Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-31 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 31

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

निदा फ़ाज़ली का संवेदनशील निबंध: मानव का प्रकृति और मूक पशु-पक्षियों पर निर्मम अतिक्रमण, सुलेमान का चींटियों की रक्षा करना, नूह का घायल कुत्ते को दुत्कारने पर जीवन भर विलाप करना, लेखक की मां द्वारा कबूतर के अंडे टूटने पर पश्चाताप में दिन भर रोजा रखना, कंक्रीट के जंगलों द्वारा पक्षियों के घोंसले उजाड़ना, और प्रकृति का भयानक प्रतिशोध (सुनामी, भूकंप, ग्लोबल वार्मिंग)।

Quick Key Takeaways:
निबंध का मूल संदेश: यह संपूर्ण पृथ्वी केवल मनुष्य की बपौती नहीं है; इस पर पशु, पक्षी, नदी, पहाड़ और वृक्षों का भी समान अधिकार है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ और लोभ के कारण समूची प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है।
तीन महान संवेदनशील दृष्टांत:
1. हजरत सुलेमान (सोलोमन): जब वे अपनी सेना के साथ जा रहे थे, तो चींटियों ने भयभीत होकर कहा कि बिलों में चलो। सुलेमान ने रुककर प्रेम से कहा — 'घबराओ नहीं, मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबकी हिफाजत की दुआ हूँ।'
2. शेख अयाज के पिता (नूह/लश्कर): एक घायल कुत्ते को दुत्कारने के पश्चाताप में पैगंबर नूह जीवन भर रोते रहे। शेख अयाज के पिता ने जब देखा कि एक च्योंटा (चींटा) उनकी बांह पर रेंग रहा है, तो वे भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए और कहा कि 'मैं एक बेघर को उसके घर (कुएं की मुंडेर) छोड़ने जा रहा हूँ'
3. लेखक की माँ का पश्चाताप: रोशनदान में कबूतर का एक अंडा बिल्ली ने फोड़ दिया; दूसरा अंडा बचाते समय माँ के हाथ से गिरकर फूट गया। माँ ने इस पाप के प्रायश्चित के लिए दिन भर कुछ नहीं खाया-पिया और नमाज़ पढ़कर रोती रही
प्रकृति का रौद्र प्रतिशोध: मनुष्य ने समुद्र को पीछे धकेला, जंगलों को काटा, जिससे बेघर पक्षी फ्लैटों के कोनों में भटक रहे हैं। जब प्रकृति का धैर्य टूटता है, तो वह सुनामी, असमय बाढ़, भूकंप और भीषण तूफानों के रूप में अपना भयानक गुस्सा प्रकट करती है।
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1. प्रकृति-प्रेम, प्राचीन संवेदनशील परंपराएं व तीन ऐतिहासिक दृष्टांत

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले की रूपरेखा।

सह-अस्तित्व की भावना व मानवीय संवेदनशीलता
'ईशावास्यमिदं सर्वम्': संसार की हर वस्तु में ईश्वर का वास है। मनुष्य ने पहले बड़े-बड़े आंगनों वाले घर बनाए जहाँ पशु-पक्षी साथ रहते थे, आज डिब्बे जैसे फ्लैटों में मनुष्य खुद भी सिमट गया है।
कुत्ते और नूह का संवाद: कुत्ते ने कहा था — 'न मैं अपनी मर्जी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इंसान; हम सबको बनाने वाला वही एक परमात्मा है।' यह सुनकर नूह रो पड़े।
📊 अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले: जीव-दया व प्रकृतिVisual Model
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले: संवेदनशीलता का ह्रास
महापुरुषों की करुणा के प्रेरक प्रसंग
सुलेमान (पैगंबर) द्वारा चींटियों की रक्षा करना
शेख अयाज़ के पिता का एक चींटे के लिए भोजन छोड़कर उठ जाना
नूह (पैगंबर) द्वारा कुत्ते की सीख पर जीवन भर पश्चाताप के आंसू बहाना
प्रकृति का रौद्र रूप व स्वार्थ
समुद्र को पीछे धकेलकर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण
घोंसले उजाड़ने पर कबूतरों का फड़फड़ाना और माँ का रोज़ा रखना
प्रकृति के असंतुलन से उत्पन्न सुनामी, भूकंप और भयानक आपदाएं
निदा फ़ाज़ली का संदेश: इस पृथ्वी पर पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव सबका समान अधिकार है; स्वार्थ छोड़कर दयालु बनें

हजरत सुलेमान की चींटी-रक्षा, नूह का विलाप, लेखक की मां का रोजा, कंक्रीट का अतिक्रमण, और समुद्र के रौद्र गुस्से का वैचारिक मानचित्र।

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2. शहरीकरण, पक्षियों का निष्कासन व प्रकृति का रौद्र प्रकोप

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

प्रकृति के साथ खिलवाड़ के विनाशकारी दुष्परिणाम
कबूतरों के लिए जाली लगाना: लेखक की पत्नी ने कबूतरों के आने-जाने पर जाली लगा दी और उनके बच्चों को बाहर निकाल दिया, जो आधुनिक मानव की संवेदनहीनता का प्रतीक है।
समुद्र का क्रोध: जब बिल्डरों ने समुद्र को पीछे धकेल दिया, तो समुद्र ने गुस्से में तीन बड़े जहाजों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: सुलेमान और शेख अयाज के पिता के प्रसंगों से मनुष्य को क्या शिक्षा मिलती है?
1. सुलेमान का प्रसंग (सच्चा राजा/शासक वही जो दुर्बलों की रक्षा करे): सुलेमान ने अपनी विशाल सेना को रोककर नन्हीं चींटियों को सुरक्षा का भरोसा दिया। इससे शिक्षा मिलती है कि शक्ति और पद पाकर मनुष्य को अहंकारी नहीं होना चाहिए, बल्कि दुर्बल और मूक जीवों की रक्षा करनी चाहिए।
2. शेख अयाज के पिता का प्रसंग (जीव-दया और सह-अनुभूति): एक छोटे-से चींटे को बेघर देखकर वे भोजन छोड़कर उसे उसके घर छोड़ने चले गए। इससे शिक्षा मिलती है कि संसार के सबसे छोटे और उपेक्षित प्राणी के जीवन और आश्रय का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
3. सार्वभौमिक सह-अस्तित्व: सभी जीव ईश्वर की रचना हैं; मनुष्य को दूसरों के दुख में दुखी होने की संवेदनशील मानवीय चेतना को जीवित रखना चाहिए।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'प्रकृति की सहनशीलता की भी एक सीमा होती है।' 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्रकृति अपना गुस्सा किस प्रकार प्रकट करती है?
(b) लेखक की माँ ने कबूतर का अंडा फूटने पर अपने प्रायश्चित को किस प्रकार व्यक्त किया?
Part (a) प्रकृति का गुस्सा और प्रतिशोध:
1. अंधाधुंध दोहन और अतिक्रमण: मनुष्य ने अपनी लालच में जंगलों को काट डाला, पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ा दिया और समुद्र के किनारे पर कंक्रीट की बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं।
2. प्रकृति का बढ़ता गुस्सा: पहले प्रकृति ने गरमी में अधिक गरमी, बेवक्त की बरसातें, तूफानों और नई-नई महामारियों के रूप में हल्की चेतावनियां दीं।
3. रौद्र विनाशकारी रूप: जब मनुष्य फिर भी नहीं माना, तो एक रात समुद्र ने भयानक सुनामी बनकर तीन विशाल जहाजों को तिनके की तरह उठाकर फेंक दिया (एक वर्ली के समुद्र तट पर, दूसरा बांद्रा में कार्टर रोड पर और तीसरा गेटवे ऑफ इंडिया पर)।
4. प्रकृति सिद्ध करती है कि उसका संतुलन बिगाड़ने वाले मनुष्य को वह एक झटके में नष्ट कर सकती है।
Part (b) लेखक की माँ का प्रायश्चित:
- जब कबूतर का दूसरा अंडा लेखक की माँ के हाथ से छूटकर गिर गया और उसका बच्चा मर गया, तो माँ को लगा कि उसने एक मासूम जीव की हत्या का महापाप कर दिया है।
- उन्होंने अपनी इस अनजाने में हुई भूल का प्रायश्चित करने के लिए दिन भर का रोजा (उपवास) रखा
- वे सारा दिन नमाज़ पढ़कर रोती रहीं और ईश्वर से अपनी उस गलती के लिए गिड़गिड़ाकर क्षमा मांगती रहीं।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): प्रकृति का रौद्र रूप: समुद्र का गुस्सा (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: प्रकृति का रौद्र रूप: समुद्र का गुस्सा (RTC Drill)
बिल्डरों ने समंदर को पीछे धकेलना शुरू कर दिया था। समंदर सिमटता गया। पहले उसने अपनी फैली हुई टांगें समेटीं, फिर घुटने मोड़कर बैठा, फिर उकड़ू बैठ गया। फिर जब बैठने की भी जगह न बची, तो उसे गुस्सा आ गया। जो जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही कम गुस्सा आता है; परंतु आता है तो संभालना मुश्किल हो जाता है। एक रात समंदर ने तीन बड़े जहाजों को बच्चों की गेंद की तरह उठाकर तीन दिशाओं में फेंक दिया। वे फिर कभी चलने लायक न हो सके।
प्रश्न 1: लेखक ने समंदर के सिमटने का वर्णन किस मानवीकरण के माध्यम से किया है? \rightarrow लेखक ने समंदर की तुलना एक विवश मनुष्य से की है जो पहले अपनी टांगें समेटता है, फिर घुटने मोड़ता है और अंत में उकड़ू बैठ जाता है।
प्रश्न 2: समंदर ने गुस्से में क्या किया और इसका क्या प्रतीकात्मक अर्थ है? \rightarrow समंदर ने तीन बड़े जहाजों को उठाकर तीन दिशाओं में पटक दिया। इसका प्रतीकात्मक अर्थ है कि प्रकृति पर लगातार अत्याचार करने पर जब प्रकृति का धैर्य टूटता है, तो मानव निर्मित आधुनिक तकनीक तिनके के समान नष्ट हो जाती है
प्रश्न 3: इस निबंध के लेखक कौन हैं और इस पाठ की भाषा की क्या विशेषता है? \rightarrow लेखक: निदा फ़ाज़ली; भाषा: उर्दू मिश्रित अत्यंत संवेदनशील, मुहावरेदार और काव्यात्मक हिंदी
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: निबंध के मूल संदेश (प्रकृति व जीवों के सह-अस्तित्व) का स्पष्टीकरण।
2 Marks: सुलेमान, नूह, शेख अयाज के पिता और लेखक की मां के दृष्टांतों का गहन विश्लेषण।
1 अंक: समुद्र के गुस्से और प्राकृतिक आपदाओं (सुनामी) के कारणों की व्याख्या।
1 अंक: मानवीय संवेदनहीनता (कबूतरों पर जाली लगाना) के यथार्थ का उद्घाटन।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: निबंध को केवल पशु-पक्षियों की कहानी समझना (यह गंभीर पर्यावरण संकट और नैतिक पतन पर लिखा गया निबंध है)।
Trap 2: शेख अयाज और नूह के प्रसंगों में अंतर न करना।
Trap 3: प्रकृति के मानवीकरण को अनदेखा करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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सुलेमान केवल मानव जाति के ही नहीं, पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों के भी रक्षक थे। जब चींटियां उनके लश्कर के घोड़ों की टापों से डरकर बिलों में भागने लगीं, तो सुलेमान ने रुककर कहा: 'घबराओ नहीं, मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सब के लिए रहमत हूँ', जो सभी जीवों के प्रति करुणा का पाठ पढ़ाता है।

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