Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-11 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 11

यह दंतुरित मुसकान व फसल

जनकवि नागार्जुन की दो प्रसिद्ध कविताएं: 'यह दंतुरित मुसकान' (छोटे शिशु के नए दांतों वाली मुसकान का सम्मोहन, पाषाण पिघलाकर जल बना देने की शक्ति, मां की मधुपर्क साधना) तथा 'फसल' (नदियों के पानी का जादू, करोड़ों हाथों के स्पर्श की गरिमा, खेतों की मिट्टी का गुणधर्म और सूर्य-हवा का रूपांतरण)।

Quick Key Takeaways:
'यह दंतुरित मुसकान' का मूल भाव: 6–8 माह के नन्हे शिशु के जब नए-नए दूध के दांत निकलते हैं, तो उसकी निश्चल, भोली मुसकान मृतप्राय व्यक्ति में भी प्राण फूंक देती है।
शिशु की मुसकान के 4 चमत्कारी प्रभाव:
1. धूल-धूसरित शरीर: धूल से सना शिशु का शरीर ऐसा लगता है मानो झोपड़ी में कमल के फूल खिल गए हों ('जलजात' )।
2. कठोर पाषाण पिघलना: शिशु के स्पर्श मात्र से कठोर से कठोर हृदय भी पिघलकर करुणा की जलधारा बन जाता है।
3. बबूल से शेफालिका के फूल: कांटेदार बबूल और बांस से भी शेफालिका के सुगंधित फूल झड़ने लगते हैं।
4. तिरछी नजरों की पहचान: परदेसी प्रवासी पिता को अपलक देखना और आंख मिलते ही मुसका देना।
'फसल' कविता का मूल भाव: फसल केवल एक तत्व का परिणाम नहीं है; यह प्रकृति और मानव-श्रम के सुंदर सामंजस्य का फल है।
फसल के 5 अनिवार्य घटक: (1) नदियों के पानी का जादू, (2) करोड़ों किसानों के हाथों के स्पर्श की गरिमा (श्रम), (3) मिट्टी का गुणधर्म (काली, चिकनी, लाल, संदली मिट्टी), (4) सूर्य की किरणों का रूपांतरण, (5) हवा की थिरकन का संकोच
काव्य-शिल्प: सरल, बोलचाल की प्रवाहमयी खड़ी बोली, यथार्थवादी बिंब, मानवीकरण, रूपक, और वात्सल्य रस।
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1. शिशु की निष्पाप मुसकान व फसल के बहु-सांस्कृतिक घटक

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा यह दंतुरित मुसकान व फसल की रूपरेखा।

'यह दंतुरित मुसकान' में वात्सल्य और मानवीय संवेदना
परदेसी पिता का आभार: कवि लंबे समय तक घर से बाहर रहा, इसलिए शिशु उसे अपरिचितों की तरह देखता है। कवि शिशु की माँ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है जिसके 'मधुपर्क' (दही-शहद-घी-दूध का पंचामृत) ने शिशु को पाला।
कनखी मारना: जब शिशु तिरछी नजरों से देखता है और आंखें मिलते ही मुसका देता है, तो उसकी छवि कवि के मन को मुग्ध कर देती है।
📊 यह दंतुरित मुसकान व फसल: वात्सल्य व श्रम-सौंदर्यVisual Model
A Tiger in the Zoo: Spatial & Emotional Contrast
Concrete Cell Confinement
Locked behind heavy bars in a cramped cage; ignoring visitors
Stalking the few quiet steps of his cage in quiet rage
Staring with brilliant eyes at the brilliant distant stars at night
Wild Natural Habitat
Should be lurking in shadow, sliding through long grass near water hole
Hunting plump deer at the edge of the jungle freely
Snarling around houses, baring white fangs, terrorizing the village naturally
Core Concept: Leslie Norris' poignant critique of human cruelty and the deprivation of wild animal liberty

शिशु की मुसकान का जादुई सम्मोहन (पाषाण से जल), माँ का मधुपर्क, तथा फसल के 5 अनिवार्य प्राकृतिक-मानवीय घटकों का विश्लेषणात्मक मानचित्र।

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2. फसल का वैज्ञानिक-काव्यात्मक विश्लेषण व सप्रसंग भावार्थ

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

'फसल' कविता में श्रम-सौंदर्य व प्रकृति का योगदान
फसल क्या है?: 'फसल क्या है? और तो कुछ नहीं है वह / नदियों के पानी का जादू है वह / हाथों के स्पर्श की महिमा है / भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुणधर्म है / रूपांतर है सूरज की किरणों का / सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का।' \rightarrow प्रकृति के पंचतत्वों और मनुष्य के अथक पसीने का ठोस परिणाम फसल है।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है? 'यह दंतुरित मुसकान' के आधार पर लिखिए।
1. मृतप्राय व्यक्ति में प्राण फूंकना: शिशु की मुसकान इतनी सजीव और मनमोहक है कि वह किसी निराश, दुखी और मृतप्राय व्यक्ति में भी जीने का नया उत्साह और प्राण भर देती है।
2. झोपड़ी में कमल खिलने का अहसास: धूल-धूसरित धूल से सने शिशु को देखकर कवि को लगता है मानो कीचड़ के स्थान पर उसकी निर्धन झोपड़ी में साक्षात कमल के फूल खिल उठे हों।
3. पाषाण हृदय का पिघलना: कवि अनुभव करता है कि शिशु का कोमल स्पर्श पाकर कठोर से कठोर पत्थर जैसा हृदय भी पिघलकर निर्मल जलधारा बन जाएगा और बांस/बबूल जैसे शुष्क स्वभाव वाले व्यक्ति से भी शेफालिका के फूल झड़ने लगेंगे।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'फसल' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'हवा की थिरकन का संकोच' क्यों कहा गया है?
(ख) 'यह दंतुरित मुसकान' कविता में कवि ने शिशु की माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता क्यों व्यक्त की है?
Part (a) 'फसल' के घटकों का विश्लेषण:
1. हाथों के स्पर्श की गरिमा: प्रकृति अपने समस्त उपहार (मिट्टी, जल, धूप) दे दे, फिर भी यदि किसान और मजदूर अपने हाथों से हल न चलाएं, पसीना न बहाएं और फसल की देखभाल न करें, तो फसल पैदा नहीं हो सकती। फसल वास्तव में करोड़ों मेहनतकश इंसानों के श्रम की प्रतिष्ठा (गरिमा) है।
2. हवा की थिरकन का संकोच: हवा जब खेतों से गुजरती है तो फसलों को थिरकन और आवश्यक कार्बन डाइऑक्साइड देकर पौधों के विकास में चुपचाप समाहित हो जाती है; यह हवा का मौन योगदान है।
Part (b) शिशु की माँ के प्रति कृतज्ञता:
- कवि निरंतर घर से बाहर (प्रवास) में रहने के कारण अपने ही बच्चे के लिए एक अपरिचित अतिथि (परदेसी) बना रहा।
- माँ ने ही बच्चे का निरंतर लालन-पालन किया, उसे अपनी ममता की छाँव दी और अपनी उंगलियों से 'मधुपर्क' (अमृततुल्य भोजन) कराया।
- माँ के माध्यम से ही आज कवि अपने बच्चे की इस दिव्य मुसकान का साक्षात्कार कर पा रहा है। इसलिए कवि कहता है — 'धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!'
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): फसल का मर्म: 'रूपांतर है सूरज की किरणों का' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: फसल का मर्म: 'रूपांतर है सूरज की किरणों का' (RTC Drill)
एक के नहीं, दो के नहीं, / ढ़ेरों नदियों के पानी का जादू: / एक के नहीं, दो के नहीं, / लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा: / एक की नहीं, दो की नहीं, / हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुणधर्म: / फसल क्या है? / और तो कुछ नहीं है वह / नदियों के पानी का जादू है वह / हाथों के स्पर्श की महिमा है / भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुणधर्म है / रूपांतर है सूरज की किरणों का / सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
प्रश्न 1: 'नदियों के पानी का जादू' से कवि का क्या तात्पर्य है? \rightarrow विभिन्न नदियों (गंगा, यमुना, सतलुज आदि) का मीठा, पोषक जल फसलों को सींचकर उन्हें हरा-भरा और जीवनवान बनाता है।
प्रश्न 2: कवि ने मिट्टी को 'भूरी-काली-संदली' क्यों कहा है? \rightarrow क्योंकि भारत की विभिन्न भौगोलिक मिट्टियों (काली, दोमट, जलोढ़, बलुई, चंदन सी सुगंधित संदली मिट्टी) के अलग-अलग रासायनिक और पोषक गुणधर्म फसलों के स्वाद और रंग में समाहित होते हैं।
प्रश्न 3: इस काव्यांश में कौन-सा रस और कौन-सी भाषा प्रयुक्त हुई है? \rightarrow रस: शांत रस व श्रम-सौंदर्य; भाषा: सरल, प्रवाहमयी मानक खड़ी बोली
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: शिशु की दंतुरित मुसकान के 4 चमत्कारी प्रभावों का उल्लेख।
2 Marks: फसल के 5 भौतिक व मानवीय घटकों (जल, श्रम, मिट्टी, धूप, वायु) का विस्तृत विश्लेषण।
1 अंक: माँ की 'मधुपर्क' साधना और प्रवासी पिता की भाव-दशा का निरूपण।
1 अंक: भाषा की सरलता, यथार्थवादी बिंब और वात्सल्य रस का उल्लेख।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: फसल को केवल प्रकृति की देन बताना (नागार्जुन मानव-श्रम को सबसे प्रमुख घटक मानते हैं)।
Trap 2: 'मधुपर्क' का अर्थ न समझना (मधुपर्क = दही, घी, शहद, दूध, जल का पंचामृत)।
Trap 3: नागार्जुन के यथार्थवादी प्रगतिशील दृष्टिकोण को नजरअंदाज करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: यह दंतुरित मुसकान व फसल काव्य-सौंदर्य व केंद्रीय भाव
कक्षा 10 सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'यह दंतुरित मुसकान व फसल' का मूल भावार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं जीवन-संदेश स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: प्रसंग व केंद्रीय भाव (Context & Central Theme): काव्यांश का सटीक संदर्भ, कवि का उद्देश्य एवं अंतर्निहित मुख्य भावार्थ का स्पष्ट निरूपण।
1 अंक
चरण 2: काव्य-शिल्प व अलंकार (Poetic Craft & Figures of Speech): भाषा-शैली (ब्रज/अवधी/खड़ी बोली), प्रयुक्त प्रमुख अलंकार (अनुप्रास/रूपक/उपमा आदि) व बिंब-विधान का उल्लेख।
1 अंक
चरण 3: जीवन-मूल्य व संदेश (Life Values & Moral): कविता द्वारा संप्रेषित नैतिक मूल्य, मानवतावादी दृष्टि एवं समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'यह दंतुरित मुसकान व फसल' में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में पूरे 3 अंक प्राप्त करने का आदर्श प्रारूप:

1. प्रसंग व मूल भाव: काव्यांश के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए बताएं कि कवि किस मानसिक दशा, आध्यात्मिक सत्य अथवा सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
2. काव्य-शिल्प (कला पक्ष): कविता की भाषा-शैली (गेयता, तुकांत, रस) और प्रमुख अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण) का सटीक उल्लेख करें।
3. जीवन-संदेश (भाव पक्ष): कविता से मिलने वाली शाश्वत मानवीय सीख, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रतिपादन करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
भाव-पक्ष (अर्थ) और कला-पक्ष (अलंकार, भाषा) दोनों का उत्तर में संतुलन अनिवार्य है।
वर्तनी की शुद्धता और उपयुक्त साहित्यिक हिंदी शब्दावली का प्रयोग करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
शिशु की नई-नई दाँतों वाली भोली मुसकान इतनी प्राणवान है कि वह मृतक (हताश, निराश व्यक्ति) में भी नए प्राण फूंक सकती है। कठोर पाषाण-हृदय पिघलकर जल बन जाता है और बबूल व बांस जैसे शुष्क वृक्षों से भी शेफालिका के फूल झड़ने लगते हैं।

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Yeh Danturit Muskan Aur Fasal Class 10 Hindi Chapter 5 | Nagarjun

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