Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-13 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 13

नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश)

स्वयं प्रकाश की प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण कहानी: कस्बे के चौराहे पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति, मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल की भूल, कैप्टन चश्मेवाले का मूक देशप्रेम, पानवाले का संवेदनहीन उपहास, और बच्चों द्वारा लगाया गया सरकंडे का चश्मा।

Quick Key Takeaways:
कहानी की पृष्ठभूमि: एक छोटे कस्बे के मुख्य चौराहे पर नगर पालिका के प्रशासनिक बोर्ड ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संगमरमर की प्रतिमा लगवाई। स्थानीय ड्राइंग मास्टर 'मोतीलाल' ने बजट व समय के अभाव में मूर्ति तो बना दी, लेकिन वह नेताजी का चश्मा बनाना भूल गया
कैप्टन चश्मेवाले का देशप्रेम: एक अत्यंत निर्धन, बूढ़ा, लंगड़ा और फेरी लगाकर चश्मा बेचने वाला व्यक्ति, जिसे लोग 'कैप्टन' कहते थे। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति अधूरी व आहत करती थी। वह अपने सीमित फ्रेमों में से एक फ्रेम नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था; जब कोई ग्राहक वैसा फ्रेम मांगता, तो वह क्षमा मांगकर मूर्ति से उतारकर ग्राहक को देता और नया फ्रेम मूर्ति पर लगा देता।
पानवाले का उपहास व पश्चाताप: पानवाला एक मोटा, खुशमिजाज और बातूनी व्यक्ति था जिसने कैप्टन का उपहास उड़ाया — 'वह लंगड़ा क्या जाएगा फौज में! पागल है पागल!' परंतु कैप्टन की मृत्यु के बाद वही पानवाला उदास होकर अपनी धोती के छोर से आंखें पोंछता है।
सरकंडे का चश्मा व अमर देशभक्ति: कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब ने सोचा कि अब मूर्ति बिना चश्मे की रहेगी। परंतु जब उन्होंने देखा कि बच्चों ने सरकंडे (घास-फूस) का छोटा-सा चश्मा बनाकर मूर्ति पर लगा दिया है, तो हालदार साहब की आंखें भर आईं। यह इस बात का प्रमाण था कि देश की भावी पीढ़ी में भी देशभक्ति की अमर भावना जीवित है।
कहानी का केंद्रीय संदेश: देशभक्ति केवल सेना में भर्ती होने, झंडा फहराने या नारे लगाने का नाम नहीं है; देश के प्रति सम्मान और अपने छोटे-छोटे कार्यों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही सच्ची देशभक्ति है।
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1. कथा-सार, कैप्टन की देशभक्ति व हालदार साहब की संवेदनशीलता

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश) की रूपरेखा।

नेताजी की प्रतिमा और चश्मे का रहस्य
प्रतिमा का सौंदर्य व एक कमी: टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक दो फुट ऊंची संगमरमर की 'बस्ट' प्रतिमा अत्यंत सुंदर और फौजी वर्दी में सजीव थी। देखते ही 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा' याद आने लगता था। केवल एक कमी खटकती थी — संगमरमर का चश्मा नहीं था, बल्कि सचमुच का काला चौड़ा फ्रेम लगा था।
हालदार साहब की सोच: हालदार साहब हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम से कस्बे से गुजरते थे। वे पान खाते और मूर्ति को देखकर मुस्कुराते — 'वाह भाई! क्या आइडिया है! मूर्ति पत्थर की, पर चश्मा रियल!'
📊 नेताजी का चश्मा: देशभक्ति, कैप्टन व सरकंडे का चश्माVisual Model
नेताजी का चश्मा: देशभक्ति का सच्चा स्वरूप
कैप्टन चश्मेवाले का समर्पण
नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति पर रोज नया चश्मा लगाना
शारीरिक दुर्बलता व विपन्नता के बावजूद अगाध देशप्रेम
देशभक्तों के त्याग का सम्मान
हालदार साहब की भावुकता
कैप्टन की मृत्यु पर मूर्ति का चश्माविहीन होने का भय
सरकंडे का बना चश्मा देखकर आँखें भर आना
देशभक्ति केवल सेना या सीमा तक सीमित नहीं, हर नागरिक में जीवित है
स्वयं प्रकाश का संदेश: देशभक्ति किसी विशेष वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, हर आम नागरिक की आत्मीय भावना है

कैप्टन का मूक देशप्रेम, पानवाले का संवेदनहीन उपहास व पश्चाताप, हालदार साहब की संवेदनशीलता और सरकंडे के चश्मे का अमर संदेश।

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2. चरित्र-चित्रण, सामाजिक व्यंग्य व सरकंडे के चश्मे का मर्म

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

कैप्टन, पानवाला और भावी पीढ़ी का चरित्र विश्लेषण
कैप्टन चश्मेवाला: शारीरिक रूप से दुर्बल और लंगड़ा, बांस के डंडे पर चश्मे टांगे फेरी लगाने वाला अत्यंत निर्धन व्यक्ति, किंतु आत्मिक रूप से सच्चा देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानियों का पुजारी।
पानवाला: स्वार्थी, असंवेदनशील और दूसरों का उपहास उड़ाने वाला सामान्य नागरिक, किंतु अंतर्मन में मानवीय संवेदना रखने वाला।
सरकंडे का चश्मा: कहानी की चरम सीमा; यह दर्शाता है कि देशभक्ति किसी साधन-संपन्न व्यक्ति की बपौती नहीं है, वह बच्चों की कोमल निष्पाप भावनाओं में भी जीवित है।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: कैप्टन कौन था? वह नेताजी की मूर्ति पर चश्मा क्यों लगाता था? उसे 'कैप्टन' क्यों कहा जाता था?
1. कैप्टन का परिचय: कैप्टन एक अत्यंत वृद्ध, दुर्बल और लंगड़ा फेरीवाला था जो एक संदूकची और बांस के डंडे पर चश्मों के फ्रेम टांगकर कस्बे में चश्मे बेचा करता था।
2. चश्मा लगाने का कारण: उसके हृदय में देश के अमर स्वतंत्रता सेनानियों, विशेष रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अगाध श्रद्धा और सम्मान था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली अधूरी मूर्ति देखकर मानसिक कष्ट होता था। अपनी इसी देशभक्ति की भावना के कारण वह अपने सीमित फ्रेमों में से एक फ्रेम नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था।
3. 'कैप्टन' नामकरण का रहस्य: वह कभी सेना या आज़ाद हिंद फौज का सिपाही नहीं रहा था, परंतु देश के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति उसके भीतर फौजियों जैसा असीम त्याग, अनुशासन और देशप्रेम का भाव था। कस्बे के लोग उसके इसी देशप्रेम के कारण व्यंग्य अथवा आदर से उसे 'कैप्टन' कहते थे।
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) 'नेताजी का चश्मा' कहानी के अंत में बच्चों द्वारा नेताजी की मूर्ति पर लगाया गया 'सरकंडे का चश्मा' क्या संदेश देता है? हालदार साहब इसे देखकर भावुक क्यों हो गए?
(ख) पानवाले का रेखाचित्र (चरित्र-चित्रण) अपने शब्दों में लिखिए।
Part (a) सरकंडे के चश्मे का मर्म व हालदार साहब की भावुकता:
1. अमर देशभक्ति की निरंतरता: बच्चों द्वारा बनाया गया सरकंडे का छोटा-सा चश्मा यह सिद्ध करता है कि देशप्रेम किसी विशेष व्यक्ति (जैसे कैप्टन) के साथ समाप्त नहीं होता; यह भावना देश की भावी पीढ़ी (बच्चों) के हृदय में पूरी निष्ठा और पवित्रता के साथ फल-फूल रही है।
2. साधनों की सीमा नहीं: देशभक्ति धन, पद या बड़े साधनों की मोहताज नहीं है; बच्चों ने अपने पास उपलब्ध तुच्छ सरकंडे से ही नेताजी के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट कर दिया।
3. हालदार साहब की भावुकता: हालदार साहब सोच रहे थे कि कैप्टन की मृत्यु के बाद अब देश में देशभक्तों का सम्मान करने वाला कोई नहीं बचा। परंतु जब उन्होंने बच्चों की इस सुंदर भावना को देखा, तो उनका देश के भविष्य के प्रति विश्वास पुनः जाग उठा और उनकी आंखें भर आईं।
Part (b) पानवाले का चरित्र-चित्रण:
1. शारीरिक स्वरूप: पानवाला एक काला, मोटा और तोंद वाला व्यक्ति था। उसके मुंह में हमेशा पान ठुंसा रहता था। जब वह हँसता था, तो उसकी तोंद थिरकती थी और पान की पीक थूकने के कारण उसके दांत लाल-काले दिखाई देते थे।
2. स्वभाव: वह बातूनी, खुशमिजाज और हर घटना की जानकारी रखने वाला कस्बे का 'अखबार' था।
3. संवेदनहीनता व मानवीयता का द्वंद्व: उसने कैप्टन की देशभक्ति और अपंगता का मजाक उड़ाया, परंतु कैप्टन की मृत्यु पर वह सचमुच दुखी हुआ और उसने अपनी आंखें पोंछकर कैप्टन के प्रति सम्मान प्रकट किया।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): हालदार साहब की भावुकता: सरकंडे का चश्मा (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: हालदार साहब की भावुकता: सरकंडे का चश्मा (RTC Drill)
हालदार साहब की आदत मजबूर थी, आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसी चीज़ देखी कि चीखे, 'रोको!' जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।
प्रश्न 1: हालदार साहब ने ड्राइवर को अचानक जीप रोकने के लिए क्यों कहा? \rightarrow क्योंकि चौराहे से गुजरते समय उन्होंने नेताजी की मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का बना एक छोटा-सा चश्मा देखा, जिसे देखकर वे आश्चर्यचकित और स्तब्ध रह गए।
प्रश्न 2: 'इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं' — हालदार साहब के लिए यह 'इतनी-सी बात' इतनी महत्वपूर्ण क्यों थी? \rightarrow क्योंकि वह सरकंडे का चश्मा केवल एक घास का तिनका नहीं था, बल्कि वह देश के नन्हें बच्चों के हृदय में धड़कती अमर देशभक्ति और शहीदों के प्रति कृतज्ञता का साक्षात प्रमाण था।
प्रश्न 3: कहानी के लेखक कौन हैं और इस पाठ की भाषा-शैली कैसी है? \rightarrow लेखक: स्वयं प्रकाश; भाषा: सरल, व्यावहारिक, चित्रात्मक मानक हिंदी जिसमें तद्भव, देशज और उर्दू शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग है।
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: कैप्टन के चरित्र और चश्मा लगाने के उद्देश्य का स्पष्टीकरण।
2 Marks: सरकंडे के चश्मे के प्रतीकार्थ और हालदार साहब की भावुकता का गहन विश्लेषण।
1 अंक: पानवाले के चरित्र की विरोधाभासी विशेषताओं का उद्घाटन।
1 अंक: देशभक्ति के वास्तविक व व्यावहारिक स्वरूप का निरूपण।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: कैप्टन को सचमुच का फौजी अधिकारी समझना (वह लंगड़ा चश्मा बेचने वाला फेरीवाला था)।
Trap 2: पानवाले को पूर्णतः क्रूर बताना (पानवाला दिल से बुरा नहीं था; कैप्टन की मौत पर वह रो पड़ा था)।
Trap 3: सरकंडे के चश्मे को बच्चों का खेल मात्र समझना (यह भावी पीढ़ी की सच्ची देशभक्ति का प्रतीक है)।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: देशभक्ति की भावना व मूक योगदान
‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से लेखक ने किस प्रकार के देशप्रेम को उजागर किया है?

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: कैप्टन का परिचय व संवेदनशीलता: कैप्टन एक साधारण, बूढ़ा व दिव्यांग फेरीवाला था, किंतु उसके हृदय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अगाध आदर व राष्ट्रप्रेम था।
1 अंक
चरण 2: चश्मा लगाने का मूक संकल्प: नेताजी की बिना चश्मे वाली अधूरी मूर्ति उसे आहत करती थी, इसलिए वह अपने सीमित साधनों में से मूर्ति पर निरंतर नया चश्मा बदलता रहा।
1 अंक
चरण 3: देशप्रेम का व्यापक संदेश: लेखक ने संदेश दिया कि देशप्रेम केवल सीमा पर लड़ने या नारों तक सीमित नहीं है; अपने-अपने स्तर पर राष्ट्र-निर्माताओं का सम्मान करना ही सच्चा देशप्रेम है।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी में लेखक स्वयं प्रकाश ने कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से सच्चे और व्यावहारिक देशप्रेम को निरूपित किया है:

1. शहीदों के प्रति आदर: कैप्टन कोई फौजी या संपन्न व्यक्ति नहीं था, बल्कि एक साधारण दिव्यांग फेरीवाला था। कस्बे के चौराहे पर नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति उसे आहत करती थी।
2. मूक राष्ट्रसेवा: वह अपनी छोटी सी फेरी के गिने-चुने चश्मों में से एक चश्मा नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था और ग्राहक द्वारा मांगे जाने पर उसे बदलकर दूसरा लगा देता था।
3. सच्चा देशप्रेम: लेखक स्पष्ट करते हैं कि देशप्रेम किसी विशेष पद, सेना या भाषणबाजी का मोहताज नहीं है। देश के प्रत्येक नागरिक का अपने सामर्थ्य अनुसार राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करना ही सच्ची देशभक्ति है।
Examiner Mark Deduction Traps:
उत्तर में यह रेखांकित अवश्य करें कि देशप्रेम केवल सीमाओं पर बंदूक उठाने वालों का नहीं, अपितु हर छोटे-बड़े नागरिक के योगदान का नाम है।
कैप्टन की शारीरिक अक्षमता और उसके मन की देशभक्ति के विरोधाभास को स्पष्ट रूप से लिखें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

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हालदार साहब कंपनी के काम के सिलसिले में हर पंद्रहवें दिन उस कस्बे से गुजरते थे। वे चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति देखने और पानवाले की दुकान पर पान खाने के लिए रुकते थे।

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