Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-28 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 28

डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया)

सीताराम सेकसरिया की ऐतिहासिक डायरी: 26 जनवरी 1931 का दिन, कोलकाता में दूसरा स्वतंत्रता दिवस समारोह, सुभाष चंद्र बोस का विशाल जुलूस, पुलिस कमिश्नर का नोटिस बनाम कौंसिल का नोटिस, मोनुमेंट के नीचे राष्ट्रीय ध्वज फहराना, पुलिस की बर्बर लाठीचार्ज, और महिलाओं (मदालसा, जानकी देवी) का अद्वितीय सत्याग्रह।

Quick Key Takeaways:
ऐतिहासिक संदर्भ: 26 जनवरी 1930 को संपूर्ण भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में इसकी पहली वर्षगांठ को अभूतपूर्व उत्साह से मनाया गया।
कोलकाता पर कलंक धुलना: लोगों का आक्षेप था कि स्वतंत्रता आंदोलन में कोलकाता (बंगाल) का कोई विशेष योगदान नहीं है; 26 जनवरी 1931 के ऐतिहासिक आंदोलन ने इस कलंक को सदा के लिए धो दिया।
दो परस्पर विरोधी नोटिस:
1. पुलिस कमिश्नर का नोटिस: धारा 144 के तहत किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस या झंडा फहराना गैर-कानूनी घोषित किया गया।
2. प्रांतीय कौंसिल का नोटिस: ठीक 4 बजकर 24 मिनट पर मोनुमेंट के नीचे आम सभा होगी और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।
सुभाष बाबू का अदम्य नेतृत्व व पुलिस लाठीचार्ज: सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में विशाल जुलूस निकला। पुलिस ने भयंकर लाठियां बरसाईं, क्षितिश बाबू और बृजलाल गोयनका लहूलुहान हो गए, किंतु सुभाष बाबू 'वंदे मातरम्' बोलते हुए आगे बढ़ते रहे।
नारी-शक्ति का अभूतपूर्व पराक्रम: सैकड़ों महिलाओं (जानकी देवी, मदालसा) ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया, लाठियां खाईं और 105 महिलाओं को लालबाजार जेल भेजा गया। यह कोलकाता के इतिहास में महिलाओं का पहला संगठित सत्याग्रह था।
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1. 26 जनवरी 1931 का ऐतिहासिक संदर्भ, सुभाष बाबू का जुलूस व नोटिस द्वंद्व

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया) की रूपरेखा।

कोलकाता का स्वतंत्रता दिवस और जन-उभार
मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज: पूरे कोलकाता के मकानों पर तिरंगा फहरा रहा था, मानो स्वतंत्रता प्राप्त हो गई हो।
बड़ाबाजार का दृश्य: बड़ाबाजार के सभी मकानों को राष्ट्रीय झंडों से सजाया गया था और प्रचार पर भारी धन खर्च किया गया था।
📊 डायरी का एक पन्ना: कोलकाता का स्वतंत्रता संग्रामVisual Model
डायरी का एक पन्ना: 26 जनवरी 1931 का ऐतिहासिक कोलकाता
स्वतंत्रता दिवस का आयोजन
26 जनवरी 1931 को कोलकाता में दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाना
स्मारक पर झंडा फहराने की तैयारी और पुलिस की भारी नाकेबंदी
महिलाओं का अभूतपूर्व उत्साह (मोतीलाल नेहरू की स्मृति में उत्सव)
पुलिस बर्बरता व जनता का शौर्य
सुभाष चंद्र बोस के जुलूस पर पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस
बोस का निरंतर 'वंदे मातरम्' बोलते हुए आगे बढ़ना
सैकड़ों महिलाओं की गिरफ्तारी और कोलकाता पर लगा 'असहयोग न करने' का कलंक धुलना
सीताराम सेकसरिया का संदेश: देश की आजादी के लिए सामूहिक जन-विद्रोह, नारी-शक्ति और अदम्य राष्ट्रप्रेम की अमर गाथा

26 जनवरी 1931 का अमर दिन, सुभाष बाबू का ऐतिहासिक जुलूस, पुलिस कमिश्नर vs कौंसिल नोटिस, और वीरांगनाओं का मोनुमेंट सत्याग्रह।

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2. पुलिस की बर्बरता, मोनुमेंट पर ध्वजारोहण व नारी-शक्ति का त्याग

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

सत्याग्रहियों का बलिदान व ऐतिहासिक सफलता
मोनुमेंट के नीचे प्रतिज्ञा: तारा सुंदरी और महिलाओं ने पुलिस की लाठियों के बीच राष्ट्रीय प्रतिज्ञा पढ़ी।
अस्पतालों और जेलों का दृश्य: 200 से अधिक लोग घायल हुए और लालबाजार हवालात में पुरुषों और स्त्रियों को ठूंस दिया गया।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: 26 जनवरी 1931 के दिन को 'अमर दिन' क्यों कहा गया है? 'डायरी का एक पन्ना' के आधार पर लिखिए।
1. स्वतंत्रता की पहली वर्षगांठ का विराट आयोजन: 26 जनवरी 1930 को लिए गए पूर्ण स्वराज्य के संकल्प की पहली वर्षगांठ पर पूरे कोलकाता नगर ने अभूतपूर्व देशभक्ति का परिचय दिया।
2. अंग्रेजी हुकूमत के आदेशों की खुली अवहेलना: पुलिस कमिश्नर के निषेधाज्ञा नोटिस (धारा 144) को ठेंगा दिखाते हुए हजारों नागरिकों ने मोनुमेंट के नीचे एकत्र होकर तिरंगा फहराया और आज़ादी की प्रतिज्ञा पढ़ी।
3. कोलकाता पर लगा कलंक धुलना: इस दिन जनता के असीम त्याग, लाठीचार्ज सहने और महिलाओं की भारी भागीदारी ने सिद्ध कर दिया कि कोलकाता स्वतंत्रता आंदोलन में किसी से पीछे नहीं है।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री-समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।' इस कथन को सोदाहरण सिद्ध कीजिए।
(b) 26 जनवरी 1931 के दिन पुलिस कमिश्नर और प्रांतीय कौंसिल के नोटिसों में क्या अंतर था?
Part (a) स्त्री-समाज की ऐतिहासिक भूमिका:
1. मोनुमेंट पर झंडा फहराना: जब पुलिस पुरुषों पर लाठियां बरसा रही थी, तब बड़ी संख्या में महिलाएं मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़ गईं और राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया।
2. स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा का पाठ: पुलिस के लाठीचार्ज के बीच विमल प्रतिभा, जानकी देवी और मदालसा जैसी वीरांगनाओं ने स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा का पाठ पूर्ण किया।
3. जेल यात्रा और लाठियां सहना: पुलिस ने स्त्रियों पर भी लाठियां चलाईं। उस दिन कुल 105 महिलाओं को गिरफ्तार करके लालबाजार हवालात भेजा गया, जो कोलकाता के इतिहास में पहली बार हुआ था।
Part (b) दोनों नोटिसों का अंतर:
- पुलिस कमिश्नर का नोटिस: इसमें आदेश दिया गया था कि कोई भी सभा या जुलूस नहीं निकाला जा सकता; जो भी व्यक्ति इसमें शामिल होगा, उसे कानून का उल्लंघन करने वाला दोषी मानकर गिरफ्तार किया जाएगा।
- प्रांतीय कौंसिल का नोटिस: इसमें समस्त नागरिकों का आह्वान किया गया था कि ठीक 4 बजकर 24 मिनट पर मोनुमेंट के नीचे एकत्र हों, राष्ट्रीय ध्वज फहराएं और पूर्ण स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ें।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): सुभाष बाबू का जुलूस और पुलिस लाठीचार्ज (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: सुभाष बाबू का जुलूस और पुलिस लाठीचार्ज (RTC Drill)
सुभाष बाबू के नेतृत्व में जुलूस निकला। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी। चौरंगी के मोड़ पर आते-आते पुलिस ने लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं। बहुत-से लोग घायल हो गए। सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं, पर वे रुके नहीं। वे ज़ोर-ज़ोर से 'वंदे मातरम्' बोलते जा रहे थे। क्षितिश बाबू का सिर फट गया, उनका सारा शरीर लहूलुहान हो गया, फिर भी वे 'वंदे मातरम्' गाते रहे। उसी समय धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस टूट गया और लगभग 50-60 स्त्रियाँ वहीं सड़क पर बैठ गईं।
प्रश्न 1: सुभाष बाबू लाठीचार्ज के समय क्या कर रहे थे? \rightarrow लाठियां पड़ने पर भी सुभाष बाबू पीछे नहीं हटे; वे निडर होकर आगे बढ़ते रहे और 'वंदे मातरम्' के गगनभेदी नारे लगाते रहे।
प्रश्न 2: धर्मतल्ले के मोड़ पर स्त्रियों ने किस साहस का परिचय दिया? \rightarrow जब पुलिस के भीषण लाठीचार्ज से जुलूस तितर-बितर हो गया, तब 50-60 साहसी महिलाएं वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गईं और पुलिस का मुकाबला किया।
प्रश्न 3: इस पाठ के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है? \rightarrow लेखक: सीताराम सेकसरिया; विधा: डायरी (Diary Writing)
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: 26 जनवरी 1931 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का स्पष्टीकरण।
2 Marks: सुभाष बाबू के नेतृत्व और पुलिस बर्बरता के विरुद्ध सत्याग्रह का विश्लेषण।
1 अंक: महिलाओं (मदालसा, जानकी देवी) के अभूतपूर्व योगदान का उल्लेख।
1 अंक: दोनों विरोधी नोटिसों और डायरी शैली की विशेषताओं का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: इस घटना को 1930 का समझना (यह 26 जनवरी 1931 की घटना है)।
Trap 2: महिलाओं के योगदान को सीमित बताना (105 महिलाएं जेल गई थीं)।
Trap 3: डायरी विधा के प्रत्यक्षदर्शी यथार्थ को अनदेखा करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया) चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया)' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया)' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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क्योंकि ठीक एक वर्ष पूर्व (26 जनवरी 1930) को पूरे देश में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, किंतु कोलकाता पर यह कलंक था कि वहाँ कोई बड़ा आंदोलन नहीं हो रहा है। 26 जनवरी 1931 को कोलकातावासियों ने पुलिस लाठीचार्ज और पाबंदियों को धता बताकर विशाल ऐतिहासिक आंदोलन किया और यह कलंक धो दिया।

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