का चोखा'); मूसन तिवारी ने पाठशाला में शिकायत की और गुरुजी ने भोलानाथ की पिटाई की।
सांप का संकट: चूहे के बिल में पानी डालने पर फुंकारता हुआ काला सांप निकला। बच्चे गिरते-पड़ते लहूलुहान होकर भागे।
माँ की गोद में शरण: बाबूजी पुकारते रह गए, किंतु भोलानाथ सीधे भीतर जाकर माँ की गोद में दुबक गया। माँ के आंचल में छिपे कांपते बच्चे को देखकर माँ का रो पड़ना और उसकी सिसकियों को चूमना मातृत्व का अमर चित्र है।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: भोलानाथ अपने पिता से अधिक जुड़ा हुआ था, फिर भी विपत्ति के समय वह पिता के पास न जाकर माँ के पास क्यों गया?
1. पिता का साथ केवल सुख और खेल तक सीमित होना: भोलानाथ का अधिकांश समय पिता के साथ खेल-कूद, पूजा-पाठ, स्नान और भोजन में बीतता था। पिता उसके मित्र और शिक्षक जैसे थे।
2. माँ के आंचल में परम सुरक्षा और शांति का अहसास: विपत्ति, घोर भय और संकट के समय बालक को केवल तर्क या सहारा नहीं चाहिए होता, बल्कि उसे परम आत्मिक सुरक्षा, असीम ममता और निश्चल वात्सल्य की आवश्यकता होती है जो केवल माँ की गोद और उसके आंचल में मिलती है।
3. जैविक व भावनात्मक गहरा रिश्ता: माँ और बच्चे का संबंध गर्भ-नाल और वात्सल्य का अत्यंत गहरा जैविक व आध्यात्मिक संबंध है। बालक को विश्वास था कि माँ के आंचल में काल भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'माता का अँचल' पाठ में 1930 के दशक के ग्रामीण बच्चों के खेलों और आज के बच्चों के खेलों में क्या अंतर दिखाई देता है?
(ख) पाठ के आधार पर भोलानाथ के पिता (बाबूजी) के वात्सल्य और दिनचर्या पर प्रकाश डालिए।
Part (a) तत्कालीन बनाम आधुनिक बाल-क्रीड़ाएं:
1. प्राकृतिक व सामूहिक खेल: 1930 के दशक के बच्चे मिट्टी, धूल, पेड़ के पत्तों, घड़ों के ठीकरों और टूटी दियासलाई की तीलियों से सामूहिक खेल खेलते थे। उनके खेल कल्पनाशीलता, सामाजिक सामूहिकता और शारीरिक स्फूर्ति से भरे थे।
2. आधुनिक खेल: आज के बच्चे मोबाइल फोन, वीडियो गेम्स, कंप्यूटर और टेलीविजन की स्क्रीन तक सीमित होकर एकाकी, आत्मकेंद्रित और शारीरिक रूप से निष्क्रिय हो गए हैं। उनके जीवन से प्रकृति का सजीव संपर्क समाप्त हो गया है।
Part (b) बाबूजी का वात्सल्य व दिनचर्या:
1. स्नेहमयी दिनचर्या: बाबूजी प्रातःकाल उठकर भोलानाथ को नहलाते, माथे पर भभूत लगाते और अपने साथ पूजा में बिठाते थे।
2. रामायण पाठ व गंगा-भ्रमण: वे भोलानाथ को कंधे पर बिठाकर गंगा तट ले जाते, जहाँ वे कागज़ पर 'राम' लिखकर 500 आटे की गोलियां मछलियों को खिलाते थे।
3. बच्चों के खेलों में भागीदार: वे बच्चों के खेल (मिठाई की दुकान, बारात, कुश्ती) में स्वयं बच्चा बनकर शामिल होते थे और भोलानाथ को हँसाने के लिए जानबूझकर कुश्ती में हार जाते थे।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): सांप का भय और माता के आंचल में शरण (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: सांप का भय और माता के आंचल में शरण (RTC Drill)
हम लोग गिरते-पड़ते भागे। किसी का सिर फूटा, किसी के दाँत टूटे; सभी गिरते-पड़ते भागे। हमारी सारी देह लहूलुहान हो गई। पैरों के तलवे काँटों से छलनी हो गए। हम एक साँस में दौड़े हुए आए और घर में घुस गए। उस समय बाबूजी बैठक के ओसारे में बैठकर हुक्के का कश लगा रहे थे। उन्होंने हमें बहुत पुकारा, पर हमने उनकी एक न सुनी। सीधे जाकर माता के आँचल में ही शरण ली। माता चावल अमनिया कर रही थी। हमें डर से काँपते देखकर वह रो पड़ी और सब काम छोड़कर हमारे भय का कारण पूछने लगी।
प्रश्न 1: बच्चे बदहवास होकर क्यों भागे और उनकी क्या दशा हुई? \rightarrow बच्चे चूहे के बिल में पानी डालने पर निकले फुंकारते हुए सांप को देखकर प्राण बचाने के लिए गिरते-पड़ते भागे, जिससे उनके शरीर लहूलुहान हो गए और पैरों में कांटे चुभ गए।
प्रश्न 2: बाबूजी के पुकारने पर भी भोलानाथ उनके पास क्यों नहीं गया? \rightarrow क्योंकि अत्यधिक भय और आतंक की स्थिति में भोलानाथ को सबसे अधिक सुरक्षा, सांत्वना और ममता का संबल केवल माँ के आंचल में ही महसूस हुआ।
प्रश्न 3: इस उपन्यास अंश के लेखक कौन हैं और इसकी भाषा की क्या विशेषता है? \rightarrow लेखक: शिवपूजन सहाय; भाषा: देहाती (आंचलिक) अवधी-भोजपुरी मिश्रित सहज मानक हिंदी
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: भोलानाथ के ग्रामीण खेलों और पिता के साथ दिनचर्या का उल्लेख।
2 Marks: पिता के प्रेम बनाम माता के आंचल के संकटकालीन आश्रय का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण।
1 अंक: आंचलिक भाषा, लोकगीतों और देहाती शब्दों का सटीक उल्लेख।
1 अंक: 1930 के दशक के बाल-जीवन और आधुनिक बचपन की तुलना।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: भोलानाथ के पिता को कठोर समझना (पिता अत्यंत संवेदनशील, स्नेही और बाल-मनोवैज्ञानिक थे)।
Trap 2: 'अमनिया' का अर्थ न समझना (अमनिया करना = चावल साफ करना / फटकना)।
Trap 3: उपन्यास का नाम भूल जाना (यह 'देहाती दुनिया' उपन्यास का अंश है)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: माता का अँचल (शिवपूजन सहाय) चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'माता का अँचल (शिवपूजन सहाय)' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'माता का अँचल (शिवपूजन सहाय)' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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उसका वास्तविक नाम तारकेश्वरनाथ था। पिताजी उसके माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते थे और उसके सिर पर लंबी जटाएं थीं, जिससे वह 'भोला' दिखाई देता था; अतः पिताजी उसे प्यार से 'भोलानाथ' पुकारते थे।

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