Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-17 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 17

नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)

यतींद्र मिश्र द्वारा रचित प्रसिद्ध व्यक्तिचित्र: शहनाई के अद्वितीय सम्राट 'भारत रत्न' उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का सादगीपूर्ण जीवन, काशी की गंगा-जमुनी साझी संस्कृति, बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर रियाज, मुहर्रम और कजली का अगाध श्रद्धाभाव, और ईश्वर से केवल 'सच्चे सुर' की नेमत मांगना।

Quick Key Takeaways:
बिस्मिल्ला खाँ का परिचय: जन्म बिहार के डुमराँव में (जहाँ शहनाई में प्रयुक्त होने वाली 'नरकट' घास सोन नदी के किनारे मिलती है)। ननिहाल काशी (वाराणसी) में संगीत की शिक्षा पाई। मामा सादिक हुसैन और अलीबख्श के साथ बालाजी मंदिर के नौबतखाने में शहनाई बजाकर रियाज शुरू किया।
काशी की साझी गंगा-जमुनी संस्कृति के प्रतीक: बिस्मिल्ला खाँ सच्चे मुसलमान थे — पाँचों वक्त नमाज़ पढ़ते थे, मुहर्रम के 8वें दिन दालमंडी से फातमान तक 8 किलोमीटर पैदल रोते हुए नौहा बजाते थे; वहीं दूसरी ओर वे काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर के अनन्य भक्त थे। संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती पर शहनाई वादन करते थे और गंगा मैया को अपनी माँ मानते थे।
सादगी व सच्चे सुर की प्रार्थना: भारत रत्न मिलने के बाद भी वे फटी हुई लुंगी (तहमत) पहनते थे। जब शिष्या ने टोका तो हँसकर बोले — 'धत! पगली, ई भारत रत्न हमको शहनैया पे मिला है, लुंगिया पे नहीं! मालिक से यही दुआ है कि फटा सुर न बख्शे, लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सिल जाएगी!'
रसूलनबाई और बतूलनबाई का प्रभाव: बचपन में बालाजी मंदिर जाते समय रसूलनबाई और बतूलनबाई के घर के रास्ते से गुजरते थे, जहाँ उनके ठुमरी और टप्पे सुनकर बिस्मिल्ला खाँ के बाल-मन में संगीत के प्रति पहला अनुराग जागा।
कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी और सिनेमा: संगीत के अतिरिक्त उन्हें कुलसुम हलवाइन की देसी घी की कचौड़ी (जिसमें छन से पड़ने वाली आवाज में उन्हें संगीत सुनाई देता था) और अभिनेत्री सुलोचना की फिल्में बेहद पसंद थीं।
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1. बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तिचित्र, साझी संस्कृति व संगीत-साधना

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र) की रूपरेखा।

काशी, गंगा और शहनाई का अटूट त्रिकोण
काशी मुक्ति की भूमि: खाँ साहब कहते थे कि काशी संस्कृति की पाठशाला है; यहाँ संगीत बिस्मिल्ला खाँ है और काशी विश्वनाथ साक्षात शिव हैं। काशी को छोड़कर वे कहीं नहीं जा सकते थे।
सुर की साधना: 80 वर्ष की आयु में भी वे ईश्वर से केवल यही मांगते थे — 'हे मालिक! मुझे सच्चा सुर दे, ऐसा सुर जिसमें असर हो, जिसे सुनकर आँखों से सच्चे मोती जैसे आंसू निकल पड़ें।'
📊 नौबतखाने में इबादत: बिस्मिल्ला खाँ व साझी संस्कृतिVisual Model
नौबतखाने में इबादत: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की सुर-साधना
शहनाई की मंगलध्वनि व रियाज़
डुमराँव की 'नरकट' घास से शहनाई का अटूट नाता
बालाजी और मंगला गौरी मंदिर की ड्योढ़ी पर दशकों का रियाज़
गंगा मैया और काशी के प्रति अगाध श्रद्धा
सच्ची धार्मिक सद्भावना व सादगी
मुहर्रम में 8 किलोमीटर तक नंगे पैर रोते हुए नौहा बजाना
भारत रत्न मिलने पर भी फटी तहमद में रहना
खुदा से केवल 'सच्चा सुर' मांगना (दौलत नहीं)
यतींद्र मिश्र का संदेश: बिस्मिल्ला खाँ गंगा-जमुनी तहज़ीब, सादगी और संगीत-साधना के अमर प्रतीक हैं

शहनाई सम्राट का सादगीपूर्ण जीवन, काशी विश्वनाथ व मुहर्रम की साझी साधना, फटी तहमत, और सच्चे सुर की ईश्वरीय इबादत का वैचारिक मानचित्र।

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2. मुहर्रम, बालाजी मंदिर व सादगीपूर्ण जीवन-मूल्य

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

धार्मिक सहिष्णुता व मानवीय सद्भाव का शिखर
मुहर्रम का शोक: मुहर्रम के 10 दिनों में खाँ साहब का परिवार न शहनाई बजाता था और न किसी संगीत उत्सव में भाग लेता था।
गंगा मैया के प्रति श्रद्धा: विदेश यात्रा पर जाते समय वे हमेशा काशी और गंगा जी की दिशा में मुंह करके अपनी शहनाई का प्याला घुमाकर प्रणाम करते थे।
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी और गंगा को छोड़कर कहीं और क्यों नहीं जाना चाहते थे?
1. संगीत-साधना की जन्मस्थली: काशी में उनके मामा का घर था और यहीं बालाजी के मंदिर की ड्योढ़ी पर उन्होंने वर्षों तक शहनाई का कठोर रियाज किया था। काशी की मिट्टी और आबोहवा में उनका संगीत रचा-बसा था।
2. गंगा मैया और बालाजी के प्रति अटूट श्रद्धा: वे गंगा मैया को अपनी माँ और काशी विश्वनाथ/बालाजी को अपना आराध्य मानते थे। वे कहते थे कि जहाँ गंगा नहीं, जहाँ बालाजी का मंदिर नहीं, वहाँ रहकर वे क्या करेंगे?
3. शिष्य के अमेरिका बसने के प्रस्ताव पर उत्तर: जब एक अमीर अमेरिकी शिष्या ने उनसे अमेरिका में बसने और वहाँ काशी जैसा माहौल बनाने को कहा, तो खाँ साहब ने पूछा — 'तू काशी का मंदिर और गंगा मैया कहाँ से लाएगी?'
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (a) 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ भारत की साझी (गंगा-जमुनी) संस्कृति के प्रतीक थे।
(b) बिस्मिल्ला खाँ के सादगीपूर्ण जीवन और उनकी ईश्वर से प्रार्थना के मर्म को स्पष्ट कीजिए।
Part (a) साझी गंगा-जमुनी संस्कृति के प्रतीक:
1. सच्चे नमाज़ी व मुहर्रम का शोक: बिस्मिल्ला खाँ पाँचों वक्त नमाज़ पढ़ने वाले निष्ठावान शिया मुस्लिम थे। मुहर्रम के आठवें दिन वे 8 किलोमीटर नंगे पांव पैदल चलकर हजरत इमाम हुसैन की शहादत में नौहा बजाते हुए आंसू बहाते थे।
2. काशी विश्वनाथ व बालाजी के अनन्य उपासक: उतनी ही अगाध श्रद्धा वे बाबा विश्वनाथ, बालाजी और संकटमोचन हनुमान जी के प्रति रखते थे। वे हर सुबह बालाजी के मंदिर में शहनाई बजाकर अपने दिन की शुरुआत करते थे।
3. धार्मिक कट्टरता का अभाव: उन्होंने कभी हिंदू और मुस्लिम संस्कृति को अलग नहीं माना; उनके लिए संगीत ही उनका सच्चा धर्म और ईश्वर की सच्ची 'इबादत' (उपासना) थी।
Part (b) सादगी व सच्चे सुर की प्रार्थना:
- फटी लुंगी का प्रसंग: देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' और पद्म विभूषण पाने के बाद भी वे फटी हुई साधारण लुंगी पहनकर फर्श पर बैठते थे। उनका मानना था कि आभूषण और वस्त्र केवल बाहरी दिखावा हैं; वास्तविक सम्मान कला और साधना को मिलता है।
- सच्चे सुर की नेमत: उन्होंने धन-दौलत, महल या सांसारिक वैभव कभी नहीं मांगा। नमाज़ के बाद सिजदे में वे हमेशा यही दुआ मांगते थे — 'मेरे मालिक, मुझे एक सच्चा सुर बख्श दे! सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँख से अनगढ़ मोती जैसे सच्चे आंसू छलक पड़ें।'
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): बिस्मिल्ला खाँ की सुर-साधना: 'फटा सुर न बख्शे' (RTC Drill)

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: बिस्मिल्ला खाँ की सुर-साधना: 'फटा सुर न बख्शे' (RTC Drill)
अस्सी बरस से सुर की खोज में खाँ साहब भटक रहे हैं। पाँचों वक़्त वाली नमाज़ इसी सुर को पाने की प्रार्थना में ख़र्च होती है। लाखों सजदे इसी एक सच्चे सुर की इबादत में खुदा के आगे झुकते हैं। वे नमाज़ के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं—'ऐ मालिक! एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।' उनकी शिष्या ने एक बार टोका—'बाबा! आप इतनी फटी तहमद क्यों पहनते हैं? आपको भारत रत्न मिल चुका है।' खाँ साहब हँसकर बोले—'धत! पगली, ई भारत रत्न हमको शहनैया पे मिला है, लुंगिया पे नहीं!'
प्रश्न 1: खाँ साहब अस्सी वर्ष की उम्र में भी ईश्वर से क्या मांगते थे? \rightarrow वे ईश्वर से धन, दौलत या शोहरत नहीं, बल्कि 'एक सच्चा सुर' और सुर में वह असर (तासीर) मांगते थे जो सुनने वाले की आँखों से सच्चे आंसू निकाल दे।
प्रश्न 2: शिष्या के टोकने पर खाँ साहब ने क्या उत्तर दिया और इससे उनके किस गुण का पता चलता है? \rightarrow उन्होंने कहा कि 'भारत रत्न' उनकी शहनाई-साधना को मिला है, लुंगी को नहीं। इससे उनकी अगाध सादगी, निरभिमानता (अहंकार-शून्यता) और कला के प्रति पूर्ण समर्पण का पता चलता है।
प्रश्न 3: इस पाठ के लेखक कौन हैं और इसकी साहित्यिक विधा क्या है? \rightarrow लेखक: यतींद्र मिश्र; विधा: व्यक्तिचित्र (Pen-Portrait)
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: बिस्मिल्ला खाँ के जन्मस्थान (डुमराँव) और ननिहाल (काशी) का उल्लेख।
2 Marks: गंगा-जमुनी साझी संस्कृति (मुहर्रम + बालाजी मंदिर) का विस्तृत विश्लेषण।
1 अंक: सादगी, फटी तहमत और सच्चे सुर की प्रार्थना का आध्यात्मिक मर्म।
1 अंक: रसूलनबाई-बतूलनबाई और कुलसुम हलवाइन के प्रसंगों का उल्लेख।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: बिस्मिल्ला खाँ को केवल मुस्लिम या केवल हिंदू परिवेश का मानना (वे साझी सामासिक संस्कृति के प्रतीक थे)।
Trap 2: शहनाई में प्रयुक्त घास का नाम गलत लिखना (वह 'नरकट' घास है जो सोन नदी किनारे मिलती है)।
Trap 3: डुमराँव और काशी के संबंध को स्पष्ट न करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र) चरित्र-चित्रण व सामाजिक सरोकार
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)' पाठ में लेखक द्वारा प्रस्तुत मुख्य सामाजिक संदेश एवं चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: संदर्भ व पात्र की मनोदशा (Context & Character Analysis): घटना का सटीक संदर्भ तथा मुख्य पात्र के स्वभाव, अंतर्द्वंद्व व आचरण का यथार्थवादी विश्लेषण।
1 अंक
चरण 2: सामाजिक विडंबना व सरोकार (Social Theme & Narrative): पाठ में उठाई गई सामाजिक समस्या, रूढ़िवादिता या मानवीय संवेदना का स्पष्टीकरण।
1 अंक
चरण 3: निष्कर्ष व भाषा-शैली (Conclusion & Register): शुद्ध मुहावरेदार भाषा, सटीक शब्दावली एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का निरूपण।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)' के 3-अंकीय प्रश्न के लिए आदर्श उत्तर प्रस्तुति:

1. पात्र व परिस्थिति का संदर्भ: पाठ की मुख्य घटना के आलोक में संबंधित पात्र की संवेदनाओं और निर्णयों को रेखांकित करें।
2. सामाजिक संदेश: लेखक समाज की किस विडंबना, पाखंड अथवा आदर्श को उजागर करना चाहते हैं, उसे स्पष्ट करें।
3. निष्कर्ष: पाठ के मूल उद्देश्य को संक्षेप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
केवल कहानी का सारांश न लिखें; परीक्षक पात्र की मानसिकता और लेखक के व्यंग्य/संदेश पर अंक देते हैं।
उत्तर को 3 स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
बिस्मिल्ला खाँ और काशी एक-दूसरे के पर्याय थे। वे कहते थे कि काशी छोड़कर कहाँ जाएं? जहाँ बाबा विश्वनाथ हैं, गंगा मैया हैं और बालाजी का मंदिर है। वे गंगा मैया के घाट और बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर बैठकर घंटों रियाज़ करते थे; शहनाई और काशी उनके लिए साक्षात् स्वर्ग थे।

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