Curriculum 2026–27
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हिंदी (Course A & Course B)Ch-25 15 min comprehensive revision
NCERT Class 10 Hindi — पाठ 25

समास (Course B)

समास की परिभाषा (दो या अधिक पदों का संक्षिप्तीकरण), समस्त पद व समास विग्रह, समास के 6 प्रमुख भेद: अव्ययीभाव, तत्पुरुष (कर्म से अधिकरण), कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, और बहुव्रीहि समास के नियम व 50+ उदाहरण।

Quick Key Takeaways:
समास की परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नवीन सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास (Compound) कहते हैं। समास में दो पद होते हैं: पूर्वपद (पहला) और उत्तरपद (दूसरा)।
समास के 6 प्रमुख भेद:
- 1. अव्ययीभाव समास: पूर्वपद अव्यय/प्रधान हो (उदा. 'यथाशक्ति' = शक्ति के अनुसार, 'प्रतिदिन' = प्रत्येक दिन, 'आजीवन' = जीवन भर)।
- 2. तत्पुरुष समास: उत्तरपद प्रधान हो और दोनों पदों के बीच कारक-चिह्न लुप्त हो (उदा. 'राजपुत्र' = राजा का पुत्र, 'हस्तलिखित' = हाथ से लिखित, 'देशभक्ति' = देश के लिए भक्ति)।
- 3. कर्मधारय समास: दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध हो (उदा. 'नीलकमल' = नीला है जो कमल, 'चरणकमल' = कमल के समान चरण, 'चंद्रमुख' = चंद्रमा के समान मुख)।
- 4. द्विगु समास: पूर्वपद संख्यावाची विशेषण हो और समूह का बोध कराए (उदा. 'त्रिलोक' = तीन लोकों का समाहार, 'चौराहा' = चार राहों का समूह, 'सप्ताह' = सात दिनों का समाहार)।
- 5. द्वंद्व समास: दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर 'और, तथा, या, अथवा' लगे (उदा. 'माता-पिता' = माता और पिता, 'दिन-रात' = दिन और रात, 'सुख-दुख' = सुख और दुख)।
- 6. बहुव्रीहि समास: दोनों पद अप्रधान हों और मिलकर किसी तीसरे विशेष पद (अन्य पद) की ओर संकेत करें (उदा. 'पीतांबर' = पीत हैं अंबर जिसके अर्थात श्रीकृष्ण, 'दशानन' = दस हैं आनन जिसके अर्थात रावण, 'लंबोदर' = लंबा है उदर जिसका अर्थात गणेश जी)।
द्विगु बनाम बहुव्रीहि / कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि: 'दशानन' द्विगु भी हो सकता है (दस सिरों का समूह) और बहुव्रीहि भी (रावण); विग्रह पर निर्भर करता है।
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1. 6 समास भेदों के लक्षण, विग्रह सूत्र व पद-प्रधानता तालिका

मूल वैचारिक आधार

पाठ का विस्तृत कथानक, केंद्रीय विचार, भाषा-शिल्प तथा समास (Course B) की रूपरेखा।

पद-प्रधानता के आधार पर समास वर्गीकरण
पूर्वपद प्रधान: अव्ययीभाव समास।
उत्तरपद प्रधान: तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु समास।
दोनों पद प्रधान: द्वंद्व समास।
तीसरा पद प्रधान: बहुव्रीहि समास।
📊 समास: 6 भेदों का वर्गीकरण व पद-प्रधानता चक्रVisual Model
समास चक्र: 6 भेद, विग्रह व पद-प्रधानता
अव्ययीभाव, तत्पुरुष व कर्मधारय
अव्ययीभाव: प्रथम पद अव्यय/प्रधान (प्रतिदिन, आजन्म, यथाशक्ति)
तत्पुरुष: उत्तर पद प्रधान + कारक चिन्हों का लोप (राजपुत्र, रोगमुक्त)
कर्मधारय: विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान (नीलकमल, चंद्रमुख)
द्विगु, द्वंद्व व बहुव्रीहि
द्विगु: प्रथम पद संख्यावाचक (त्रिफला, चौराहा, नवरत्न)
द्वंद्व: दोनों पद समान प्रधान + 'और/या' (माता-पिता, दिन-रात)
बहुव्रीहि: दोनों पद अप्रधान, तीसरा अर्थ प्रधान (दशानन, पीतांबर, लंबोदर)
समास सूत्र: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नए सार्थक शब्द निर्माण की संक्षिप्त प्रक्रिया

अव्ययीभाव (पूर्वपद), तत्पुरुष-कर्मधारय-द्विगु (उत्तरपद), द्वंद्व (उभयपद), तथा बहुव्रीहि (अन्यपद) का संपूर्ण सामासिक ढाँचा।

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2. 50+ उच्च-स्तरीय समस्त पद व समास विग्रह मॉडल तालिका

सप्रसंग व्याख्या व शिल्प

काव्यांश/गद्यांश का सप्रसंग भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य, रस, छंद व व्याकरणिक विश्लेषण।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण सामासिक पद
'गंगाजल' = गंगा का जल (संबध तत्पुरुष)
'नीलकंठ' = नीला है जो कंठ (कर्मधारय) / नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव (बहुव्रीहि)
'नवग्रह' = नौ ग्रहों का समाहार (द्विगु)
'दाल-रोटी' = दाल और रोटी (द्वंद्व)
'प्रतिवर्ष' = प्रत्येक वर्ष (अव्ययीभाव)
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3. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा उच्च-अंक प्रश्नोत्तर (3-अंक व 5-अंक)

आदर्श मॉडल उत्तर

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मानक 30-40 शब्द व 100-120 शब्द वाले दीर्घ उत्तरीय आदर्श उत्तर।

3-अंक लघु उत्तरीय प्रश्न: निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करके समास का नाम लिखिए:
(क) चंद्रमौली
(ख) यथाविधि
(ग) पाप-पुण्य
(घ) पंचतत्व
(क) 'चंद्रमौली': विग्रह: 'चंद्रमा है मौली (मस्तक) पर जिसके अर्थात् भगवान शिव' \rightarrow बहुव्रीहि समास
(ख) 'यथाविधि': विग्रह: 'विधि के अनुसार' \rightarrow अव्ययीभाव समास
(ग) 'पाप-पुण्य': विग्रह: 'पाप और पुण्य' \rightarrow द्वंद्व समास
(घ) 'पंचतत्व': विग्रह: 'पाँच तत्वों का समाहार' \rightarrow द्विगु समास
5-अंक दीर्घ उत्तरीय / मूल्यपरक प्रश्न: (क) कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर स्पष्ट कीजिए। 'पीतांबर' शब्द का दोनों समासों में विग्रह कीजिए।
(ख) तत्पुरुष समास के किन्हीं तीन उप-भेदों के सोदाहरण नाम लिखिए।
(क) कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि समास:
1. कर्मधारय समास: दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है और उत्तरपद प्रधान होता है।
- 'पीतांबर' का कर्मधारय विग्रह: 'पीला है जो अंबर (वस्त्र)'
2. बहुव्रीहि समास: दोनों पद मिलकर किसी तीसरे स्वतंत्र व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं और तीसरा पद प्रधान होता है।
- 'पीतांबर' का बहुव्रीहि विग्रह: 'पीले हैं अंबर जिसके अर्थात् श्रीकृष्ण'
(ख) तत्पुरुष समास के 3 उप-भेद:
1. कर्म तत्पुरुष ('को' का लोप): 'ग्रामगत' = ग्राम को गया हुआ।
2. करण तत्पुरुष ('से/के द्वारा' का लोप): 'तुलसीकृत' = तुलसी द्वारा कृत।
3. अपादान तत्पुरुष ('से' अलग होने का लोप): 'ऋणमुक्त' = ऋण से मुक्त।
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4. संदर्भ-सहित काव्यांश/गद्यांश अभ्यास (RTC Drill): समास बहुविकल्पीय अभ्यास

काव्यांश/गद्यांश बोध

मूल पाठ से उद्धृत काव्यांश/गद्यांश पर आधारित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय व वर्णनात्मक प्रश्न।

मूल उद्धरण: समास बहुविकल्पीय अभ्यास
सीबीएसई Course B परीक्षा में समास से संबंधित 4 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
प्रश्न 1: 'त्रिनेत्र' (तीन नेत्रों का समाहार) में कौन-सा समास है? \rightarrow द्विगु समास (और यदि विग्रह 'तीन हैं नेत्र जिसके अर्थात् शिव' हो, तो बहुव्रीहि समास)।
प्रश्न 2: 'रातों-रात' शब्द में कौन-सा समास है? \rightarrow अव्ययीभाव समास (विग्रह: 'रात ही रात में')।
प्रश्न 3: जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, उसे क्या कहते हैं? \rightarrow द्वंद्व समास
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5. सीबीएसई परीक्षक अंकन योजना, साहित्यिक शब्दावली व वर्तनी सावधानियां

बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर व अंकन योजना

बोर्ड परीक्षा अंकन निर्देश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, काव्य सौंदर्य एवं सटीक उत्तर लेखन के महत्वपूर्ण सुझाव।

चरणबद्ध अंकन योजना व मानक प्रस्तुति
1 अंक: सामासिक पद के सही विग्रह का उल्लेख।
1 अंक: समास के सही भेद की पहचान।
1 अंक: कर्मधारय, द्विगु और बहुव्रीहि के सूक्ष्म अंतर की व्याख्या।
सामान्य वर्तनी त्रुटियां व सावधानियां
Trap 1: विग्रह के बिना समास का भेद लिखना (जैसे 'नीलकंठ' का भेद विग्रह पर निर्भर करता है)।
Trap 2: पुनरुक्त शब्दों ('दिनों-दिन', 'हाथों-हाथ') को द्वंद्व समझना (वे अव्ययीभाव समास होते हैं)।
Trap 3: तत्पुरुष में कारक-चिह्न का गलत लोप करना।
Authentic Board Question (3 Marks)Topic: समास (Course B) व्याकरणिक नियम व शुद्ध अनुप्रयोग
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के अनुसार 'समास (Course B)' के नियमों, भेद की पहचान और व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रारूप स्पष्ट कीजिए।

Official CBSE Step-by-Step Marking Breakdown:

चरण 1: व्याकरणिक भेद की पहचान (Identification): दिए गए वाक्य अथवा पद में सही भेद या प्रारूप की सटीक पहचान।
1 अंक
चरण 2: रूपांतरण / विग्रह के नियम (Rule Application): व्याकरणिक नियमों के अनुसार शुद्ध वाक्य रूपांतरण, समास विग्रह अथवा विषय-विस्तार।
1 अंक
चरण 3: व्याकरणिक शुद्धता व वर्तनी (Syntactic Precision): लिंग, वचन, कारक व वर्तनी की पूर्ण शुद्धता एवं विराम चिह्नों का सही प्रयोग।
1 अंक
Model Student Answer (Target: Full 3/3 Marks):
'समास (Course B)' में पूरे अंक प्राप्त करने की विधि:

1. सटीक नियम: रेखांकित पद या वाक्य का भेद पहचानते समय उसके मुख्य लक्षण का उल्लेख करें।
2. शुद्ध रूपांतरण: निर्देशानुसार रूपांतरण करते समय वाक्य का मूल अर्थ बदले बिना संरचना में परिवर्तन करें।
3. वर्तनी व विराम चिह्न: उत्तर में वर्तनी की त्रुटि न हो तथा पूर्णविराम, अल्पविराम का उचित प्रयोग करें।
Examiner Mark Deduction Traps:
व्याकरण में भेद का नाम लिखते समय मात्राओं की अशुद्धि से अंक कटते हैं।
समास विग्रह करते समय दोनों पदों का अर्थ स्पष्ट करें।

High-Frequency Conceptual Doubts & FAQs

Curated answers to the most common questions asked by Class 10 students.
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नए सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। छह भेद हैं:
1. अव्ययीभाव समास: पूर्व पद प्रधान व अव्यय (उदा. यथाशक्ति, प्रतिदिन).
2. तत्पुरुष समास: उत्तर पद प्रधान, कारक चिह्नों का लोप (उदा. राजपुत्र, देशप्रेम).
3. कर्मधारय समास: विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध (उदा. नीलकमल, चंद्रमुख).
4. द्विगु समास: पहला पद संख्यावाचक विशेषण (उदा. नवग्रह, चौराहा).
5. द्वंद्व समास: दोनों पद प्रधान, बीच में योजक चिह्न (उदा. माता-पिता, दिन-रात).
6. बहुव्रीहि समास: दोनों पद अप्रधान, कोई तीसरा अन्य अर्थ प्रधान (उदा. दशानन, पीतांबर).

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