Curriculum 2026–27
Practice
All Revision Notes
हिंदी (Course A & Course B)Ch-15 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 15

लखनवी अंदाज़ (यशपाल)

यशपाल की प्रसिद्ध व्यंग्य-रचना: ट्रेन के सेकंड क्लास डिब्बे में लखनवी नवाब साहब की बनावटी जीवन-शैली, खीरे को धोना, काटना, जीरा-नमक छिड़कना, फिर केवल सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देना और डकार लेना — 'बिना विचार, घटना और पात्रों के नई कहानी' लिखने पर तीखा कटाक्ष।

Quick Key Takeaways:
कहानी की पृष्ठभूमि: लेखक ने एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया। डिब्बे में पहले से ही एक सफेदपोश लखनवी नवाब साहब पालथी मारे बैठे थे, जिनके सामने तौलिए पर दो ताजे चिकने खीरे रखे थे।
नवाब साहब की खीरा-प्रक्रिया (नफासत और नजाकत):
1. लेखक के आने पर नवाब साहब ने असंतोष दिखाया।
2. खीरों को खिड़की से बाहर धोया, तौलिए से पोंछा, जेब से चाकू निकालकर खीरों के सिर काटे, झाग निकाला और बड़ी करीने से फांकें काटकर तौलिए पर सजाईं।
3. उन पर पिसा हुआ जीरा, नमक और लाल मिर्च की सुर्खी छिड़की।
4. फांकों को एक-एक करके उठाया, नाक के पास ले जाकर सूंघा (स्वाद के आनंद में पलकें मूंद लीं), और फिर एक-एक फांक को ट्रेन की खिड़की से बाहर फेंक दिया
5. हाथ और होंठ पोंछकर गर्व से लेखक की ओर देखा और एक जोरदार तृप्ति की डकार ली
व्यंग्य का दोहरा निशाना:
1. पतनशील सामंती वर्ग पर व्यंग्य: जो वास्तविकता से बेखबर होकर झूठे दिखावे, बनावटी शान और नजाकत में जीता है।
2. 'नई कहानी' के लेखकों पर व्यंग्य: जैसे बिना खाए केवल सूंघने से पेट नहीं भर सकता, वैसे ही बिना किसी विचार, कथ्य, घटना और पात्रों के कोई सार्थक कहानी नहीं लिखी जा सकती
1

1. सामंती दिखावा, नवाब साहब की नजाकत व नई कहानी पर व्यंग्य

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा लखनवी अंदाज़ (यशपाल) की रूपरेखा।

खीरे की तैयारी व बनावटी रईसी का प्रहसन
खीरा जैसे साधारण फल पर नजाकत: नवाब साहब खीरे को 'अशराफों' का फल नहीं मानते थे; सेकंड क्लास में यात्रा करते पकड़े जाने पर वे लेखक के सामने अपनी उच्च सामंती रईसी का प्रदर्शन करना चाहते थे।
डकार का रहस्य: नवाब साहब ने पेट भरे बिना केवल सूंघकर तृप्ति की डकार लेकर सिद्ध करना चाहा कि खानदानी रईसों का पेट सूंघने मात्र से भर जाता है।
📊 लखनवी अंदाज़: सामंती दिखावा व 'नई कहानी' पर व्यंग्यVisual Model
लखनवी अंदाज़: सामंती दिखावे पर तीखा व्यंग्य
नवाब साहब का झूठा दंभ
सेकंड क्लास के डिब्बे में अकेले यात्रा का दिखावा
खीरे को काटना, धोना, जीरा-नमक बुरकना
केवल सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देना और डकार लेना
कवि का यथार्थवादी व्यंग्य
'पेट भरे होने' का बनावटी नाटक
सामंती वर्ग की खोखली और पतनोन्मुख जीवनशैली
बिना विचार, घटना और पात्रों के नई कहानी लिखने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष
यशपाल का संदेश: बनावटी जीवनशैली और यथार्थ से कटे दिखावे पर यथार्थवादी चोट

नवाब साहब की बनावटी रईसी (खीरा सूंघकर फेंकना), काल्पनिक तृप्ति की डकार, तथा बिना कथ्य की 'नई कहानी' पर यशपाल के व्यंग्य का मानचित्र।

2

2. गद्य-शिल्प, हास्य-व्यंग्य व दार्शनिक निष्कर्ष

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

लेखक के ज्ञान-चक्षु खुलना व व्यंग्य का मर्म
ज्ञान-चक्षु खुलना: लेखक ने सोचा कि जब खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से पेट भर सकता है और डकार आ सकती है, तो फिर बिना विचार और घटना के केवल लेखक की इच्छा मात्र से 'नई कहानी' क्यों नहीं बन सकती? (यह नई कहानी की खोखली अमूर्त शैली पर करारा व्यंग्य था)।
3

3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: नवाब साहब ने खीरा खाने की पूरी प्रक्रिया के बाद उसे खिड़की से बाहर क्यों फेंक दिया? उनका यह व्यवहार क्या दर्शाता है?
1. झूठी सामंती रईसी का प्रदर्शन: नवाब साहब लेखक के सामने यह जताना चाहते थे कि वे लखनवी नवाब हैं और खीरे जैसी साधारण, बाजारू वस्तु को खाना उनकी उच्च सामंती मर्यादा और नफासत के खिलाफ है।
2. बनावटी नजाकत और रईसी का ढोंग: वे दिखाना चाहते थे कि खानदानी रईस खीरे को खाते नहीं, बल्कि केवल उसकी सुगंध का रसास्वादन करके ही तृप्त हो जाते हैं।
3. दिखावे की खोखली संस्कृति: उनका यह व्यवहार सामंती वर्ग की उस पतनोन्मुख, वास्तविक जीवन से कटी हुई दिखावे की संस्कृति को दर्शाता है जो समाज में अपनी कृत्रिम श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए हास्यास्पद नाटक करती है।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'लखनवी अंदाज़' पाठ में लेखक ने 'नई कहानी' के रचनाकारों पर किस प्रकार व्यंग्य किया है?
(ख) 'बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी नहीं बन सकती' — लेखक के इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Part (a) 'नई कहानी' के लेखकों पर व्यंग्य:
- तत्कालीन समय में 'नई कहानी' आंदोलन के कुछ लेखक यह दावा कर रहे थे कि बिना किसी ठोस कथानक, विचार, घटना या पात्रों के भी केवल अमूर्त भावों से कहानी लिखी जा सकती है।
- लेखक यशपाल ने नवाब साहब के खीरा सूंघकर पेट भरने की हास्यास्पद घटना को माध्यम बनाकर इन लेखकों पर तीखा कटाक्ष किया।
- लेखक का व्यंग्य है कि जिस प्रकार बिना खीरा खाए केवल सूंघने से पेट नहीं भर सकता (डकार आना केवल ढोंग है), उसी प्रकार बिना यथार्थवादी जीवन-संघर्ष, विचार और पात्रों के कोई सार्थक कहानी नहीं रची जा सकती।
Part (b) कथन की सार्थकता:
1. कथा-तत्वों की अनिवार्यता: किसी भी साहित्यिक कहानी के लिए एक आधारभूत विचार (थीम), ठोस घटनाक्रम (Plot), और सजीव पात्र (Characters) अनिवार्य हैं।
2. यथार्थ से जुड़ाव: साहित्य समाज का दर्पण होता है; यदि उसमें समाज के जीते-जागते पात्र और उनका संघर्ष नहीं होगा, तो वह रचना पाठकों के हृदय को कभी स्पर्श नहीं कर सकती।
3. यशपाल का प्रगतिशील दृष्टिकोण: मार्क्सवादी और प्रगतिशील लेखक होने के नाते यशपाल साहित्य को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानते थे, न कि खोखले कलावादी दिखावे का साधन।
4

4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): नवाब साहब की खीरा-साधना (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: नवाब साहब की खीरा-साधना (RTC Drill)
नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए। हमें तसलीम में सिर खम कर लेना पड़ा—यह है ख़ानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत! हम ग़ौर कर रहे थे, खीरा इस्तेमाल करने के इस तरीके को खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होने का सूक्ष्म, नफ़ीस या एब्स्ट्रैक्ट तरीका ज़रूर कहा जा सकता है, परंतु क्या ऐसे तरीके से उदर की तृप्ति भी हो सकती है? नवाब साहब की ओर से भरे पेट के ऊँचे डकार का शब्द सुनाई दिया और नवाब साहब ने हमारी ओर देखकर कह दिया, 'खीरा लज़ीज़ होता है लेकिन होता है सकील, नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है!'
प्रश्न 1: 'तसलीम में सिर खम कर लेना' मुहावरे का क्या अर्थ है? \rightarrow इसका अर्थ है — 'सम्मान में सिर झुका लेना' (यहाँ लेखक ने व्यंग्यात्मक रूप से नवाब साहब की बनावटी रईसी के आगे नतमस्तक होने का नाटक किया)।
प्रश्न 2: नवाब साहब ने खीरे के बारे में क्या टिप्पणी की और डकार क्यों ली? \rightarrow नवाब साहब ने कहा कि खीरा स्वादिष्ट (लज़ीज़) होता है, लेकिन भारी (सकील) होने के कारण कमजोर आमाशय (मेदे) पर बोझ डाल देता है। उन्होंने अपनी काल्पनिक तृप्ति का झूठा प्रदर्शन करने के लिए डकार ली।
प्रश्न 3: इस पाठ की शैली और प्रयुक्त उर्दू शब्दावली की क्या विशेषता है? \rightarrow शैली: हास्य-व्यंग्यात्मक (Satirical); उर्दू शब्दावली: तहज़ीब, नफ़ासत, नज़ाकत, तसलीम, मेदा, सकील, लज़ीज़ का सुंदर प्रयोग।
5

5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: नवाब साहब की खीरा-प्रक्रिया और बनावटी रईसी का उल्लेख।
2 Marks: सामंती दिखावे और 'नई कहानी' आंदोलन पर दोहरे व्यंग्य का सटीक विश्लेषण।
1 अंक: यशपाल की प्रगतिशील विचार-दृष्टि और मुहावरेदार भाषा का उल्लेख।
1 अंक: 'एब्स्ट्रैक्ट' तरीके और पेट की तृप्ति के द्वंद्व का उद्घाटन।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: कहानी को केवल हास्यप्रद घटना समझना (यह गहन साहित्यिक व सामाजिक व्यंग्य है)।
Trap 2: 'मेदा' और 'सकील' जैसे उर्दू शब्दों के अर्थ में अशुद्धि करना।
Trap 3: यशपाल के यथार्थवादी उद्देश्य को अनदेखा करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: लखनवी अंदाज़ (यशपाल) चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'लखनवी अंदाज़ (यशपाल)' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'लखनवी अंदाज़ (यशपाल)' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
लेखक ने उस पतनशील सामंती वर्ग (नवाबों) पर तीखा कटाक्ष किया है जो वास्तविकता से कटकर केवल झूठी शान-शौकत, बनावटी जीवन-शैली और नफासत का दिखावा करने में विश्वास रखता है।

Related YouTube Videos & Masterclasses

1 Verified Class 10 Videos

Curated top-tier CBSE Class 10 video lessons, one-shots, and problem-solving sessions for लखनवी अंदाज़ (यशपाल). Click any video below to watch instantly inside Master10.

One-Shot Revision42m

Lakhnavi Andaz Class 10 Hindi Kshitij Chapter 9 | Yashpal

Magnet BrainsClick to play on Master10
Magnet Brains|One-Shot Revision

Best for: Satirical humor and feudal pretension analysis

YouTube Link

Select Video Lesson to Play:

Playing 1 of 1