Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-30 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 30

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

प्रहलाद अग्रवाल का समीक्षात्मक निबंध: जनकवि व अमर गीतकार शैलेंद्र द्वारा फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी 'मारे गए गुलफाम' पर आधारित शुद्ध कलात्मक फिल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण, राज कपूर का अभिनय, व्यावसायिकता से दूर शुद्ध साहित्यिक संवेदना, हीरामन और हीराबाई का मूक प्रेम, तथा शैलेंद्र की संवेदनशीलता।

Quick Key Takeaways:
शैलेंद्र का परिचय: हिंदी सिनेमा के युगप्रवर्तक गीतकार और जनकवि। उन्होंने सिनेमा को व्यावसायिक फॉर्मूलों से निकालकर शुद्ध साहित्य और जन-संवेदना से जोड़ा।
फिल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण: फणीश्वरनाथ रेणु की आंचलिक कहानी 'मारे गए गुलफाम' पर शैलेंद्र ने अपने जीवन की पहली और अंतिम फिल्म 'तीसरी कसम' बनाई।
राज कपूर की चेतावनी: जब शैलेंद्र ने राज कपूर को कहानी सुनाई, तो राज कपूर ने फिल्म में काम करना तो सहर्ष स्वीकार किया, परंतु एक सच्चे मित्र के नाते चेतावनी दी कि यह फिल्म व्यावसायिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें कोई मसाला या नाच-गाना नहीं था।
व्यावसायिकता से परे शुद्ध कला: शैलेंद्र ने फिल्म में वितरकों (Distributors) के दबाव में कोई भड़कीला सीन या अश्लील गीत नहीं डाला। उन्होंने रेणु की कहानी की मूल आत्मा (देहाती भोलापन, मिट्टी की गंध और सादगी) को हूबहू पर्दे पर उतारा।
फिल्म की तीन कसमें:
1. पहली कसम: गाड़ी में कभी चोरी का माल (बांस/तस्करी) नहीं लादेगा।
2. दूसरी कसम: गाड़ी में कभी बांस नहीं लादेगा।
3. तीसरी कसम: कभी किसी कंपनी की नौटंकी वाली औरत (बाईजी) को अपनी गाड़ी में नहीं बैठाएगा (हीराबाई के प्रेम में आहत होकर)।
पुरस्कार व त्रासदी: फिल्म को राष्ट्रपति का सर्वोच्च स्वर्ण पदक (National Award) मिला, किंतु व्यावसायिक वितरकों की उपेक्षा के कारण शैलेंद्र को भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ा और वे इस सदमे से असमय ही संसार से विदा हो गए।
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1. शैलेंद्र का जनकवि स्वरूप, 'मारे गए गुलफाम' व फिल्म निर्माण

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र की रूपरेखा।

शैलेंद्र की साहित्यिक व मानवीय निष्ठा
गीतों में दार्शनिक गहराई: शैलेंद्र के गीतों में जीवन की कठिन सच्चाइयां अत्यंत सरल भाषा में ढल जाती थीं (उदा. 'सजन रे झूठ मत बोलो', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई')।
मुकेश और राज कपूर का त्रिकोण: राज कपूर का अभिनय, मुकेश का कंठ और शैलेंद्र के गीत भारतीय सिनेमा का अमर त्रिकोण थे।
📊 तीसरी कसम के शिल्पकार: शैलेंद्र का कला-दर्शनVisual Model
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र: कलात्मक प्रतिबद्धता
शैलेंद्र का आदर्शवादी दृष्टिकोण
'तीसरी कसम' फिल्म का निर्माण फणीश्वरनाथ 'रेणु' की अमर कहानी पर
व्यावसायिक लाभ की चिंता छोड़कर कला की पवित्रता को बनाए रखना
कवि की भावुकता और राजकपूर का अद्वितीय अभिनय
फिल्म की आत्मा व 'रस'
ग्रामीण यथार्थ, लोक-संस्कृति और हीरामन-हीराबाई का निश्छल प्रेम
'महुआ घटवारिन' और 'चूल्हा नहीं जला' गीतों में छिपी गहरी मानवीय संवेदना
राजकपूर को 'आंखों से बोलने वाला अभिनेता' सिद्ध करना
प्रह्लाद अग्रवाल का संदेश: शैलेंद्र ने सिनेमा को धन कमाने का माध्यम नहीं, मानवीय संवेदनाओं और यथार्थवादी कला का साधन माना

शैलेंद्र का जनकवि स्वरूप, 'मारे गए गुलफाम' पर शुद्ध कलात्मक फिल्म, राज कपूर की चेतावनी, हीरामन की तीन कसमें, और राष्ट्रीय स्वर्ण पदक का मानचित्र।

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2. हीरामन-हीराबाई का प्रेम, तीन कसमें व राष्ट्रीय पुरस्कार

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

तीसरी कसम का कलात्मक वैभव
हीरामन का भोलापन: राज कपूर ने देहाती गाड़ीवान 'हीरामन' की भूमिका को इतनी सजीवता से जिया कि वह उनकी अभिनय-यात्रा का शिखर बन गया।
मूक प्रेम की मर्यादा: हीरामन और नौटंकी की नर्तकी हीराबाई (वहीदा रहमान) के बीच कोई शारीरिक वासना नहीं थी; वह एक अत्यंत पवित्र, मूक और देवतुल्य आदर का प्रेम था।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: शैलेंद्र ने 'तीसरी कसम' फिल्म बनाकर क्या जोखिम उठाया? राज कपूर ने उन्हें क्या चेतावनी दी थी?
1. व्यावसायिक जोखिम: 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा बॉक्स ऑफिस के फॉर्मूलों (मारधाड़, सस्पेंस, अश्लीलता) पर चलता था। शैलेंद्र ने बिना किसी व्यावसायिक फॉर्मूले के एक विशुद्ध साहित्यिक, शांत और ग्रामीण संवेदना की फिल्म बनाने का भारी आर्थिक जोखिम उठाया।
2. राज कपूर की चेतावनी: राज कपूर ने शैलेंद्र से मित्रतापूर्वक कहा था कि 'मेरा पारिश्रमिक तो एडवांस देना होगा और यह समझ लो कि तुम्हारी यह फिल्म डूब जाएगी, क्योंकि इसमें बॉक्स ऑफिस को आकर्षित करने वाला कोई मसाला नहीं है।'
3. शैलेंद्र की अडिग निष्ठा: शैलेंद्र ने लाभ-हानि की चिंता किए बिना रेणु के साहित्य की पवित्रता की रक्षा के लिए यह जोखिम स्वीकार किया।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'तीसरी कसम' को 'सेल्युलाइड पर लिखी गई कविता' क्यों कहा गया है?
(b) गाड़ीवान हीरामन ने कौन-सी तीन कसमें खाई थीं और क्यों?
Part (a) सेल्युलाइड पर लिखी गई कविता:
1. कविता जैसी संवेदनशीलता: जिस प्रकार एक उत्तम कविता में अनावश्यक शब्दों का आडंबर नहीं होता और वह सीधे हृदय के तारों को झंकृत करती है, उसी प्रकार 'तीसरी कसम' फिल्म में कोई कृत्रिमता या फिल्मी नौटंकी नहीं थी।
2. आंचलिक जीवन की सजीव गंध: बिहार के ग्रामीण परिवेश, बैलगाड़ी की चरमराहट, कजरी-गीत और धूल भरी पगडंडियों को पर्दे (सेल्युलाइड) पर इतने कलात्मक ढंग से उतारा गया था कि पूरी फिल्म एक मधुर दृश्य-काव्य (कविता) बन गई थी।
3. मूक प्रेम की उदात्तता: हीरामन और हीराबाई के अव्यक्त प्रेम की पवित्रता को शैलेंद्र ने बिना किसी संवाद के केवल भावों और गीतों से अभिव्यक्त किया।
Part (b) हीरामन की तीन कसमें:
1. पहली कसम: वह अपनी बैलगाड़ी में कभी चोरी या तस्करी का माल नहीं लादेगा (क्योंकि एक बार पुलिस ने उसे लगभग पकड़ ही लिया था)।
2. दूसरी कसम: वह अपनी गाड़ी में कभी बांस नहीं लादेगा (क्योंकि बांस गाड़ी से बाहर निकलकर दुर्घटना का कारण बनते थे)।
3. तीसरी कसम: वह कभी अपनी गाड़ी में किसी नौटंकी की नाचने वाली औरत (कंपनी की बाईजी) को नहीं बैठाएगा (क्योंकि हीराबाई के जाने के बाद उसके भोले हृदय को जो असह्य विरह वेदना हुई, उसे वह दोबारा नहीं सहना चाहता था)।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): शैलेंद्र का कला-दर्शन: 'गीतों में ज़िंदगी का सच' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: शैलेंद्र का कला-दर्शन: 'गीतों में ज़िंदगी का सच' (RTC Drill)
शैलेंद्र ने कभी सिनेमा की चकाचौंध में अपनी आत्मा का सौदा नहीं किया। वे एक ऐसे संवेदनशील कवि थे जो जीवन के दुखों को भी एक सुंदर आशावादी राग में बदल देते थे। उनके गीतों में शांत नदी के प्रवाह जैसा गहरा ठहराव था। 'तीसरी कसम' उनकी इसी संवेदनशीलता का साक्षात प्रमाण थी। उन्होंने दिखा दिया कि सिनेमा केवल व्यापार नहीं है, वह एक महान कला माध्यम भी हो सकता है।
प्रश्न 1: शैलेंद्र के गीतों की प्रमुख विशेषता क्या थी? \rightarrow उनके गीतों में सरलता, दार्शनिक गहराई, जीवन के यथार्थ का चित्रण और सकारात्मक आशावाद का सुंदर संतुलन था।
प्रश्न 2: शैलेंद्र ने 'तीसरी कसम' के माध्यम से सिनेमा के बारे में क्या सिद्ध किया? \rightarrow उन्होंने सिद्ध किया कि सिनेमा केवल धन कमाने का बाजारू व्यापार नहीं है, बल्कि वह साहित्य और मानवीय संवेदना को अभिव्यक्त करने वाली उच्च कोटि की कला है।
प्रश्न 3: इस समीक्षात्मक निबंध के लेखक कौन हैं और फिल्म किस कहानी पर आधारित थी? \rightarrow लेखक: प्रहलाद अग्रवाल; कहानी: फणीश्वरनाथ रेणु की 'मारे गए गुलफाम'
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: शैलेंद्र के व्यक्तित्व और फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी का उल्लेख।
2 Marks: फिल्म को 'सेल्युलाइड पर लिखी कविता' कहने और व्यावसायिक जोखिमों का विश्लेषण।
1 अंक: हीरामन की तीनों कसमों का सटीक और विस्तृत उल्लेख।
1 अंक: शुद्ध कलात्मक सिनेमा और व्यावसायिकता के द्वंद्व का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: फिल्म के निर्देशक और निर्माता में भ्रमित होना (निर्माता शैलेंद्र थे, निर्देशक बासु भट्टाचार्य थे)।
Trap 2: हीरामन की तीनों कसमों को गलत क्रम में लिखना।
Trap 3: 'मारे गए गुलफाम' कहानी के लेखक का नाम भूलना (लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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शैलेंद्र एक भावुक कवि और आदर्शवादी इंसान थे, चतुर फिल्म निर्माता नहीं। वितरकों ने फिल्म को खरीदने से मना कर दिया क्योंकि इसमें कोई सस्ता मसाला या व्यावसायिक फॉर्मूला नहीं था; उन्हें भारी आर्थिक घाटा सहना पड़ा।

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